भारत ने एलएनजी आयात स्रोत 6 से बढ़ाकर 15 देश किए, पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने पश्चिम एशिया संकट के बीच अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात स्रोतों को पहले के 6 देशों से बढ़ाकर 15 देशों तक कर दिया है। यह जानकारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 10 अगस्त को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी। इसके साथ ही कच्चे तेल के आयात स्रोत भी 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक विस्तारित किए गए हैं।
ऊर्जा विविधीकरण की रणनीति
मंत्री सुरेश गोपी ने संसद को बताया कि इस विविधीकरण का मुख्य उद्देश्य किसी एक देश, क्षेत्र या पारगमन मार्ग पर भारत की निर्भरता को घटाना है। उन्होंने कहा, "इस विविधीकरण से किसी एक देश, क्षेत्र या पारगमन मार्ग पर निर्भरता कम हुई है और आपूर्ति में व्यवधान तथा बाज़ार में उतार-चढ़ाव से निपटने की भारत की क्षमता बढ़ी है।" ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों की नियमित निगरानी की जाती है और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनियों के साथ समन्वय में वैश्विक बाज़ार की स्थितियों का आकलन किया जाता है।
भारत की ऊर्जा निर्भरता और भू-राजनीतिक संदर्भ
भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात के ज़रिए पूरा करता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार भू-राजनीतिक तनावों के कारण अत्यधिक अस्थिर हो गया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते प्रमुख तेल पारगमन मार्गों पर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत बनाए रखना देश के लिए रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार
इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व लिमिटेड (ISPRL) ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) क्षमता वाली तीन रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व सुविधाएँ स्थापित की हैं। वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज़ी आने पर ये भंडार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरियों के काम आते हैं।
इसके अलावा, सरकार ने ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पडुर में कुल 6.5 MMT क्षमता वाली दो अतिरिक्त वाणिज्यिक-सह-रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व सुविधाओं को जुलाई 2021 में मंज़ूरी दी थी। ये परियोजनाएँ देश की आपातकालीन ऊर्जा क्षमता को और सुदृढ़ करेंगी।
आम जनता और उद्योग पर असर
ऊर्जा आपूर्ति में विविधता और रणनीतिक भंडार का विस्तार सीधे तौर पर घरेलू ईंधन कीमतों की स्थिरता से जुड़ा है। गौरतलब है कि अगर किसी एकल स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता रहती और उस मार्ग पर व्यवधान आता, तो पेट्रोल-डीज़ल से लेकर रसोई गैस तक की कीमतें प्रभावित हो सकती थीं। विविध आपूर्ति नेटवर्क इस जोखिम को काफी हद तक कम करता है।
आगे की राह
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल, एलएनजी और पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकतानुसार कदम उठाए जाते रहेंगे। रणनीतिक भंडार क्षमता के विस्तार के साथ-साथ आयात स्रोतों की संख्या बढ़ाने की यह नीति भारत को वैश्विक ऊर्जा बाज़ार के झटकों से बचाने की दिशा में एक दीर्घकालिक कदम है।