4 सितंबर 2026
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GSLV-F17 ने EOS-05 को जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया, PM मोदी बोले — 'इसरो की शानदार उपलब्धि'

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GSLV-F17 ने EOS-05 को जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया, PM मोदी बोले — 'इसरो की शानदार उपलब्धि'

सारांश

जीएसएलवी-एफ17 ने ईओएस-05 को जियोसिंक्रोनस कक्षा में सटीक रूप से स्थापित कर इसरो का 107वाँ श्रीहरिकोटा लॉन्च सफल बनाया। 2,367 किग्रा का यह पेलोड जीएसएलवी का अब तक का सबसे भारी है — और PM मोदी ने इसे देश के लिए 'गर्व का पल' करार दिया।

मुख्य बातें

जीएसएलवी-एफ17 ने 4 सितंबर 2026 को ईओएस-05 को जियोसिंक्रोनस कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया।
यह श्रीहरिकोटा से 107वाँ लॉन्च और जीएसएलवी का 19वाँ मिशन है।
2,367 किलोग्राम वज़नी ईओएस-05 जीएसएलवी द्वारा कक्षा में भेजा गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है।
PM नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर इसे 'इसरो की शानदार उपलब्धि और देश के लिए गर्व का पल' बताया।
नारायणन ने उपग्रह संचालन के लिए निजी भागीदारी के विकल्प पर चर्चा की।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 4 सितंबर 2026 को एक और ऐतिहासिक सफलता दर्ज की, जब जीएसएलवी-एफ17 ने ईओएस-05 (जियो इमेजिंग सैटेलाइट) को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित कर दिया। श्रीहरिकोटा से संपन्न यह 107वाँ लॉन्च और जीएसएलवी श्रृंखला का 19वाँ मिशन है, जो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बढ़ती तकनीकी परिपक्वता को रेखांकित करता है।

मिशन की मुख्य उपलब्धियाँ

इसरो के अनुसार, जीएसएलवी-एफ17 ने 2,367 किलोग्राम वज़नी ईओएस-05 को सटीक रूप से कक्षा में प्रविष्ट कराया — जो इस लॉन्च व्हीकल द्वारा अब तक कक्षा में स्थापित किया गया सबसे भारी उपग्रह है। तुलना के लिए, जीएसएलवी के पहले मिशन जीएसएलवी-डी1 में केवल 1,536 किलोग्राम का पेलोड ले जाया गया था। इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि पिछले वर्षों में वाहन के संरचनात्मक भार को अनुकूलित करने और प्रणोदन प्रणाली में सुधार के जरिये यह क्षमता-वृद्धि संभव हुई है।

PM मोदी और इसरो की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस उपलब्धि को देश के लिए 'गर्व का पल' बताया। उन्होंने लिखा: 'इसरो की एक और शानदार उपलब्धि और हमारे देश के लिए गर्व का पल। भारत के पहले इमेजिंग सैटेलाइट ईओएस-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में ले जाने वाले जीएसएलवी-एफ17 का सफल लॉन्च, भारत के स्पेस सेक्टर की उत्कृष्टता, इनोवेशन और बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है।' मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि इसरो और भारतीय उद्योग के बीच बढ़ती साझेदारी पूरे अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को नई ताकत दे रही है।

इसरो प्रमुख का संबोधन

डॉ. वी. नारायणन ने सफल लॉन्च के बाद वैज्ञानिकों और देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा, 'मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि जीएसएलवी-एफ17 व्हीकल ने एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ईओएस-05 को सफलतापूर्वक और सटीक रूप से उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया है।' उन्होंने जीएसएलवी की दशकों की विकास-यात्रा को भी रेखांकित किया, जो तकनीकी अनुकूलन के बल पर लगातार भारी पेलोड ले जाने में सक्षम होती जा रही है।

संचालन और निजी भागीदारी पर चर्चा

इसरो प्रमुख ने भविष्य की संचालन रणनीति पर भी बात की। उनके अनुसार लॉन्च पैड और बुनियादी ढाँचा पूरी तरह भारत सरकार द्वारा निर्मित किया जाएगा, किंतु संचालन के लिए दो विकल्पों पर विचार हो रहा है — स्थायी सरकारी कर्मचारियों के माध्यम से संचालन, अथवा निजी खिलाड़ियों को परिचालन की जिम्मेदारी सौंपना। यह चर्चा भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारी-निजी साझेदारी के व्यापक प्रश्न को सामने लाती है।

आगे की राह

गौरतलब है कि ईओएस-05 भारत का पहला समर्पित जियो इमेजिंग उपग्रह है, जो पृथ्वी की सतह की उच्च-रिज़ॉल्यूशन निगरानी में सक्षम होगा। यह मिशन इसरो की व्यावसायिक और रणनीतिक दोनों क्षमताओं को मजबूत करता है। आने वाले महीनों में उपग्रह के परिचालन और डेटा-उपयोग की नीति पर और स्पष्टता अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

536 किग्रा पेलोड से आज 2,367 किग्रा तक पहुँची है। असली सवाल अब संचालन मॉडल का है: डॉ. नारायणन ने निजी भागीदारी का जो विकल्प उठाया है, वह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के भविष्य की दिशा तय करेगा। यदि निजी परिचालन पारदर्शी नियामक ढाँचे के बिना आगे बढ़ा, तो सार्वजनिक निवेश से बने बुनियादी ढाँचे का लाभ कुछ कंपनियों तक सिमट सकता है — यह वह सवाल है जिसका जवाब नीति-निर्माताओं को जल्द देना होगा।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईओएस-05 उपग्रह क्या है और इसका क्या उद्देश्य है?
ईओएस-05 भारत का पहला समर्पित जियो इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया गया है। यह पृथ्वी की सतह की उच्च-रिज़ॉल्यूशन निगरानी में सक्षम होगा और भारत की अर्थ ऑब्जर्वेशन क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा।
जीएसएलवी-एफ17 मिशन कब और कहाँ से लॉन्च हुआ?
जीएसएलवी-एफ17 का सफल लॉन्च 4 सितंबर 2026 को श्रीहरिकोटा से हुआ। यह श्रीहरिकोटा से इसरो का 107वाँ लॉन्च और जीएसएलवी श्रृंखला का 19वाँ मिशन है।
PM मोदी ने इसरो की इस सफलता पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर इसे 'इसरो की शानदार उपलब्धि और देश के लिए गर्व का पल' बताया। उन्होंने इसरो और भारतीय उद्योग के बीच बढ़ती साझेदारी को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बढ़ती ताकत का प्रतीक बताया।
जीएसएलवी-एफ17 की क्षमता पहले मिशन की तुलना में कितनी बढ़ी है?
जीएसएलवी के पहले मिशन जीएसएलवी-डी1 में 1,536 किलोग्राम का पेलोड ले जाया गया था, जबकि जीएसएलवी-एफ17 ने 2,367 किलोग्राम वज़नी ईओएस-05 को कक्षा में स्थापित किया। इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन के अनुसार यह वृद्धि संरचनात्मक अनुकूलन और प्रणोदन प्रणाली में सुधार के जरिये संभव हुई।
ईओएस-05 के संचालन को लेकर इसरो की क्या योजना है?
इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि लॉन्च पैड और बुनियादी ढाँचा भारत सरकार द्वारा निर्मित होगा, लेकिन परिचालन के लिए सरकारी कर्मचारियों अथवा निजी खिलाड़ियों — दोनों विकल्पों पर विचार हो रहा है। अंतिम निर्णय अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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