ईरान की कड़ी चेतावनी: अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही तो होर्मुज पर मिलेगा करारा जवाब
सारांश
Key Takeaways
- ईरान की सैन्य कमान 'खातम अल-अनबिया' ने अमेरिका को चेतावनी दी — होर्मुज पर नाकेबंदी जारी रही तो करारा जवाब मिलेगा।
- 28 फरवरी से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका-इजरायल से जुड़े जहाजों के गुजरने पर रोक लगाई हुई है।
- 8 अप्रैल को 40 दिनों के संघर्ष के बाद युद्धविराम हुआ लेकिन 11-12 अप्रैल की इस्लामाबाद वार्ता बेनतीजा रही।
- ईरान ने इस हफ्ते प्रस्तावित शांति वार्ता में शामिल होने से इनकार किया — अमेरिकी नाकेबंदी और कठोर शर्तें वजह बताई।
- विदेश मंत्री अराघची ने इस्लामाबाद में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से मुलाकात कर शांति प्रयासों पर चर्चा की।
- 'अल अरबिया' के अनुसार ईरान अमेरिका की निर्धारित शर्तों पर बातचीत के लिए तैयार नहीं है।
तेहरान, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान की शीर्ष सैन्य कमान 'खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर पश्चिम एशिया में नाकेबंदी, लूट और समुद्री दखलंदाजी बंद नहीं हुई, तो ईरान इसका मुंहतोड़ जवाब देने से नहीं चूकेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव अपने चरम पर है और दोनों देशों के बीच शांति वार्ता बेनतीजा रही है।
नाकेबंदी से ईरानी बंदरगाहों पर असर
ईरानी मीडिया में जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर रखी है, जिससे ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो रही है। पिछले कुछ दिनों में ईरान की ओर जा रहे कई जहाजों को रोका भी गया है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण और अधिक सख्त कर दिया था। उसने अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों के गुजरने पर रोक लगा दी थी। यह कदम दोनों देशों द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के जवाब में उठाया गया था।
ईरानी सेना की ताकत और तैयारी का दावा
ईरानी सैन्य कमान ने स्पष्ट किया कि उसकी सेना पहले से कहीं अधिक सशक्त और युद्ध के लिए तत्पर है। बयान में कहा गया कि ईरान अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है।
सेना ने यह भी कहा कि हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना ईरान की आक्रामक क्षमता का एक हिस्सा देख चुकी है। अगर अमेरिका और इजरायल ने दोबारा कोई सैन्य कार्रवाई की, तो ईरान उन्हें पहले से कहीं अधिक नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार है।
शांति वार्ता विफल, ईरान ने बातचीत से किया इनकार
करीब 40 दिनों के संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्धविराम हुआ था। इसके बाद 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच लंबी बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। इसके तत्काल बाद अमेरिका ने होर्मुज जलमार्ग पर नाकेबंदी लागू कर दी।
इस हफ्ते पाकिस्तान में एक और शांति वार्ता प्रस्तावित थी, लेकिन ईरान ने इसमें शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। सऊदी अरब से जुड़े समाचार चैनल 'अल अरबिया' ने भी एक सूत्र के हवाले से पुष्टि की कि ईरान अमेरिका द्वारा निर्धारित शर्तों पर बातचीत के लिए तैयार नहीं है।
अराघची की पाकिस्तान यात्रा और क्षेत्रीय कूटनीति
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची शुक्रवार रात एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे। शनिवार को उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से मुलाकात की और युद्ध समाप्त करने से जुड़े अपने विचार साझा किए।
अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'तस्नीम' के अनुसार, इस मुलाकात में युद्धविराम, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता तथा अमेरिका-इजरायल के साथ संघर्ष समाप्त करने के लिए आपसी सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
होर्मुज का रणनीतिक महत्व और वैश्विक प्रभाव
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यह तनाव केवल द्विपक्षीय मामला नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी गंभीर खतरा है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कोई तटस्थ मध्यस्थ जैसे पाकिस्तान, ओमान या कतर दोनों पक्षों को वार्ता की ओर वापस ला सकता है, या यह तनाव किसी बड़े टकराव में तब्दील हो जाएगा।