4 सितंबर 2026
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GSLV-F17/EOS-05 का सफल प्रक्षेपण: इसरो की ऐतिहासिक उपलब्धि पर मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने दी बधाई

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GSLV-F17/EOS-05 का सफल प्रक्षेपण: इसरो की ऐतिहासिक उपलब्धि पर मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने दी बधाई

सारांश

जीएसएलवी-एफ17 ने ईओएस-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित कर इतिहास रच दिया — यह भारत का इस कक्षा से संचालित पहला इमेजिंग उपग्रह है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे तक, पूरे राजनीतिक स्पेक्ट्रम ने इसरो की टीम को बधाई दी।

मुख्य बातें

इसरो ने 4 सितंबर 2026 को श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन का सफल प्रक्षेपण किया।
ईओएस-05 जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से संचालित भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह है।
उपग्रह विज़िबल, इन्फ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में उन्नत इमेजिंग करने में सक्षम है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , हरदीप सिंह पुरी , पीयूष गोयल , प्रह्लाद जोशी और स्मृति ईरानी सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने इसरो को बधाई दी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मिशन की सफलता पर इसरो की सराहना की।
यूपी, एमपी, दिल्ली और बिहार के मुख्यमंत्रियों ने इसे 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 4 सितंबर 2026 को जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन का सफल प्रक्षेपण कर एक नया इतिहास रचा। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने वाला ईओएस-05 जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से संचालित होने वाला भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह है। इस उपलब्धि पर केंद्रीय मंत्रियों से लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक ने इसरो की टीम को बधाई दी और इसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का एक निर्णायक पड़ाव बताया।

मिशन की विशेषताएँ

ईओएस-05 विज़िबल, इन्फ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में उन्नत इमेजिंग की क्षमता से लैस है। यह उपग्रह पृथ्वी-निरीक्षण, आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान और प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी में भारत की क्षमताओं को नई ऊँचाई देगा। गौरतलब है कि जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग उपग्रह संचालित करने की क्षमता अब तक केवल चुनिंदा अंतरिक्ष शक्तियों के पास थी — भारत इस विशिष्ट क्लब में शामिल हो गया है।

केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा कि यह सफल प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक और अहम कदम है और इसरो व भारतीय उद्योग के बीच बढ़ती साझेदारी इनोवेशन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह उपलब्धि अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक में विश्व-स्तरीय क्षमताएँ विकसित करने की दिशा में भारत की लगातार प्रगति को दर्शाती है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई देते हुए इसे भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को और मज़बूत करने वाली शानदार उपलब्धि बताया।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह कामयाबी हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की प्रतिभा, सूझ-बूझ और लगातार बढ़ती क्षमताओं का सबूत है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि बेहतर अर्थ ऑब्ज़र्वेशन से आपदा के समय प्रतिक्रिया, संसाधनों और पर्यावरण का प्रबंधन, मौसम से जुड़ी प्लानिंग और देश की स्थिति की जानकारी बेहतर हो सकती है, साथ ही बाहरी क्षमताओं पर निर्भरता भी कम हो सकती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह उद्योग और निवेशकों के लिए एक मज़बूत संकेत है।

विपक्ष और मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इसरो की पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से वैज्ञानिक सोच और स्पेस रिसर्च के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने स्मरण कराया कि आधुनिक भारत के निर्माताओं ने दूरदर्शिता के साथ देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी थी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी एक्स पर इसरो की टीम को बधाई दी। सभी ने इस सफलता को 'आत्मनिर्भर भारत' और वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में देश की बढ़ती पहचान से जोड़ा।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारत चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 की सफलताओं के बाद वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में अपनी साख मज़बूत कर रहा है। ईओएस-05 की तैनाती से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को बल मिलेगा, क्योंकि अब देश को पृथ्वी-निरीक्षण के लिए विदेशी उपग्रह सेवाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसरो और भारतीय निजी उद्योग के बीच बढ़ता सहयोग इस मिशन की एक अहम विशेषता रही है।

आगे क्या

इसरो अब गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन और आगामी अंतरग्रहीय अभियानों की तैयारी में जुटा है। ईओएस-05 से मिलने वाला डेटा कृषि, वन प्रबंधन, शहरी नियोजन और रक्षा निगरानी में इस्तेमाल किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिशन भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश आकर्षित करने में भी सहायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि राजनीतिक बधाइयों की बाढ़ में मिशन की वास्तविक परिचालन क्षमता और डेटा-उपयोग की रूपरेखा पर चर्चा गौण हो जाती है। भारत के पास अब जियोसिंक्रोनस इमेजिंग क्षमता है — असली परीक्षा यह है कि इस डेटा का उपयोग कृषि, आपदा प्रबंधन और रक्षा में कितनी तेज़ी से और पारदर्शी ढंग से होता है। इसरो-उद्योग साझेदारी की प्रशंसा तो हो रही है, पर निजी क्षेत्र की भागीदारी के ठोस आँकड़े और राजस्व मॉडल अभी सार्वजनिक नहीं हैं। वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए 'पहला' होना काफ़ी नहीं — 'सबसे बेहतर' और 'सबसे सुलभ' होना भी उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन क्या है?
यह इसरो का एक पृथ्वी-निरीक्षण मिशन है जिसे 4 सितंबर 2026 को श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। ईओएस-05 जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से संचालित होने वाला भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह है, जो विज़िबल, इन्फ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में उन्नत इमेजिंग करने में सक्षम है।
ईओएस-05 भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
ईओएस-05 भारत को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की निरंतर निगरानी की क्षमता देता है, जो अब तक केवल चुनिंदा देशों के पास थी। इससे आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान, कृषि निगरानी और रणनीतिक स्वायत्तता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
इस मिशन पर किन नेताओं ने प्रतिक्रिया दी?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, हरदीप सिंह पुरी, पीयूष गोयल, प्रह्लाद जोशी, स्मृति ईरानी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई नेताओं ने इसरो को बधाई दी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और बिहार के मुख्यमंत्रियों ने भी एक्स पर अपनी प्रतिक्रियाएँ साझा कीं।
ईओएस-05 से किन क्षेत्रों को फायदा होगा?
ईओएस-05 का डेटा कृषि, वन प्रबंधन, शहरी नियोजन, आपदा प्रतिक्रिया, मौसम पूर्वानुमान और रक्षा निगरानी में उपयोग किया जाएगा। इससे विदेशी उपग्रह सेवाओं पर भारत की निर्भरता भी कम होगी।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में यह मिशन कहाँ खड़ा है?
चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 की सफलताओं के बाद यह मिशन भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं में एक और महत्वपूर्ण कड़ी है। जियोसिंक्रोनस इमेजिंग उपग्रह की तैनाती से भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास यह उन्नत क्षमता है।
राष्ट्र प्रेस
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