29 जून 2026
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हॉर्मुज संकट में भारत की ऊर्जा सुरक्षा अटूट रही, 40 देशों से आपूर्ति ने बचाया: विशेषज्ञ

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हॉर्मुज संकट में भारत की ऊर्जा सुरक्षा अटूट रही, 40 देशों से आपूर्ति ने बचाया: विशेषज्ञ

सारांश

हॉर्मुज स्ट्रेट चार महीने बंद रही, दुनिया के कई देशों में फ्यूल राशनिंग लागू हुई — लेकिन भारत के पेट्रोल पंप खुले रहे, रसोई गैस मिलती रही। 40 से अधिक देशों से आयात विविधीकरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश ने यह संभव किया। विशेषज्ञ इसे भारत की ऊर्जा नीति की बड़ी जीत बता रहे हैं।

मुख्य बातें

हॉर्मुज स्ट्रेट करीब चार महीने बंद रहने के बावजूद भारत में ईंधन और एलपीजी की आपूर्ति निर्बाध बनी रही।
भारत अपने कच्चे तेल का 85 प्रतिशत आयात करता है, फिर भी खुदरा कीमतों पर प्रभाव न्यूनतम रहा।
40 से अधिक देशों से आपूर्ति विविधीकरण की रणनीति ने हॉर्मुज रुकावट का असर कम किया।
दुनिया के कई देशों में ऑड-ईवन राशनिंग और पेट्रोल पंप जल्दी बंद करने जैसे आपातकालीन उपाय लागू हुए, भारत में नहीं।
HPCL के पूर्व CMD एम.के.
सुराना और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व CMD वर्तिका शुक्ला ने पेट्रोलियम मंत्रालय और सार्वजनिक तेल कंपनियों के समन्वय को श्रेय दिया।

करीब चार महीनों तक हॉर्मुज स्ट्रेट बंद रहने के बावजूद भारत में ईंधन की आपूर्ति निर्बाध बनी रही और आम उपभोक्ताओं पर प्रभाव न्यूनतम रहा — यह देश के ऊर्जा क्षेत्र की उस मज़बूती का प्रमाण है जो इन्फ्रास्ट्रक्चर में दीर्घकालिक निवेश, विविध आपूर्ति स्रोतों और सरकारी एजेंसियों के समन्वित निर्णयों पर टिकी है। 29 जून को ऊर्जा विशेषज्ञों ने यह आकलन साझा किया।

संकट की पृष्ठभूमि और शुरुआती आशंकाएँ

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एम.के. सुराना ने कहा कि जब पश्चिम एशिया में सशस्त्र संघर्ष शुरू हुआ और हॉर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग बाधित हुई, तो अधिकांश जानकारों को आशंका थी कि भारत को गंभीर ईंधन संकट का सामना करना पड़ेगा। उनके अनुसार, "जब टकराव शुरू हुआ और होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया, तो ज़्यादातर जानकारों को लगा था कि 85 प्रतिशत आयातित कच्चे तेल पर निर्भर भारत की आपूर्ति थप हो जाएगी और देश में पेट्रोल की कमी हो जाएगी।"

सुराना ने आगे कहा, "एलपीजी भी नहीं मिल पाती। भारी कमी हो जाती और बड़े पैमाने पर कामकाज बंद हो जाता।"

भारत का अनुभव: जहाँ दुनिया राशनिंग करती रही, यहाँ पंप खुले रहे

सुराना ने बताया कि जहाँ दुनिया के कई देशों को ऑड-ईवन फ्यूल राशनिंग, अनिवार्य 'घर से काम' और शाम 5 बजे पेट्रोल पंप बंद करने जैसे आपातकालीन उपाय लागू करने पड़े, वहीं भारत के नागरिकों को ऐसे किसी भी कदम का सामना नहीं करना पड़ा। यह तुलना भारत की ऊर्जा तैयारी को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में रेखांकित करती है।

उन्होंने इस सफलता का श्रेय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के मिले-जुले प्रयासों को दिया।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और विविधीकरण की भूमिका

इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वर्तिका शुक्ला ने कहा कि हॉर्मुज स्ट्रेट से उत्पन्न चुनौतियों ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र की असली ताकत को सामने रखा। उनके अनुसार, आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों का खुदरा कीमतों पर प्रभाव न्यूनतम रहा, जिसके पीछे सरकार द्वारा समय पर आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण और ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर में पर्याप्त निवेश प्रमुख कारण थे।

सुराना के अनुसार, 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात सुनिश्चित करने की रणनीति ने हॉर्मुज में आई रुकावट के प्रभाव को कम करने और भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभाई।

घरेलू रसोई गैस आपूर्ति बाधित नहीं हुई

सुराना ने बताया कि संकट के दौरान भी देश घरेलू कुकिंग गैस (एलपीजी) की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के बनाए रखने में सफल रहा। इसके लिए आपूर्ति और मांग दोनों पक्षों पर एक साथ उपाय अपनाए गए, जिनमें घरेलू खपत को प्राथमिकता देना शामिल था।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट भारत की ऊर्जा नीति के लिए एक परीक्षण भी था और एक सबक भी। 40 से अधिक देशों से आपूर्ति का विविधीकरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश की यह रणनीति आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा की आधारशिला बनती दिख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और परिणाम उत्साहजनक रहे — लेकिन इसे पूर्ण सफलता मानने से पहले कुछ सवाल ज़रूरी हैं। 40 देशों से आपूर्ति विविधीकरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश निश्चित रूप से दूरदर्शी कदम हैं, परंतु भारत की 85% आयात-निर्भरता एक संरचनात्मक कमज़ोरी है जो अगले संकट में और गहरी चुनौती पेश कर सकती है। घरेलू उत्पादन बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ाए बिना, यह 'लचीलापन' आंशिक ही रहेगा। विशेषज्ञों की प्रशंसा सही है, लेकिन दीर्घकालिक ऊर्जा स्वतंत्रता के लिए आयात विविधीकरण पर्याप्त नहीं — यह शुरुआत है, मंज़िल नहीं।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने के दौरान भारत में ईंधन आपूर्ति कैसे बनी रही?
भारत ने 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल के आयात का विविधीकरण कर रखा था, जिससे हॉर्मुज स्ट्रेट की रुकावट का असर सीमित रहा। पेट्रोलियम मंत्रालय, सार्वजनिक तेल मार्केटिंग कंपनियों और सरकारी एजेंसियों के समन्वित प्रयासों ने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित नहीं होने दिया।
क्या हॉर्मुज संकट के दौरान भारत में एलपीजी की कमी हुई?
नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत घरेलू कुकिंग गैस (एलपीजी) की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के बनाए रखने में सफल रहा। इसके लिए आपूर्ति और मांग दोनों पक्षों पर एक साथ उपाय अपनाए गए और घरेलू खपत को प्राथमिकता दी गई।
भारत कच्चे तेल के आयात के लिए कितने देशों पर निर्भर है?
भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है। HPCL के पूर्व CMD एम.के. सुराना के अनुसार, यही विविधीकरण हॉर्मुज संकट के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा की सबसे बड़ी ढाल साबित हुई।
हॉर्मुज संकट के दौरान अन्य देशों की स्थिति भारत से कैसे अलग रही?
दुनिया के कई देशों को ऑड-ईवन फ्यूल राशनिंग, अनिवार्य 'घर से काम' और शाम 5 बजे पेट्रोल पंप बंद करने जैसे आपातकालीन उपाय लागू करने पड़े। भारत के नागरिकों को ऐसे किसी भी कदम का सामना नहीं करना पड़ा, जो देश की ऊर्जा तैयारी को वैश्विक स्तर पर अलग करता है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को इस संकट से क्या सबक मिला?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट भारत की ऊर्जा नीति का व्यावहारिक परीक्षण था। इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश और आपूर्ति विविधीकरण की रणनीति कारगर साबित हुई, लेकिन 85% आयात-निर्भरता को देखते हुए घरेलू उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा में और निवेश की ज़रूरत बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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