बाघेई का दावा: ईरान के हमले सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर, कतर के ITU दस्तावेज का हवाला
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 4 सितंबर को कतर सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) को सौंपे गए एक आधिकारिक दस्तावेज का हवाला देते हुए कतर की धरती पर ईरान द्वारा किए गए हमलों का बचाव किया। बाघेई के अनुसार, उस दस्तावेज में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि ईरान के जवाबी हमले विशेष रूप से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लक्षित थे और किसी भी नागरिक क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया गया।
दस्तावेज में क्या कहा गया
बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि कतर सरकार ने ITU को सौंपे गए अपने आधिकारिक दस्तावेज में यह स्वीकार किया है कि ईरान के हमले 'अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे' और 'किसी भी नागरिक क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया गया था।' यह दावा ईरान के उस आधिकारिक रुख को पुष्ट करता है जिसमें वह अपनी कार्रवाई को जवाबी और लक्षित बताता रहा है।
गैस फैसिलिटी हमले पर ईरान का पक्ष
बाघेई ने स्वीकार किया कि कतर की ओर से लगाया गया एकमात्र आरोप 18 मार्च को एक गैस फैसिलिटी पर हुए हमले को लेकर था। हालांकि, ईरान का तर्क है कि उस दिन जिन प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, वे ईरान के विरुद्ध अमेरिकी सैन्य अभियानों में सक्रिय रूप से इस्तेमाल हो रहे थे। बाघेई ने इसे ईरान की 'रक्षात्मक और नैतिक' कार्रवाई करार दिया।
अमेरिका पर पलटवार
बाघेई के बयान में अमेरिका के 'लंबे रिकॉर्ड' का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कथित तौर पर स्कूलों, अस्पतालों, रिहायशी इलाकों, शादी समारोहों, पुलों और अन्य नागरिक ठिकानों पर जानबूझकर हमले करने के आरोप शामिल हैं। बाघेई ने कहा कि एक सभ्य देश — जिसने कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक और मानवीय सिद्धांतों का पालन किया हो — और उन शासकों के बीच 'बहुत बड़ा अंतर' होता है जो शक्ति-प्रदर्शन के लिए कानून और नैतिकता की परवाह नहीं करते।
संयुक्त राष्ट्र की अपील
संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका और ईरान दोनों से कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, 'यह चल रहे संघर्ष के छह महीने पूरे होने का एक दुखद पड़ाव है। हम फिर से जोर देते हैं कि इसका एकमात्र समाधान कूटनीतिक समाधान है।' महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों पक्षों से 'सार्थक बातचीत' करने की अपील की है।
आगे क्या
युद्ध के छह महीने बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ठप है। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता की कोशिशें जारी हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास को देखते हुए कूटनीतिक सफलता की राह अभी लंबी दिखती है।