पश्चिम एशिया तनाव पर PM मोदी की CCS बैठक: ऊर्जा, खाद और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई 2026 को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की चौथी विशेष बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के मद्देनज़र भारत की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में ऊर्जा आपूर्ति, खाद की उपलब्धता और संघर्ष क्षेत्रों में तैनात भारतीय समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। यह ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए सीधा जोखिम बन रही है।
ऊर्जा आपूर्ति: क्या हैं तैयारियाँ
कैबिनेट सचिव ने CCS को मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति की विस्तृत जानकारी दी। PMO के बयान के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों, एलएनजी (LNG), एलपीजी (LPG) और खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा चुके हैं। एलपीजी की खरीद के स्रोतों को विस्तारित और विविध बनाया गया है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो। देश की रिफाइनरियाँ फिलहाल 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन निर्बाध जारी है।
बैठक में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों को और बढ़ाने की योजनाओं की भी समीक्षा हुई। बताया गया कि PNG कनेक्शनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा और अन्य गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करने पर ज़ोर दिया, जो ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
रबी सीजन के लिए खाद की उपलब्धता
आगामी रबी सीजन के लिए खाद की ज़रूरतों का विशेष रूप से आकलन किया गया। पश्चिम एशिया से खाद आयात प्रभावित होने की आशंका के बीच वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर गहन चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि खाद की आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित न हो और इसके लिए हर आवश्यक कदम तत्काल उठाया जाए। गौरतलब है कि भारत अपनी खाद ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है, इसलिए यह समीक्षा कृषि क्षेत्र के लिहाज़ से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
भारतीय समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा
संघर्ष क्षेत्रों में घरेलू और विदेशी जहाज़ों पर कार्यरत भारतीय सीफेरर्स (समुद्री कर्मचारियों) की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि एक ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जो इन कर्मचारियों और उनके परिवारों को समय पर जानकारी, आपातकालीन सहायता और ज़रूरी परामर्श उपलब्ध करा सके। उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष का असर विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय पर न पड़े, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए।
समन्वित निगरानी व्यवस्था का निर्देश
PMO के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने 'पूरी सरकार के समन्वित प्रयास' वाली रणनीति जारी रखने का निर्देश दिया। इसके तहत एक संयुक्त और समन्वित निगरानी व्यवस्था बनाए रखने पर बल दिया गया, जो हालात पर लगातार नज़र रखे और नागरिकों के हितों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों को तेज़ी से लागू करे। यह CCS की चौथी ऐसी विशेष बैठक है, जो पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की गंभीरता को रेखांकित करती है।
आगे क्या
सरकार की प्राथमिकता फिलहाल घरेलू ऊर्जा और खाद आपूर्ति को सुरक्षित रखने के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में यदि तनाव और बढ़ता है तो भारत के लिए ऊर्जा आयात की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जिसका असर घरेलू मुद्रास्फीति पर भी पड़ सकता है। सरकार की ओर से आने वाले दिनों में और समीक्षाएँ अपेक्षित हैं।