मध्य पूर्व संकट में भारत की ऊर्जा सुरक्षा: एक दशक के इन्फ्रा ने बचाई पेट्रोल-एलपीजी आपूर्ति
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम मंत्रालय ने 29 जून 2026 को बताया कि मध्य पूर्व तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट के अवरुद्ध होने के बावजूद भारत में पेट्रोल पंप और एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी रही — और इसका श्रेय पिछले एक दशक में तैयार किए गए मज़बूत ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर को जाता है। अनेक बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत ने इस संकट को कहीं बेहतर तरीके से संभाला।
आपूर्ति विविधीकरण: 27 से 41 देश
मंत्रालय के अनुसार, भारत को कच्चा तेल आपूर्ति करने वाले देशों की संख्या 27 से बढ़कर 41 हो गई है। लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए स्रोत जुड़े हैं, जबकि अमेरिका और रूस से आयात भी बढ़ाया गया है। इसके साथ ही शिपिंग रूट में बदलाव किया गया, जिससे अब भारत का बहुत कम कच्चा तेल हॉर्मुज से होकर गुजरता है। इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व्स लिमिटेड (ISPRL) के तहत रणनीतिक भंडार में लगभग 5.33 मिलियन टन तेल सुरक्षित है, जो करीब तीन सप्ताह की घरेलू जरूरत पूरी कर सकता है।
पेट्रोल-डीजल: उपभोक्ताओं को झटके से बचाया
केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की। पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3 और डीजल पर ₹10 से घटाकर शून्य कर दी गई। इस कदम से सरकारी राजस्व में लगभग ₹1.7 लाख करोड़ की कमी आई।
मार्केटिंग कंपनियों ने दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतें नहीं बढ़ाईं — यहाँ तक कि जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत $120 प्रति बैरल से ऊपर जा चुकी थी और कंपनियों को प्रतिदिन लगभग ₹1,000 करोड़ की अंडर-रिकवरी हो रही थी। अंततः 15 मई को केवल ₹3 प्रति लीटर की एकमुश्त बढ़ोतरी की गई। संकट की शुरुआत से अब तक भारत में पेट्रोल की कीमतों में कुल वृद्धि लगभग ₹7.5 प्रति लीटर रही, जो किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे कम है।
एलपीजी संकट: सबसे बड़ी चुनौती, सबसे बड़ी कामयाबी
भारतीय रसोई तक पहुँचने वाली आधी से अधिक कुकिंग गैस खाड़ी देशों से आती है — और आपूर्ति बाधित होते ही यह स्रोत लगभग रातोंरात बंद हो गया। आपूर्ति रुकने के आठ दिनों के भीतर एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर जारी किया गया, जिसमें सभी रिफाइनरियों को प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपलीन और ब्यूटीन स्ट्रीम्स का उपयोग कर अधिकतम उत्पादन का निर्देश दिया गया।
मंत्रालय के अनुसार, सात दिनों के भीतर घरेलू एलपीजी उत्पादन 35,000 टन से बढ़कर 54,000 टन प्रतिदिन हो गया — जो शेष आयात आवश्यकता (लगभग 30,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन) से काफी अधिक था। जिन रिफाइनरियों में पहले कभी एलपीजी उत्पादन नहीं होता था, उन्हें भी इस काम के लिए तैयार किया गया।
कीमत के मोर्चे पर भी उपभोक्ताओं को राहत दी गई। 14.2 किलो के सिलेंडर की आयात-आधारित लागत ₹1,600 से अधिक होने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कीमत ₹942 पर बनाए रखी गई। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 10.58 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के लिए ₹300 का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मिलने के बाद प्रभावी कीमत ₹642 रही। 7 जून को घरेलू एलपीजी में केवल ₹29 प्रति सिलेंडर की वृद्धि की गई।
एथेनॉल ब्लेंडिंग और कच्चे तेल की गिरती कीमत
एथेनॉल ब्लेंडिंग के 20 प्रतिशत के स्तर तक पहुँचने से हर साल कच्चे तेल के आयात में भारी बचत हो रही है — यह संरचनात्मक राहत संकट के दौरान विशेष रूप से कारगर साबित हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत अब गिरकर लगभग $74 प्रति बैरल पर आ गई है, जो मध्य पूर्व संकट से पहले के स्तर के करीब है।
आगे क्या
मंत्रालय ने माना है कि हॉर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा, क्योंकि बारूदी सुरंगों को हटाने और बड़े जहाजों के जमावड़े को निपटाने का काम जारी है। हालाँकि, 25 जून को कमर्शियल और बल्क एलपीजी पर लगी पाबंदियाँ हटा दी गई हैं और नॉन-डोमेस्टिक आपूर्ति संकट-पूर्व स्तर पर बहाल कर दी गई है। आपूर्ति बाधा का सबसे कठिन दौर बीत चुका है।