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भारत ने एलएनजी आयात स्रोत 6 से बढ़ाकर 15 देश किए, पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा मजबूत

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भारत ने एलएनजी आयात स्रोत 6 से बढ़ाकर 15 देश किए, पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा मजबूत

सारांश

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाया है — एलएनजी स्रोत 6 से 15 और कच्चे तेल के स्रोत 27 से 41 देशों तक बढ़ाए गए हैं। साथ ही 11.83 MMT की रणनीतिक भंडारण क्षमता का विस्तार किया जा रहा है।

मुख्य बातें

भारत ने एलएनजी आयात स्रोत 6 देशों से बढ़ाकर 15 देशों तक किए — पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा के लिए।
कच्चे तेल के आयात स्रोत भी 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक विस्तारित किए गए।
भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 85% से अधिक आयात पर निर्भर है।
ISPRL ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में 5.33 MMT क्षमता के तीन रणनीतिक भंडार स्थापित किए हैं।
ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पडुर में 6.5 MMT की दो अतिरिक्त सुविधाओं को जुलाई 2021 में मंज़ूरी मिली।

भारत ने पश्चिम एशिया संकट के बीच अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात स्रोतों को पहले के 6 देशों से बढ़ाकर 15 देशों तक कर दिया है। यह जानकारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 10 अगस्त को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी। इसके साथ ही कच्चे तेल के आयात स्रोत भी 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक विस्तारित किए गए हैं।

ऊर्जा विविधीकरण की रणनीति

मंत्री सुरेश गोपी ने संसद को बताया कि इस विविधीकरण का मुख्य उद्देश्य किसी एक देश, क्षेत्र या पारगमन मार्ग पर भारत की निर्भरता को घटाना है। उन्होंने कहा, "इस विविधीकरण से किसी एक देश, क्षेत्र या पारगमन मार्ग पर निर्भरता कम हुई है और आपूर्ति में व्यवधान तथा बाज़ार में उतार-चढ़ाव से निपटने की भारत की क्षमता बढ़ी है।" ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों की नियमित निगरानी की जाती है और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनियों के साथ समन्वय में वैश्विक बाज़ार की स्थितियों का आकलन किया जाता है।

भारत की ऊर्जा निर्भरता और भू-राजनीतिक संदर्भ

भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात के ज़रिए पूरा करता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार भू-राजनीतिक तनावों के कारण अत्यधिक अस्थिर हो गया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते प्रमुख तेल पारगमन मार्गों पर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत बनाए रखना देश के लिए रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है।

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार

इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व लिमिटेड (ISPRL) ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) क्षमता वाली तीन रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व सुविधाएँ स्थापित की हैं। वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज़ी आने पर ये भंडार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरियों के काम आते हैं।

इसके अलावा, सरकार ने ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पडुर में कुल 6.5 MMT क्षमता वाली दो अतिरिक्त वाणिज्यिक-सह-रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व सुविधाओं को जुलाई 2021 में मंज़ूरी दी थी। ये परियोजनाएँ देश की आपातकालीन ऊर्जा क्षमता को और सुदृढ़ करेंगी।

आम जनता और उद्योग पर असर

ऊर्जा आपूर्ति में विविधता और रणनीतिक भंडार का विस्तार सीधे तौर पर घरेलू ईंधन कीमतों की स्थिरता से जुड़ा है। गौरतलब है कि अगर किसी एकल स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता रहती और उस मार्ग पर व्यवधान आता, तो पेट्रोल-डीज़ल से लेकर रसोई गैस तक की कीमतें प्रभावित हो सकती थीं। विविध आपूर्ति नेटवर्क इस जोखिम को काफी हद तक कम करता है।

आगे की राह

सरकार ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल, एलएनजी और पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकतानुसार कदम उठाए जाते रहेंगे। रणनीतिक भंडार क्षमता के विस्तार के साथ-साथ आयात स्रोतों की संख्या बढ़ाने की यह नीति भारत को वैश्विक ऊर्जा बाज़ार के झटकों से बचाने की दिशा में एक दीर्घकालिक कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह अपने आप में पर्याप्त नहीं — असली परीक्षा यह है कि क्या ये नए अनुबंध दीर्घकालिक और कीमत-स्थिर हैं या महज़ अल्पकालिक स्पॉट खरीद। भारत की 85% से अधिक आयात निर्भरता एक संरचनात्मक कमज़ोरी है जिसे स्रोत विविधीकरण केवल आंशिक रूप से संबोधित करता है। रणनीतिक भंडार क्षमता का विस्तार सही दिशा में है, लेकिन 11.83 MMT की कुल अनुमानित क्षमता अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के 90-दिन के आयात बफर मानक से अभी भी काफी पीछे है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने एलएनजी आयात स्रोत कितने देशों तक बढ़ाए हैं?
भारत ने एलएनजी आयात स्रोत पहले के 6 देशों से बढ़ाकर 15 देशों तक कर दिए हैं। यह जानकारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 10 अगस्त को राज्यसभा में दी।
भारत ने यह कदम क्यों उठाया?
पश्चिम एशिया संकट के कारण प्रमुख ऊर्जा पारगमन मार्गों पर संभावित व्यवधान के मद्देनज़र भारत ने आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए यह कदम उठाया। भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 85% से अधिक आयात पर निर्भर है, इसलिए विविधीकरण रणनीतिक प्राथमिकता है।
भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कहाँ हैं?
ISPRL ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में 5.33 MMT क्षमता की तीन सुविधाएँ स्थापित की हैं। इसके अलावा ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पडुर में 6.5 MMT की दो अतिरिक्त सुविधाओं को जुलाई 2021 में मंज़ूरी दी गई थी।
कच्चे तेल के आयात स्रोतों में क्या बदलाव आया है?
कच्चे तेल के आयात स्रोत 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिए गए हैं। यह विस्तार किसी एकल देश या क्षेत्र पर निर्भरता कम करने और आपूर्ति व्यवधानों से बचाव के लिए किया गया है।
इस विविधीकरण से आम जनता को क्या फ़ायदा होगा?
विविध आपूर्ति स्रोत और मज़बूत रणनीतिक भंडार किसी एक मार्ग पर व्यवधान की स्थिति में घरेलू ईंधन कीमतों को स्थिर रखने में मदद करते हैं। पेट्रोल-डीज़ल और रसोई गैस जैसे ज़रूरी उत्पादों की उपलब्धता और कीमत पर इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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