प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिमी एशिया के संकट पर सरकार की तत्परता व्यक्त की

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प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिमी एशिया के संकट पर सरकार की तत्परता व्यक्त की

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी एशिया के संकट को गंभीर बताते हुए कहा है कि भारत सरकार इस स्थिति में हर सहायता के लिए तत्पर है। उन्होंने संसद में कहा कि युद्ध ने भारत के लिए कई चुनौतियाँ खड़ी की हैं।

Key Takeaways

  • प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिमी एशिया के संकट को गंभीरता से लिया है।
  • भारत सरकार भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
  • कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति में इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है।
  • सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए आवश्यक मदद सुनिश्चित की है।
  • सीबीएसई ने परीक्षाओं को रद्द किया है ताकि छात्रों की पढ़ाई निरंतर चलती रहे।

नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी एशिया की स्थिति को चिंताजनक बताया है। उन्होंने सोमवार को लोकसभा में पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष और उससे भारत के सामने आई परिस्थितियों पर बोलते हुए कहा कि सरकार संवेदनशील, सतर्क और हर सहायता के लिए तत्पर है।

पीएम मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, "पश्चिमी एशिया के हालात चिंताजनक हैं। पिछले दो-तीन हफ्तों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस विषय पर सदन को आवश्यक जानकारी दी है। यह संकट तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है। इससे देशों की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर विपरीत असर हो रहा है। इसलिए, दुनिया संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह कर रही है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के सामने भी युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियों खड़ी की हैं। ये चुनौतियाँ आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी और मानवीय भी हैं। युद्धरत और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक और व्यापारिक रिश्ते हैं। जिस क्षेत्र में युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के अन्य देशों के साथ हमारे व्यापार का भी महत्वपूर्ण मार्ग है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है।

उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह क्षेत्र एक और कारण से भी महत्वपूर्ण है। लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में निवास करते हैं और वहां काम करते हैं। वहां समुद्र में जो कमर्शियल शिप चलते हैं, उनमें भारतीय क्रू मेंबर की संख्या भी बहुत अधिक है। ऐसे अलग-अलग कारणों के चलते भारत की चिंताएँ स्वाभाविक रूप से अधिक हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए।

पीएम मोदी ने कहा कि जब से युद्ध शुरू हुआ है, तब से हर भारतीय को आवश्यक मदद दी जा रही है। मैंने स्वयं पश्चिमी एशिया के देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। दुर्भाग्यवश कुछ लोगों की दुखद मृत्यु हुई है और कुछ घायल हुए हैं। ऐसे कठिन हालात में प्रभावित परिवारों को आवश्यक मदद दी जा रही है। जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रभावित देशों में हमारे जितने भी मिशन हैं, वे लगातार भारतीयों की मदद में जुटे हैं। वहां काम करने वाले भारतीय हों या पर्यटक, सभी को हर संभव मदद दी जा रही है। हमारे मिशन नियमित रूप से सलाह जारी कर रहे हैं। यहां भारत और अन्य प्रभावित देशों में 24 घंटे कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई हैं। सभी भारतीयों को त्वरित जानकारी दी जा रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3.72 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से एक हजार भारतीय सुरक्षित लौटे हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई कर रहे युवा शामिल हैं। खाड़ी के देशों में भारतीय स्कूलों में हजारों विद्यार्थी पढ़ते हैं। सीबीएसई ने ऐसे सभी भारतीय स्कूलों में होने वाली कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। छात्रों की पढ़ाई लगातार चलती रहे, इसके लिए सीबीएसई उचित कदम उठा रही है।

Point of View

जो इस कठिन समय में महत्वपूर्ण है।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

पश्चिमी एशिया का संकट क्या है?
पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वहाँ की स्थिति चिंताजनक हो गई है, जिससे भारत को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत सरकार किस प्रकार मदद कर रही है?
भारत सरकार संकट में फंसे भारतीयों की सुरक्षा और सहायता के लिए तत्पर है, और यह अपने मिशनों के माध्यम से नियमित रूप से मदद प्रदान कर रही है।
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