आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों की सजा पर 23 जुलाई से सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) नेता ताहिर हुसैन सहित पाँच आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत अब 23 जुलाई 2025 से दोषसिद्ध व्यक्तियों को दी जाने वाली सजा की अवधि निर्धारित करने के लिए दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी। इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है।
मुख्य घटनाक्रम
अभियोजन पक्ष के अनुसार, फरवरी 2020 के दंगों के दौरान एक हिंसक भीड़ ने IB अधिकारी अंकित शर्मा पर हमला किया, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई। लंबी न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों की जाँच के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन सहित पाँचों आरोपियों को दोषी ठहराया। यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक रहा है।
सजा सुनवाई की प्रक्रिया
अब अदालत 23 जुलाई से सजा निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करेगी, जिसमें अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे। अदालत इन दलीलों के आधार पर दोषियों को दी जाने वाली सजा की अवधि तय करेगी। गौरतलब है कि यह मामला 2020 से न्यायालय में विचाराधीन था और इसमें साक्ष्यों की जाँच में काफी समय लगा।
विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रिया
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, 'फरवरी 2020 की घटनाओं ने दिखाया कि दंगों के दौरान छतों पर हथियार, पेट्रोल बम, पत्थर और अन्य हमलावर सामग्री पहले से जुटाई गई थी। ताहिर हुसैन का परिसर किसी सामान्य घर की तरह नहीं, बल्कि हिंसक गतिविधियों के केंद्र जैसा दिखाई देता था। वहाँ एकत्र लोगों ने स्थानीय हिंदू समुदाय को निशाना बनाया और उनके घरों पर हमले किए।'
शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'दोषियों को सजा मिलना न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करता है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला दिया है और अंकित शर्मा के परिवार को न्याय मिलना सबसे महत्वपूर्ण है। हालाँकि इसे राजनीतिक लाभ के बजाय न्याय के नज़रिए से देखा जाना चाहिए। यदि फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दी जाती है, तो अभियोजन पक्ष को मजबूत तरीके से अपना पक्ष रखना चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को अंतिम न्याय मिल सके।'
आम जनता और पीड़ित परिवार पर असर
यह फैसला अंकित शर्मा के परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो पाँच वर्षों से अधिक समय से इस मुकदमे की प्रतीक्षा में थे। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के प्रभावित इलाकों में रहने वाले समुदायों के लिए भी यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में आस्था बनाए रखने का संकेत है। आलोचकों का कहना है कि इस मामले की व्यापक राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए सजा के चरण पर भी सभी पक्षों की नज़र बनी रहेगी।
क्या होगा आगे
23 जुलाई से शुरू होने वाली सजा सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि दोषियों को कितनी और किस धारा के तहत सजा दी जाए। संभावना है कि बचाव पक्ष इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है। इस मामले का अंतिम परिणाम 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े अन्य लंबित मामलों की दिशा पर भी असर डाल सकता है।