जनकपुरी स्कूल को दिल्ली सरकार का कारण बताओ नोटिस: यौन उत्पीड़न छिपाने, अवैध शाखाओं और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार ने जनकपुरी स्थित एक निजी स्कूल के प्रबंधन को 19 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस गंभीर सुरक्षा उल्लंघनों, बिना अनुमति शाखाएं चलाने और बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर जारी किया गया है। स्कूल प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
शिक्षा निदेशालय की विशेष समितियों ने कई चरणों में की गई आधिकारिक जांच में स्कूल के प्रशासनिक, वित्तीय और नैतिक संचालन में गंभीर खामियां उजागर की हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, 30 अप्रैल को स्कूल के प्री-प्राइमरी विंग में नर्सरी कक्षा की एक बच्ची के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न की घटना हुई थी। स्कूल प्रबंधन ने इस घटना की जानकारी शिक्षा निदेशालय को नहीं दी, जो अनिवार्य बाल सुरक्षा कानूनों का सीधा उल्लंघन है।
सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां
जांच में सामने आया कि जब पुलिस मामले की जांच के लिए प्री-प्राइमरी शाखा पहुंची, तो वहां लगे 64 सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह खराब पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल ने जानबूझकर इन कैमरों के रखरखाव के लिए कोई अनुबंध नहीं किया था। इसके अलावा, स्कूल में चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी, चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी और पॉक्सो प्रशिक्षित नोडल अधिकारी भी नहीं थे। सुरक्षा कर्मचारियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया गया था।
अवैध शाखाएं और वित्तीय अनियमितताएं
जांच रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल नरंग कॉलोनी स्थित एक निजी आवासीय इमारत से बिना किसी अनुमति के नर्सरी और केजी की कक्षाएं अवैध रूप से संचालित कर रहा था। इस अवैध इमारत के बेसमेंट का उपयोग छोटे बच्चों के लिए बिना निगरानी वाले गतिविधि क्षेत्र के रूप में किया जा रहा था। यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत गंभीर मानी जा रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शिक्षा निदेशालय को स्कूल संचालक ट्रस्ट और उसके नेतृत्व के विरुद्ध सबसे कड़ी संभव कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, "एक स्कूल 'लॉको पैरेंटिस' (माता-पिता की भूमिका में) होता है। स्कूल परिसर में मौजूद हर बच्चे के लिए उसकी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी होती है। अगर कोई संस्था बाल शोषण जैसे गंभीर अपराध को छिपाती है, आवासीय इमारतों के बेसमेंट में अवैध शाखाएं चलाती है और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करती है, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।" सूद ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार स्कूल का प्रबंधन पूरी तरह अपने हाथ में लेने और उसकी जमीन की लीज रद्द करने की सिफारिश करने के लिए भी तैयार है।
आगे क्या होगा
स्कूल प्रबंधन को नोटिस का जवाब देने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो प्रस्तावित कड़ी कार्रवाई तुरंत शुरू की जाएगी। यह मामला राजधानी में निजी स्कूलों की जवाबदेही और बाल सुरक्षा मानकों पर नए सिरे से बहस छेड़ सकता है।