स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव: आईआरजीसी की अमेरिका को चेतावनी, 'कड़े जवाब' का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने 27 मई 2026 को अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी कि यदि उस पर हमले जारी रहे तो 'कड़ा और जोरदार जवाब' दिया जाएगा। यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट्स और समुद्र में माइन बिछाने की कोशिश कर रही हथियारबंद नौकाओं पर हमले की पुष्टि की।
आईआरजीसी का बयान और होर्मुज पर नियंत्रण
आईआरजीसी की आधिकारिक न्यूज एजेंसी सेपा न्यूज में जारी बयान के अनुसार, ईरानी नौसेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर 'स्मार्ट और कड़ा नियंत्रण' बनाए हुए है। आईआरजीसी ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में 25 जहाज — जिनमें तेल टैंकर, कंटेनर शिप और अन्य कारोबारी जहाज शामिल थे — उसकी निगरानी और अनुमति के बाद सुरक्षित रूप से इस जलडमरूमध्य से गुजरे।
यह दावा ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रही है, जिससे दोनों पक्षों के बीच समुद्री नियंत्रण को लेकर सीधा टकराव उभरकर सामने आ रहा है।
अमेरिकी सेना की कार्रवाई और सेंट्रल कमांड का पक्ष
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने बयान में कहा, 'अमेरिकी सेना ने आज दक्षिणी ईरान में आत्मरक्षा के तहत कार्रवाई की, ताकि हमारे सैनिकों को ईरानी बलों से होने वाले खतरे से बचाया जा सके।' उन्होंने यह भी कहा कि 'सीजफायर के दौरान भी अमेरिकी सेंट्रल कमांड संयम बरतते हुए अपनी सेना की सुरक्षा करता रहेगा।'
निशानों में मिसाइल लॉन्च साइट्स और वे ईरानी नौकाएं शामिल थीं जो समुद्र में माइन बिछाने का प्रयास कर रही थीं।
युद्धविराम पर मंडराता खतरा
इन हमलों ने 8 अप्रैल 2026 से लागू नाजुक युद्धविराम को और कमजोर कर दिया है। अमेरिका और ईरान इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए समझौते की कोशिशों में लगे हैं, लेकिन ताजा घटनाक्रम उन प्रयासों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। गौरतलब है कि ईरान ने 28 फरवरी 2026 से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी पकड़ और सख्त कर दी थी, जब इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरानी क्षेत्र पर संयुक्त हमलों के बाद उसने उन जहाजों को रास्ता देने से मना कर दिया था जो इन दोनों देशों से जुड़े थे।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर असर
यह संघर्ष वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, नौसैनिक नाकेबंदी के कारण पिछले हफ्ते 100 जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा और 4 जहाजों को रोक दिया गया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है, और यहाँ किसी भी व्यवधान का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है।
आगे क्या होगा
दोनों पक्षों की ओर से जारी बयानबाजी और सैन्य कार्रवाइयों के बीच यह संघर्ष एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँचता दिख रहा है। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, युद्धविराम की बहाली के लिए किसी तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निर्णायक हो सकती है। फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण का सवाल इस पूरे संकट की धुरी बना हुआ है।