जेडी वेंस की चेतावनी: जब तक ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले नहीं रोकता, बातचीत असंभव
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 4 सितंबर 2026 को व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि ईरान द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर हमले जारी रहने तक अमेरिका उसके साथ किसी भी स्तर पर बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वॉशिंगटन ईरान पर आर्थिक, सैन्य, कूटनीतिक और गुप्त दबाव के सभी उपाय इस्तेमाल करने को तैयार है।
वेंस का स्पष्ट संदेश
वेंस ने ब्रीफिंग में कहा, 'राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि हम उनसे बात नहीं कर रहे हैं और तब तक बात नहीं करेंगे, जब तक वे वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी बंद नहीं करते।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी अभियानों की कोई तय समयसीमा नहीं होगी, क्योंकि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का व्यवहार कैसा रहता है।
उपराष्ट्रपति ने इस स्थिति को 'जारी युद्ध' बताने वाली धारणाओं को खारिज किया और कहा कि बड़े पैमाने की सैन्य कार्रवाई अब नहीं हो रही। उनके अनुसार, फिलहाल अमेरिका का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट के जरिए ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है।
होर्मुज स्ट्रेट और ऊर्जा सुरक्षा
वेंस ने दावा किया कि ईरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से एक भी बैरल तेल बाहर न जाए, लेकिन अमेरिकी सुरक्षा अभियान की बदौलत एक रात में 1.5 करोड़ बैरल तेल वहाँ से निकला। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऊर्जा संकट न आने का एक बड़ा कारण यही है कि अमेरिका वाणिज्यिक जहाजों की रक्षा कर रहा है, और उनके अनुसार, फिलहाल कोई अन्य देश यह भूमिका निभाने में सक्षम नहीं है।
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20% समुद्री तेल व्यापार गुजरता है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है।
दबाव के सभी विकल्प खुले
वेंस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान पर दबाव बनाने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं — 'आर्थिक दबाव, सैन्य दबाव, कूटनीतिक दबाव और गुप्त दबाव, सभी विकल्प मेज पर हैं।' उन्होंने यह बताने से इनकार किया कि क्या अमेरिकी प्रशासन ईरानी असंतुष्ट समूहों को हथियार देने पर विचार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि तुर्किये, अजरबैजान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर ईरान पर दबाव बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। कुछ देश सार्वजनिक रूप से इसका उल्लेख नहीं कर रहे, लेकिन निजी तौर पर अमेरिका के साथ हैं।
चीन की भूमिका पर वेंस का बयान
वेंस ने कहा कि चीन ने ईरान से जुड़े कुछ अमेरिकी अनुरोधों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनके शब्दों में, 'मेरा मानना है कि चीन (पीआरसी) इस मामले में सहयोग करने को तैयार है। मैं यह नहीं कह रहा कि उन्होंने हमारी हर मांग मान ली है, लेकिन उन्होंने ईरान की तुलना में कहीं अधिक जिम्मेदाराना रवैया दिखाया है।' हालांकि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को मिलने वाली वित्तीय सेवाओं पर रोक लगाने के मुद्दे पर सीधे चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग से बात की है।
परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की रणनीति
वेंस के अनुसार, अमेरिका के दबाव अभियान के दो मुख्य उद्देश्य हैं — पहला, वाणिज्यिक जहाजरानी की सुरक्षा, और दूसरा, ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को फिर से खड़ा करने के लिए आवश्यक संसाधन हासिल करने से रोकना। उन्होंने कहा, 'अब तक हमने उन्हें ऐसा करने की कोशिश करते नहीं देखा है, लेकिन उनकी यूरेनियम संवर्धन क्षमता को नष्ट करने के बाद हमारा एक उद्देश्य यह भी है कि वे उसे दोबारा खड़ा न कर सकें।' यह ऐसे समय में आया है जब ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएँ वैश्विक कूटनीति में सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक बनी हुई हैं।