GSLV-F17 ने EOS-05 को जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया, PM मोदी बोले — 'इसरो की शानदार उपलब्धि'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 4 सितंबर 2026 को एक और ऐतिहासिक सफलता दर्ज की, जब जीएसएलवी-एफ17 ने ईओएस-05 (जियो इमेजिंग सैटेलाइट) को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित कर दिया। श्रीहरिकोटा से संपन्न यह 107वाँ लॉन्च और जीएसएलवी श्रृंखला का 19वाँ मिशन है, जो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बढ़ती तकनीकी परिपक्वता को रेखांकित करता है।
मिशन की मुख्य उपलब्धियाँ
इसरो के अनुसार, जीएसएलवी-एफ17 ने 2,367 किलोग्राम वज़नी ईओएस-05 को सटीक रूप से कक्षा में प्रविष्ट कराया — जो इस लॉन्च व्हीकल द्वारा अब तक कक्षा में स्थापित किया गया सबसे भारी उपग्रह है। तुलना के लिए, जीएसएलवी के पहले मिशन जीएसएलवी-डी1 में केवल 1,536 किलोग्राम का पेलोड ले जाया गया था। इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि पिछले वर्षों में वाहन के संरचनात्मक भार को अनुकूलित करने और प्रणोदन प्रणाली में सुधार के जरिये यह क्षमता-वृद्धि संभव हुई है।
PM मोदी और इसरो की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस उपलब्धि को देश के लिए 'गर्व का पल' बताया। उन्होंने लिखा: 'इसरो की एक और शानदार उपलब्धि और हमारे देश के लिए गर्व का पल। भारत के पहले इमेजिंग सैटेलाइट ईओएस-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में ले जाने वाले जीएसएलवी-एफ17 का सफल लॉन्च, भारत के स्पेस सेक्टर की उत्कृष्टता, इनोवेशन और बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है।' मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि इसरो और भारतीय उद्योग के बीच बढ़ती साझेदारी पूरे अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को नई ताकत दे रही है।
इसरो प्रमुख का संबोधन
डॉ. वी. नारायणन ने सफल लॉन्च के बाद वैज्ञानिकों और देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा, 'मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि जीएसएलवी-एफ17 व्हीकल ने एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ईओएस-05 को सफलतापूर्वक और सटीक रूप से उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया है।' उन्होंने जीएसएलवी की दशकों की विकास-यात्रा को भी रेखांकित किया, जो तकनीकी अनुकूलन के बल पर लगातार भारी पेलोड ले जाने में सक्षम होती जा रही है।
संचालन और निजी भागीदारी पर चर्चा
इसरो प्रमुख ने भविष्य की संचालन रणनीति पर भी बात की। उनके अनुसार लॉन्च पैड और बुनियादी ढाँचा पूरी तरह भारत सरकार द्वारा निर्मित किया जाएगा, किंतु संचालन के लिए दो विकल्पों पर विचार हो रहा है — स्थायी सरकारी कर्मचारियों के माध्यम से संचालन, अथवा निजी खिलाड़ियों को परिचालन की जिम्मेदारी सौंपना। यह चर्चा भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारी-निजी साझेदारी के व्यापक प्रश्न को सामने लाती है।
आगे की राह
गौरतलब है कि ईओएस-05 भारत का पहला समर्पित जियो इमेजिंग उपग्रह है, जो पृथ्वी की सतह की उच्च-रिज़ॉल्यूशन निगरानी में सक्षम होगा। यह मिशन इसरो की व्यावसायिक और रणनीतिक दोनों क्षमताओं को मजबूत करता है। आने वाले महीनों में उपग्रह के परिचालन और डेटा-उपयोग की नीति पर और स्पष्टता अपेक्षित है।