पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच पीएम मोदी ने सीसीएस बैठक की अध्यक्षता की, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विचार
सारांश
Key Takeaways
- प्रधानमंत्री मोदी ने सीसीएस बैठक की अध्यक्षता की।
- पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का आकलन किया गया।
- आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर मंथन हुआ।
- किसानों की खाद की आवश्यकता का आकलन किया गया।
- सरकार के सभी मंत्रालयों के बीच समन्वय का निर्देश दिया गया।
नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की पृष्ठभूमि में स्थिति का आकलन करने और संभावित राहत उपायों पर विचार करने के लिए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक की अध्यक्षता की।
इस बैठक में कैबिनेट सचिव ने वैश्विक परिदृश्य और भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों द्वारा उठाए गए कदमों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यात, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और अन्य प्रभावित क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई। देश की समग्र वृहद-आर्थिक स्थिति और उसके लिए उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार किया गया।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। भारत पर इसके संभावित प्रभावों का मूल्यांकन किया गया और तात्कालिक तथा दीर्घकालिक उत्तरदायी उपायों पर विचार विमर्श किया गया। आम नागरिकों की आवश्यकताओं (भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा) की उपलब्धता का गहन आकलन किया गया। आवश्यक वस्तुओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव और खरीफ मौसम के लिए उनकी खाद की आवश्यकता का आकलन किया गया। पिछले कुछ वर्षों में खाद का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों से समय पर उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकेगा। भविष्य में खाद की निरंतर उपलब्धता के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा की गई। यह भी सुनिश्चित किया गया कि सभी पावर प्लांट में कोयले का पर्याप्त भंडार होने से भारत में बिजली की कमी नहीं होगी।
केमिकल, फार्मास्यूटिकल, पेट्रोकेमिकल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक आयात के स्रोतों में विविधता लाने के लिए कई उपायों पर चर्चा की गई। इसी प्रकार, भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए निकट भविष्य में निर्यात के नए ठिकाने विकसित किए जाएंगे। विभिन्न मंत्रालयों द्वारा सुझाए गए कई उपायों को सभी हितधारकों के साथ परामर्श के बाद आगामी दिनों में लागू किया जाएगा।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने निर्देश दिया कि मंत्रियों और सचिवों का एक समूह बनाया जाए, जो 'संपूर्ण सरकार' के दृष्टिकोण से काम करें। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय समूह सभी हितधारकों के साथ परामर्श करके कार्य करें।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह संघर्ष एक निरंतर बदलती हुई स्थिति है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में, नागरिकों को इस संघर्ष के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि सरकार के सभी अंग मिलकर काम करें ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो। साथ ही, उन्होंने राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाए रखने के लिए भी कहा ताकि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी न हो।