19 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली दंगा 2020: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट 4 जून को सुनाएगा फैसला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली दंगा 2020: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट 4 जून को सुनाएगा फैसला

सारांश

फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की सबसे संवेदनशील कड़ी — IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या — पर अब फैसले की घड़ी है। कड़कड़डूमा कोर्ट 4 जून को पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन सहित 11 आरोपियों के भाग्य का निर्धारण करेगा। यह फैसला दंगों से जुड़े अन्य लंबित मुकदमों के लिए नज़ीर बन सकता है।

मुख्य बातें

कड़कड़डूमा कोर्ट गुरुवार, 4 जून को IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में फैसला सुनाएगा।
मामले में पूर्व AAP नेता और पूर्व एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन सहित कुल 11 आरोपी हैं।
हत्या 25 फरवरी 2020 को चांद बाग पुलिया के पास हुई थी; शव नाले से बरामद हुआ था।
पोस्टमार्टम के अनुसार शरीर पर धारदार हथियारों के वार और कथित तौर पर तेज़ाब से झुलसाने के निशान थे।
एफआईआर मृतक के पिता की शिकायत पर दयालपुर थाने में दर्ज हुई थी; सुनवाई लगभग 6 साल चली।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट गुरुवार, 4 जून को अपना फैसला सुनाएगा। इस मामले में पूर्व एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन सहित कुल 11 आरोपी हैं, जिन पर लगभग छह वर्षों तक सुनवाई चली।

मुख्य घटनाक्रम

अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में पेश दस्तावेज़ों के अनुसार, 25 फरवरी 2020 की शाम चांद बाग पुलिया के पास एक दंगाई भीड़ ने अंकित शर्मा को घेर लिया था। आरोप है कि भीड़ उन्हें जबरन खींचकर ले गई और उन पर बेरहमी से हमला किया गया। हत्या के बाद उनका शव पास के एक नाले से बरामद किया गया था, जिसने उस समय पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

एफआईआर और जाँच

इस मामले में अंकित शर्मा के पिता की शिकायत के आधार पर दयालपुर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायालय में पेश साक्ष्यों के मुताबिक, मृतक के शरीर पर धारदार हथियारों से वार किए गए थे और चेहरे व शरीर को कथित तौर पर तेज़ाब से भी झुलसाया गया था।

आरोपी और बचाव पक्ष का रुख

प्रमुख आरोपियों में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और पूर्व एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन का नाम शामिल है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया है कि यह हत्या सुनियोजित हिंसा का हिस्सा थी, जबकि बचाव पक्ष ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है।

राजनीतिक और सामाजिक असर

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों में 53 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। अंकित शर्मा की हत्या उन चुनिंदा मामलों में से एक रही जिसने राजनीतिक बहस को सबसे तीव्र रूप दिया, क्योंकि मृतक केंद्रीय खुफिया एजेंसी का कर्मचारी था। गौरतलब है कि दंगों से जुड़े कई मामलों में अब तक अलग-अलग अदालतों के फैसले आ चुके हैं, लेकिन यह मामला प्रतीकात्मक रूप से सबसे संवेदनशील माना जाता रहा है।

क्या होगा आगे

लगभग छह वर्षों से चल रही सुनवाई के बाद अब सभी की निगाहें 4 जून को कड़कड़डूमा कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। फैसले का असर न केवल आरोपियों के भविष्य पर, बल्कि 2020 के दंगों से जुड़े अन्य लंबित मुकदमों की दिशा पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2020 दिल्ली दंगों की न्यायिक प्रक्रिया का बैरोमीटर है। छह साल की लंबी सुनवाई खुद इस ओर इशारा करती है कि सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में भारतीय न्याय-तंत्र किस गति से चलता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर 'फैसले के दिन' पर रुक जाती है, लेकिन असली सवाल यह है कि साक्ष्य की कड़ी — गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट, फोन लोकेशन डेटा — कितनी मज़बूती से जुड़ी। दंगों से जुड़े कई समानांतर मुकदमों में बरी होने की दर ने पहले ही जाँच की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकित शर्मा हत्याकांड में फैसला कब आएगा?
कड़कड़डूमा कोर्ट गुरुवार, 4 जून को IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में अपना फैसला सुनाएगा। मामले की सुनवाई लगभग छह वर्षों तक चली है।
अंकित शर्मा कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी थे, जिनकी 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान चांद बाग पुलिया के पास हत्या कर दी गई थी। उनका शव पास के एक नाले से बरामद किया गया था और पोस्टमार्टम में धारदार हथियारों के वार तथा कथित तौर पर तेज़ाब से झुलसाने के निशान पाए गए थे।
इस मामले में कितने आरोपी हैं और प्रमुख नाम कौन हैं?
इस मामले में कुल 11 आरोपी हैं, जिनमें प्रमुख नाम पूर्व आम आदमी पार्टी नेता और पूर्व एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन का है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि यह हत्या सुनियोजित हिंसा का हिस्सा थी, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को खारिज किया है।
एफआईआर कहाँ दर्ज हुई थी?
अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर दयालपुर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जाँच आगे बढ़ाई और चार्जशीट कड़कड़डूमा कोर्ट में दाखिल की गई।
यह फैसला क्यों मायने रखता है?
यह फैसला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे संवेदनशील मामलों में से एक का अंतिम निष्कर्ष है, क्योंकि मृतक केंद्रीय खुफिया एजेंसी का कर्मचारी था। फैसले का असर दंगों से जुड़े अन्य लंबित मुकदमों की दिशा और न्यायिक नज़ीर पर भी पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 5 दिन पहले
  3. 5 दिन पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 9 महीने पहले