ताहिर हुसैन दोषी करार: केजरीवाल बोले- 'पार्टी से कोई नाता नहीं', भाजपा ने कसा शिकंजा
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार, 14 जुलाई को स्पष्ट किया कि 2020 के दिल्ली दंगों में दोषी ठहराए गए पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन का पार्टी से कोई संबंध नहीं है। केजरीवाल ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि हुसैन को 'बहुत पहले ही पार्टी से निकाल दिया गया था।' यह बयान भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तीखी आलोचना के बाद आया, जिसने आप नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए थे।
अदालत का फैसला और मामले की पृष्ठभूमि
सोमवार, 13 जुलाई को नई दिल्ली की एक अदालत ने ताहिर हुसैन और चार अन्य को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी पाया। अदालत ने उन्हें दुश्मनी फैलाने, दंगा करने, मारपीट, आपराधिक बल प्रयोग और हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषी करार दिया। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 की सांप्रदायिक हिंसा के दौरान अंकित शर्मा लापता हो गए थे और बाद में उनका शव चांद बाग इलाके के पास एक नाले से बरामद हुआ था।
केजरीवाल और आप की सफाई
केजरीवाल ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि 2020 में एफआईआर दर्ज होते ही हुसैन को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था। आप ने भी सोमवार को स्पष्ट किया कि हुसैन का पार्टी से कोई सक्रिय संबंध नहीं रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही कई मोर्चों पर राजनीतिक दबाव झेल रही है।
भाजपा का पलटवार
दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल उठाया कि दोषी ठहराए जाने के बाद अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह चुप क्यों हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि 'आप नेताओं ने वोट बैंक की राजनीति के लिए ताहिर हुसैन का पुरजोर बचाव किया था' और 'देश यह नहीं भूलेगा कि आप ने चुनावी फायदे के लिए एक हत्यारे और दंगाई का साथ देना चुना था।' भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा कि 'हुसैन दोषी ठहराया गया है — सत्यमेव जयते।'
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि 2020 के दिल्ली दंगे देश की राजनीति में एक संवेदनशील और विवादास्पद अध्याय रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब किसी राजनीतिक दल को अपने पूर्व सदस्य की आपराधिक संलिप्तता पर सफाई देनी पड़ी हो। आलोचकों का कहना है कि दोष-सिद्धि के बाद राजनीतिक दलों द्वारा दूरी बनाना एक सामान्य रणनीति है, लेकिन असली जवाबदेही तब तय होती है जब आरोप प्रारंभिक चरण में हों। अब जबकि अदालत ने फैसला सुना दिया है, सज़ा का निर्धारण अगले चरण में होगा।