नगालैंड आईईडी धमाका: शहीद हवलदार मोहम्मद इकबाल का पार्थिव शरीर पुंछ भेजा जाएगा, तलाशी अभियान तेज
सारांश
मुख्य बातें
नगालैंड के चुमौकेदिमा जिले में 14 जुलाई 2025 को हुए भीषण आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) धमाके में असम राइफल्स के हवलदार मोहम्मद इकबाल की शहादत के बाद, मंगलवार को सुरक्षा बलों ने इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया। धमाके में चार अन्य जवान घायल हुए थे, जिनकी हालत अधिकारियों के अनुसार अब स्थिर बताई जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
सोमवार दोपहर सुखोवी के पास असम राइफल्स के काफिले में शामिल एक वाहन से टकराने के बाद आईईडी में विस्फोट हुआ। यह धमाका असम राइफल्स ट्रेनिंग सेंटर एवं स्कूल, सुखोवी के निकट हुआ, जिससे पास खड़ी एक ऑटो-रिक्शा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। विस्फोट के मलबे से एक आम नागरिक के पैर में भी चोट लगी।
रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि घायल चारों जवानों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति खतरे से बाहर है। धमाके के बाद असम राइफल्स और नगालैंड पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियाँ तैनात कर तलाशी अभियान को और तेज कर दिया गया है।
शहीद हवलदार को श्रद्धांजलि
शहीद हवलदार मोहम्मद इकबाल (28) जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के मूल निवासी थे और असम राइफल्स ट्रेनिंग सेंटर, सुखोवी से जुड़े हुए थे। मंगलवार दोपहर श्रद्धांजलि समारोह के बाद उनका पार्थिव शरीर उनके गृह राज्य भेजे जाने की संभावना है।
असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा सेना और असम राइफल्स के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुखोवी स्थित ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में शामिल हो सकते हैं।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
नगालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव, मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो, उपमुख्यमंत्री यांथुंगो पैटन और लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा ने इस कायराना हमले की कड़ी निंदा की है और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का संकल्प व्यक्त किया है। नगालैंड पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब तक किसी भी उग्रवादी संगठन या अन्य समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
क्षेत्रीय सुरक्षा परिप्रेक्ष्य
यह आईईडी धमाका 6 जुलाई 2025 की उस घटना के ठीक आठ दिन बाद हुआ, जब पड़ोसी राज्य मणिपुर के हिंसा प्रभावित उखरुल में इंफाल-दीमापुर नेशनल हाईवे पर नुंगशांग कोंग के निकट संदिग्ध नगा हथियारबंद उग्रवादियों ने असम राइफल्स के वाहन पर घात लगाकर हमला किया था। उस हमले में वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह और हवलदार चंद्र मोहन सिंह शहीद हो गए थे।
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में सुरक्षा बलों पर हमलों की आवृत्ति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है। गौरतलब है कि एक पखवाड़े के भीतर असम राइफल्स के तीन जवानों की शहादत ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।
आगे की कार्रवाई
सुरक्षा बल फिलहाल चुमौकेदिमा जिले में व्यापक तलाशी अभियान जारी रखे हुए हैं। जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि आईईडी किसने और किस संगठन के इशारे पर लगाया। हमले की जिम्मेदारी न लिए जाने से जाँच और जटिल हो गई है।