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जनकपुरी स्कूल को दिल्ली सरकार का कारण बताओ नोटिस: यौन उत्पीड़न छिपाने, अवैध शाखाओं और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप

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जनकपुरी स्कूल को दिल्ली सरकार का कारण बताओ नोटिस: यौन उत्पीड़न छिपाने, अवैध शाखाओं और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप

सारांश

जनकपुरी के एक निजी स्कूल पर दिल्ली सरकार सख्त — नर्सरी बच्ची के कथित यौन उत्पीड़न को छिपाने, 64 खराब CCTV कैमरों, अवैध आवासीय शाखाओं और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों में कारण बताओ नोटिस जारी। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने लीज रद्द करने तक की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

दिल्ली सरकार ने जनकपुरी के एक निजी स्कूल को 19 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
30 अप्रैल को नर्सरी कक्षा की बच्ची के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना को स्कूल ने शिक्षा निदेशालय से छिपाया।
जांच में 64 सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह खराब मिले; रखरखाव का कोई अनुबंध नहीं था।
स्कूल नरंग कॉलोनी की आवासीय इमारत से बिना अनुमति नर्सरी-केजी कक्षाएं चला रहा था; बेसमेंट का उपयोग बच्चों के गतिविधि क्षेत्र के रूप में हो रहा था।
स्कूल में चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी, पॉक्सो नोडल अधिकारी और सुरक्षाकर्मियों का पुलिस सत्यापन — कुछ भी नहीं था।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने स्कूल प्रबंधन अधिग्रहण और भूमि लीज रद्द करने की चेतावनी दी; जवाब के लिए 7 दिन का समय।

दिल्ली सरकार ने जनकपुरी स्थित एक निजी स्कूल के प्रबंधन को 19 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस गंभीर सुरक्षा उल्लंघनों, बिना अनुमति शाखाएं चलाने और बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर जारी किया गया है। स्कूल प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

शिक्षा निदेशालय की विशेष समितियों ने कई चरणों में की गई आधिकारिक जांच में स्कूल के प्रशासनिक, वित्तीय और नैतिक संचालन में गंभीर खामियां उजागर की हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, 30 अप्रैल को स्कूल के प्री-प्राइमरी विंग में नर्सरी कक्षा की एक बच्ची के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न की घटना हुई थी। स्कूल प्रबंधन ने इस घटना की जानकारी शिक्षा निदेशालय को नहीं दी, जो अनिवार्य बाल सुरक्षा कानूनों का सीधा उल्लंघन है।

सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां

जांच में सामने आया कि जब पुलिस मामले की जांच के लिए प्री-प्राइमरी शाखा पहुंची, तो वहां लगे 64 सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह खराब पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल ने जानबूझकर इन कैमरों के रखरखाव के लिए कोई अनुबंध नहीं किया था। इसके अलावा, स्कूल में चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी, चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी और पॉक्सो प्रशिक्षित नोडल अधिकारी भी नहीं थे। सुरक्षा कर्मचारियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया गया था।

अवैध शाखाएं और वित्तीय अनियमितताएं

जांच रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल नरंग कॉलोनी स्थित एक निजी आवासीय इमारत से बिना किसी अनुमति के नर्सरी और केजी की कक्षाएं अवैध रूप से संचालित कर रहा था। इस अवैध इमारत के बेसमेंट का उपयोग छोटे बच्चों के लिए बिना निगरानी वाले गतिविधि क्षेत्र के रूप में किया जा रहा था। यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत गंभीर मानी जा रही है।

सरकार की प्रतिक्रिया

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शिक्षा निदेशालय को स्कूल संचालक ट्रस्ट और उसके नेतृत्व के विरुद्ध सबसे कड़ी संभव कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, "एक स्कूल 'लॉको पैरेंटिस' (माता-पिता की भूमिका में) होता है। स्कूल परिसर में मौजूद हर बच्चे के लिए उसकी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी होती है। अगर कोई संस्था बाल शोषण जैसे गंभीर अपराध को छिपाती है, आवासीय इमारतों के बेसमेंट में अवैध शाखाएं चलाती है और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करती है, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।" सूद ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार स्कूल का प्रबंधन पूरी तरह अपने हाथ में लेने और उसकी जमीन की लीज रद्द करने की सिफारिश करने के लिए भी तैयार है।

आगे क्या होगा

स्कूल प्रबंधन को नोटिस का जवाब देने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो प्रस्तावित कड़ी कार्रवाई तुरंत शुरू की जाएगी। यह मामला राजधानी में निजी स्कूलों की जवाबदेही और बाल सुरक्षा मानकों पर नए सिरे से बहस छेड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पॉक्सो नोडल अधिकारी का अभाव और यौन उत्पीड़न की घटना को छिपाना — ये अलग-थलग चूकें नहीं, बल्कि व्यवस्थागत उदासीनता की एक श्रृंखला है। सवाल यह भी है कि आवासीय इमारत के बेसमेंट में वर्षों से चल रही अवैध शाखा नियामकों की नज़र से कैसे बचती रही। कारण बताओ नोटिस एक शुरुआत है, लेकिन असली जवाबदेही तब होगी जब शिक्षा निदेशालय यह स्पष्ट करे कि नियमित निरीक्षण में यह सब क्यों नहीं पकड़ा गया।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनकपुरी स्कूल को कारण बताओ नोटिस क्यों जारी किया गया?
दिल्ली सरकार ने यौन उत्पीड़न की घटना छिपाने, 64 खराब CCTV कैमरों, बिना अनुमति अवैध शाखाएं चलाने और वित्तीय अनियमितताओं के कारण यह नोटिस जारी किया है। शिक्षा निदेशालय की विशेष समितियों की जांच में ये सभी खामियां सामने आई हैं।
स्कूल में यौन उत्पीड़न की घटना कब और कैसे हुई?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, 30 अप्रैल को स्कूल के प्री-प्राइमरी विंग में नर्सरी कक्षा की एक बच्ची के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न हुआ था। स्कूल प्रबंधन ने इस घटना की जानकारी शिक्षा निदेशालय को नहीं दी, जो अनिवार्य बाल सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन है।
स्कूल के खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है?
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट किया है कि सरकार स्कूल का प्रबंधन पूरी तरह अपने हाथ में लेने और उसकी जमीन की लीज रद्द करने की सिफारिश करने के लिए तैयार है। स्कूल को 7 दिन में जवाब देना होगा, अन्यथा कड़ी कार्रवाई तुरंत शुरू होगी।
स्कूल की अवैध शाखाएं कहां चल रही थीं?
जांच के अनुसार, स्कूल नरंग कॉलोनी स्थित एक निजी आवासीय इमारत से बिना किसी अनुमति के नर्सरी और केजी की कक्षाएं चला रहा था। उस इमारत के बेसमेंट का उपयोग छोटे बच्चों के लिए बिना निगरानी वाले गतिविधि क्षेत्र के रूप में किया जा रहा था।
स्कूल में बाल सुरक्षा के कौन-कौन से मानक नहीं थे?
जांच में पाया गया कि स्कूल में चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी, चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी और पॉक्सो प्रशिक्षित नोडल अधिकारी — तीनों अनुपस्थित थे। इसके अलावा सुरक्षा कर्मचारियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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