20 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बिहार की पहली रिवर लिंक परियोजना शुरू: बागमती का पानी अब बूढ़ी गंडक तक, 50 लाख किसानों को फायदा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बिहार की पहली रिवर लिंक परियोजना शुरू: बागमती का पानी अब बूढ़ी गंडक तक, 50 लाख किसानों को फायदा

सारांश

बिहार ने 19 जुलाई को राज्य की पहली रिवर लिंक परियोजना शुरू की — 68.80 किमी लंबा बेलवा-मीनापुर चैनल बागमती का पानी बूढ़ी गंडक तक पहुँचाएगा। ₹130.88 करोड़ की इस योजना से 50 लाख किसान और 1.39 लाख हेक्टेयर ज़मीन को सिंचाई का फायदा मिलने का दावा है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 19 जुलाई 2026 को शिवहर में बिहार की पहली नदी जोड़ो (रिवर लिंक) परियोजना का उद्घाटन किया।
बेलवा-मीनापुर लिंक चैनल की लंबाई लगभग 68.80 किलोमीटर ; लागत ₹130 करोड़ 88 लाख ।
सरकार के अनुसार, शिवहर , सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर के लगभग 50 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
लगभग 1.39 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए स्थायी सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित होगी।
इसी कार्यक्रम में शिवहर जिले में ₹184 करोड़ 6 लाख 82 हज़ार की अन्य विकास योजनाओं का भी शिलान्यास-उद्घाटन हुआ।
बाढ़ के अतिरिक्त जल को बूढ़ी गंडक में मोड़कर उत्तर बिहार में बाढ़ का दबाव कम करने का लक्ष्य।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 19 जुलाई 2026 को शिवहर जिले में राज्य की पहली नदी जोड़ो (रिवर लिंक) परियोजना का उद्घाटन किया — एक ऐसा कदम जिसे राज्य सरकार बिहार के जल प्रबंधन इतिहास में मील का पत्थर बता रही है। इस अवसर पर बेलवा डैम से बागमती नदी का पानी लिंक चैनल के ज़रिए मुजफ्फरपुर के मीनापुर स्थित बूढ़ी गंडक नदी की ओर प्रवाहित किया गया।

परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, बेलवा-मीनापुर लिंक चैनल की कुल लंबाई लगभग 68.80 किलोमीटर है और इसे ₹130 करोड़ 88 लाख की लागत से तैयार किया गया है। यह चैनल शिवहर के बेलवा से मुजफ्फरपुर के मीनापुर तक फैला है और बागमती व बूढ़ी गंडक नदियों को आपस में जोड़ता है।

इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शिवहर जिले में ₹184 करोड़ 6 लाख 82 हज़ार की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मंत्री, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और स्थानीय निवासी उपस्थित रहे।

सरकार का दावा: किसानों और खेती को सीधा लाभ

राज्य सरकार के अनुसार, इस परियोजना से शिवहर, सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर जिलों के लगभग 50 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। सरकारी दावे के मुताबिक, करीब 1.39 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए सिंचाई की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित होगी, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मज़बूती मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि यह परियोजना बिहार के जल संसाधनों के समेकित और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार जल सुरक्षा, सिंचाई विस्तार और बाढ़ प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए दीर्घकालिक योजनाओं पर काम कर रही है।

बाढ़ प्रबंधन में भूमिका

अधिकारियों के अनुसार, बागमती नदी से बाढ़ के अतिरिक्त पानी को लिंक चैनल के माध्यम से बूढ़ी गंडक नदी में मोड़ने से जल निकासी बेहतर होगी और प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ का दबाव कम होगा। गौरतलब है कि बिहार प्रत्येक वर्ष बागमती और उससे जुड़ी नदियों की बाढ़ से भारी नुकसान उठाता है — यह परियोजना उसी समस्या के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में एक प्रयास है।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मानसून सत्र शुरू हो चुका है और उत्तर बिहार के ज़िले बाढ़ के उच्च जोखिम में रहते हैं।

राष्ट्रीय जल नीति से जुड़ाव

मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'समेकित जल संसाधन प्रबंधन' के विज़न से जोड़ा। राज्य सरकार इसे बिहार में जल संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मान रही है।

आने वाले वर्षों में इस मॉडल को बिहार की अन्य नदियों के बीच भी लागू किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता — यह परियोजना उस दिशा में एक परीक्षण भी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि 50 लाख किसानों और 1.39 लाख हेक्टेयर सिंचाई का दावा ज़मीन पर कितना उतरता है — क्योंकि बिहार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के वादे और उनका क्रियान्वयन अक्सर अलग-अलग रहे हैं। बाढ़ प्रबंधन का पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है: बागमती का अतिरिक्त पानी बूढ़ी गंडक में डालने से एक नदी का बोझ कम होगा, लेकिन दूसरी पर दबाव बढ़ने की आशंका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। 68.80 किमी लंबे चैनल के रखरखाव और दीर्घकालिक संचालन की व्यवस्था पर अभी कोई स्पष्ट रोडमैप सार्वजनिक नहीं हुआ है — वही इस परियोजना की वास्तविक सफलता तय करेगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार की पहली रिवर लिंक परियोजना क्या है?
यह बेलवा (शिवहर) से मीनापुर (मुजफ्फरपुर) तक बनाया गया लगभग 68.80 किलोमीटर लंबा लिंक चैनल है, जो बागमती नदी के पानी को बूढ़ी गंडक नदी से जोड़ता है। इसे ₹130 करोड़ 88 लाख की लागत से तैयार किया गया है और 19 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसका उद्घाटन किया।
इस परियोजना से किन जिलों को फायदा मिलेगा?
सरकार के अनुसार, शिवहर, सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। इन जिलों के लगभग 50 लाख किसानों और करीब 1.39 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए स्थायी सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होने का दावा किया गया है।
यह परियोजना बाढ़ नियंत्रण में कैसे मदद करेगी?
अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ के दौरान बागमती नदी के अतिरिक्त पानी को लिंक चैनल के ज़रिए बूढ़ी गंडक में मोड़ा जाएगा, जिससे जल निकासी बेहतर होगी और उत्तर बिहार के प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ का दबाव कम होगा।
बेलवा-मीनापुर लिंक चैनल की लागत और लंबाई कितनी है?
इस लिंक चैनल की लंबाई लगभग 68.80 किलोमीटर है और इसे ₹130 करोड़ 88 लाख की लागत से बनाया गया है। यह शिवहर के बेलवा से मुजफ्फरपुर के मीनापुर तक फैला है।
19 जुलाई के कार्यक्रम में और क्या घोषणाएँ हुईं?
रिवर लिंक परियोजना के उद्घाटन के साथ-साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिवहर जिले में ₹184 करोड़ 6 लाख 82 हज़ार की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर मंत्री, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले