दिल्ली दंगा 2020: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट 4 जून को सुनाएगा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट गुरुवार, 4 जून को अपना फैसला सुनाएगा। इस मामले में पूर्व एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन सहित कुल 11 आरोपी हैं, जिन पर लगभग छह वर्षों तक सुनवाई चली।
मुख्य घटनाक्रम
अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में पेश दस्तावेज़ों के अनुसार, 25 फरवरी 2020 की शाम चांद बाग पुलिया के पास एक दंगाई भीड़ ने अंकित शर्मा को घेर लिया था। आरोप है कि भीड़ उन्हें जबरन खींचकर ले गई और उन पर बेरहमी से हमला किया गया। हत्या के बाद उनका शव पास के एक नाले से बरामद किया गया था, जिसने उस समय पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
एफआईआर और जाँच
इस मामले में अंकित शर्मा के पिता की शिकायत के आधार पर दयालपुर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायालय में पेश साक्ष्यों के मुताबिक, मृतक के शरीर पर धारदार हथियारों से वार किए गए थे और चेहरे व शरीर को कथित तौर पर तेज़ाब से भी झुलसाया गया था।
आरोपी और बचाव पक्ष का रुख
प्रमुख आरोपियों में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और पूर्व एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन का नाम शामिल है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया है कि यह हत्या सुनियोजित हिंसा का हिस्सा थी, जबकि बचाव पक्ष ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है।
राजनीतिक और सामाजिक असर
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों में 53 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। अंकित शर्मा की हत्या उन चुनिंदा मामलों में से एक रही जिसने राजनीतिक बहस को सबसे तीव्र रूप दिया, क्योंकि मृतक केंद्रीय खुफिया एजेंसी का कर्मचारी था। गौरतलब है कि दंगों से जुड़े कई मामलों में अब तक अलग-अलग अदालतों के फैसले आ चुके हैं, लेकिन यह मामला प्रतीकात्मक रूप से सबसे संवेदनशील माना जाता रहा है।
क्या होगा आगे
लगभग छह वर्षों से चल रही सुनवाई के बाद अब सभी की निगाहें 4 जून को कड़कड़डूमा कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। फैसले का असर न केवल आरोपियों के भविष्य पर, बल्कि 2020 के दंगों से जुड़े अन्य लंबित मुकदमों की दिशा पर भी पड़ सकता है।