30 जुलाई 2026
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आईआरजीसी की कड़ी चेतावनी: ईरान पर हमलों में अमेरिका के साथी देशों को भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

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आईआरजीसी की कड़ी चेतावनी: ईरान पर हमलों में अमेरिका के साथी देशों को भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

सारांश

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव खतरनाक मोड़ पर है। आईआरजीसी ने अमेरिकी साथी देशों को सीधी चेतावनी दी, होर्मुज स्ट्रेट बंद रखने की कसम खाई और दो तेल टैंकरों पर हमले किए। सेंटकॉम ने जवाबी हमलों की पुष्टि की — वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल।

मुख्य बातें

आईआरजीसी ने 30 जुलाई को ईरान पर अमेरिकी हमलों में सहयोग करने वाले देशों को कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।
आईआरजीसी ने होर्मुज स्ट्रेट को ईरान का हिस्सा बताते हुए कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप बंद होने तक जलमार्ग नहीं खुलेगा।
होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में दो तेल टैंकरों पर हमले की घोषणा; एक में आग लगने के बाद दोनों जहाज लौटे।
सेंटकॉम ने पुष्टि की कि अमेरिकी हमले बुधवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) शुरू हुए — जॉर्डन में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले के 24 घंटे से कम बाद।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार होर्मोजगान और खुजेस्तान प्रांतों में धमाके सुने गए; तेल अवसंरचना के निकट हमलों की खबरें।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान पर 'बहुत जोरदार' जवाबी हमले का संकेत दिया था।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने 30 जुलाई को पश्चिम एशिया और उससे बाहर के उन सभी देशों को कड़ी चेतावनी जारी की, जो ईरान के विरुद्ध अमेरिकी सैन्य अभियानों में किसी भी रूप में सहयोग कर रहे हैं। आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी बयान में स्पष्ट कहा गया कि यदि इन देशों ने अपना रवैया नहीं बदला, तो उन्हें ईरान की जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

आईआरजीसी का बयान और होर्मुज स्ट्रेट पर दावा

आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट ईरान का अभिन्न हिस्सा है और पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में है। संगठन ने यह भी कसम खाई कि वह हजारों किलोमीटर दूर से आए किसी बाहरी ताकत को इस जलमार्ग में दखल नहीं देने देगा। आईआरजीसी के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक अमेरिकी अधिकारियों की धमकियाँ और समुद्री गतिविधियों में हस्तक्षेप बंद नहीं होता।

इसके साथ ही आईआरजीसी ने दो तेल टैंकरों पर हमले की घोषणा की, जो कथित तौर पर होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में एक असुरक्षित शिपिंग मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। ईरान की सरकारी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी के अनुसार, इनमें से एक टैंकर में आग लगने के बाद दोनों जहाज वापस लौट गए।

अमेरिकी सैन्य हमले और सेंटकॉम का बयान

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि ईरान के विरुद्ध अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन बुधवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) शुरू हुआ। सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा, 'अमेरिकी सेना ने आज रात 8 बजे ईरान के खिलाफ हमले शुरू किए। ये हमले मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिकी सेना पर ईरान की हमले की कोशिश का एक जोरदार जवाब हैं।'

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये हमले ईरान द्वारा जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल दागने के 24 घंटे से भी कम समय बाद किए गए। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने उस मिसाइल हमले को नाकाम कर दिया था।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही संकेत दिए थे कि ईरान की हमले की कोशिश के बाद अमेरिका बेहद कड़ा जवाब देगा। सेंटकॉम ने अभी तक ईरान के भीतर हमले की सटीक जगहों या उनके दायरे की पुष्टि नहीं की है।

ईरान में हमलों की खबरें

ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, होर्मोजगान और खुजेस्तान समेत कई दक्षिणी प्रांतों में धमाकों की आवाज सुनी गई। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि तेल अवसंरचना के निकट और फारस की खाड़ी के द्वीपों पर हमले हुए। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

होर्मुज स्ट्रेट का वैश्विक महत्व

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक है, जिसके रास्ते खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों से तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचती है। इस जलमार्ग पर किसी भी व्यवधान का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।

क्या होगा आगे

यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव अपने चरम पर है और दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक बातचीत भी चल रही थी। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट पर किसी भी बड़ी कार्रवाई का असर न केवल क्षेत्रीय देशों, बल्कि भारत सहित तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान दोनों की अगली कूटनीतिक या सैन्य चाल पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और भारत जैसे देश जो खाड़ी से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं, उनके लिए यह सीधा आर्थिक खतरा है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका ने हमलों की सटीक जगह और दायरे की जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की — जो संकेत देता है कि स्थिति अभी भी तेजी से बदल रही है। ईरान और अमेरिका के बीच हर बार बातचीत के बाद तनाव बढ़ने का यह चक्र यह सवाल उठाता है कि क्या दोनों पक्षों में से कोई वास्तव में कूटनीतिक निकास चाहता है, या यह टकराव और गहरा होगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआरजीसी ने किन देशों को चेतावनी दी है?
आईआरजीसी ने पश्चिम एशिया और उससे बाहर के उन सभी देशों को चेतावनी दी है जो ईरान के विरुद्ध अमेरिकी सैन्य अभियानों में किसी भी रूप में सहयोग कर रहे हैं। बयान में कहा गया कि यदि इन देशों ने अपना रवैया नहीं बदला तो उन्हें ईरान की कड़ी जवाबी कार्रवाई झेलनी होगी।
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का क्या रुख है?
आईआरजीसी ने होर्मुज स्ट्रेट को ईरान का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि यह पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में है। संगठन ने स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिकी अधिकारियों की धमकियाँ और समुद्री गतिविधियों में हस्तक्षेप बंद नहीं होता, तब तक यह जलमार्ग नहीं खोला जाएगा।
अमेरिका ने ईरान पर हमले क्यों किए?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, ये हमले ईरान द्वारा जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल दागने के 24 घंटे से कम समय बाद जवाबी कार्रवाई के रूप में किए गए। अमेरिकी एयर डिफेंस ने उस मिसाइल हमले को नाकाम कर दिया था।
ईरान में किन इलाकों पर हमले की खबरें हैं?
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार होर्मोजगान और खुजेस्तान समेत कई दक्षिणी प्रांतों में धमाकों की आवाज सुनी गई। तेल अवसंरचना के निकट और फारस की खाड़ी के द्वीपों पर हमलों की खबरें हैं, हालाँकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक है, जिसके रास्ते खाड़ी देशों से तेल और LNG अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचती है। भारत खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए इस जलमार्ग पर कोई भी व्यवधान भारत की ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों को सीधे प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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