4 सितंबर 2026
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जेडी वेंस की चेतावनी: जब तक ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले नहीं रोकता, बातचीत असंभव

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जेडी वेंस की चेतावनी: जब तक ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले नहीं रोकता, बातचीत असंभव

सारांश

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ बातचीत पर कड़ी शर्त रखी — पहले वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद हों। होर्मुज स्ट्रेट से एक रात में 1.5 करोड़ बैरल तेल निकालकर अमेरिका ने दुनिया को ऊर्जा संकट से बचाने का दावा किया, और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को दोबारा खड़ा होने से रोकने की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 4 सितंबर 2026 को व्हाइट हाउस प्रेस ब्रीफिंग में कहा — ईरान जब तक वाणिज्यिक जहाजों पर हमले नहीं रोकता, बातचीत संभव नहीं।
अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के दम पर एक रात में 1.5 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही सुनिश्चित की।
वेंस ने कहा — आर्थिक, सैन्य, कूटनीतिक और गुप्त दबाव सहित सभी विकल्प मेज पर हैं।
तुर्किये, UAE, सऊदी अरब, अजरबैजान और कतर निजी तौर पर अमेरिका का साथ दे रहे हैं।
चीन ने कुछ अमेरिकी अनुरोधों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, हालांकि सभी माँगें नहीं मानी गई हैं।
अमेरिका का दूसरा लक्ष्य — ईरान की नष्ट की गई यूरेनियम संवर्धन क्षमता को दोबारा खड़ा होने से रोकना।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 4 सितंबर 2026 को व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि ईरान द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर हमले जारी रहने तक अमेरिका उसके साथ किसी भी स्तर पर बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वॉशिंगटन ईरान पर आर्थिक, सैन्य, कूटनीतिक और गुप्त दबाव के सभी उपाय इस्तेमाल करने को तैयार है।

वेंस का स्पष्ट संदेश

वेंस ने ब्रीफिंग में कहा, 'राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि हम उनसे बात नहीं कर रहे हैं और तब तक बात नहीं करेंगे, जब तक वे वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी बंद नहीं करते।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी अभियानों की कोई तय समयसीमा नहीं होगी, क्योंकि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का व्यवहार कैसा रहता है।

उपराष्ट्रपति ने इस स्थिति को 'जारी युद्ध' बताने वाली धारणाओं को खारिज किया और कहा कि बड़े पैमाने की सैन्य कार्रवाई अब नहीं हो रही। उनके अनुसार, फिलहाल अमेरिका का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट के जरिए ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है।

होर्मुज स्ट्रेट और ऊर्जा सुरक्षा

वेंस ने दावा किया कि ईरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से एक भी बैरल तेल बाहर न जाए, लेकिन अमेरिकी सुरक्षा अभियान की बदौलत एक रात में 1.5 करोड़ बैरल तेल वहाँ से निकला। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऊर्जा संकट न आने का एक बड़ा कारण यही है कि अमेरिका वाणिज्यिक जहाजों की रक्षा कर रहा है, और उनके अनुसार, फिलहाल कोई अन्य देश यह भूमिका निभाने में सक्षम नहीं है।

गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20% समुद्री तेल व्यापार गुजरता है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है।

दबाव के सभी विकल्प खुले

वेंस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान पर दबाव बनाने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं — 'आर्थिक दबाव, सैन्य दबाव, कूटनीतिक दबाव और गुप्त दबाव, सभी विकल्प मेज पर हैं।' उन्होंने यह बताने से इनकार किया कि क्या अमेरिकी प्रशासन ईरानी असंतुष्ट समूहों को हथियार देने पर विचार कर रहा है।

उन्होंने बताया कि तुर्किये, अजरबैजान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर ईरान पर दबाव बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। कुछ देश सार्वजनिक रूप से इसका उल्लेख नहीं कर रहे, लेकिन निजी तौर पर अमेरिका के साथ हैं।

चीन की भूमिका पर वेंस का बयान

वेंस ने कहा कि चीन ने ईरान से जुड़े कुछ अमेरिकी अनुरोधों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनके शब्दों में, 'मेरा मानना है कि चीन (पीआरसी) इस मामले में सहयोग करने को तैयार है। मैं यह नहीं कह रहा कि उन्होंने हमारी हर मांग मान ली है, लेकिन उन्होंने ईरान की तुलना में कहीं अधिक जिम्मेदाराना रवैया दिखाया है।' हालांकि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को मिलने वाली वित्तीय सेवाओं पर रोक लगाने के मुद्दे पर सीधे चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग से बात की है।

परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की रणनीति

वेंस के अनुसार, अमेरिका के दबाव अभियान के दो मुख्य उद्देश्य हैं — पहला, वाणिज्यिक जहाजरानी की सुरक्षा, और दूसरा, ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को फिर से खड़ा करने के लिए आवश्यक संसाधन हासिल करने से रोकना। उन्होंने कहा, 'अब तक हमने उन्हें ऐसा करने की कोशिश करते नहीं देखा है, लेकिन उनकी यूरेनियम संवर्धन क्षमता को नष्ट करने के बाद हमारा एक उद्देश्य यह भी है कि वे उसे दोबारा खड़ा न कर सकें।' यह ऐसे समय में आया है जब ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएँ वैश्विक कूटनीति में सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक बनी हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ईरान को स्थायी रूप से परमाणु पुनर्निर्माण से रोकना बिना किसी सत्यापन-योग्य समझौते के लगभग असंभव है। चीन की 'जिम्मेदाराना' भागीदारी की तारीफ और उसकी वास्तविक भूमिका के बीच का फर्क अभी स्पष्ट नहीं है। आलोचकों का कहना है कि बिना बातचीत के केवल दबाव की नीति ईरान को और अधिक आक्रामक बना सकती है, जैसा 2018-2019 में 'अधिकतम दबाव' अभियान के दौरान देखा गया था।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेडी वेंस ने ईरान के साथ बातचीत पर क्या शर्त रखी है?
वेंस ने कहा है कि जब तक ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद नहीं करता, अमेरिका उससे किसी भी स्तर पर बातचीत नहीं करेगा। यह शर्त राष्ट्रपति ट्रंप की नीति का हिस्सा बताई गई है।
होर्मुज स्ट्रेट में ईरान और अमेरिका के बीच विवाद क्यों है?
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस आयात करता है। वेंस के अनुसार, ईरान इस जलमार्ग से तेल की आवाजाही रोकना चाहता है, जबकि अमेरिका वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा कर रहा है और एक रात में 1.5 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही सुनिश्चित की गई।
अमेरिका ईरान पर किस तरह का दबाव बना रहा है?
वेंस ने कहा कि आर्थिक, सैन्य, कूटनीतिक और गुप्त दबाव — सभी विकल्प मेज पर हैं। इसके अलावा तुर्किये, UAE, सऊदी अरब, अजरबैजान और कतर भी निजी तौर पर इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की क्या रणनीति है?
वेंस के अनुसार, अमेरिका का एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान अपनी नष्ट की गई यूरेनियम संवर्धन क्षमता को दोबारा खड़ा न कर सके। इसके लिए ईरान को आवश्यक संसाधन हासिल करने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
इस मामले में चीन की क्या भूमिका है?
वेंस ने कहा कि चीन ने ईरान से जुड़े कुछ अमेरिकी अनुरोधों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और ईरान की तुलना में अधिक जिम्मेदाराना रवैया दिखाया है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस विषय पर सीधे शी चिनपिंग से बात की है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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