हॉर्मुज संकट में भारत की ऊर्जा सुरक्षा अटूट रही, 40 देशों से आपूर्ति ने बचाया: विशेषज्ञ
सारांश
मुख्य बातें
करीब चार महीनों तक हॉर्मुज स्ट्रेट बंद रहने के बावजूद भारत में ईंधन की आपूर्ति निर्बाध बनी रही और आम उपभोक्ताओं पर प्रभाव न्यूनतम रहा — यह देश के ऊर्जा क्षेत्र की उस मज़बूती का प्रमाण है जो इन्फ्रास्ट्रक्चर में दीर्घकालिक निवेश, विविध आपूर्ति स्रोतों और सरकारी एजेंसियों के समन्वित निर्णयों पर टिकी है। 29 जून को ऊर्जा विशेषज्ञों ने यह आकलन साझा किया।
संकट की पृष्ठभूमि और शुरुआती आशंकाएँ
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एम.के. सुराना ने कहा कि जब पश्चिम एशिया में सशस्त्र संघर्ष शुरू हुआ और हॉर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग बाधित हुई, तो अधिकांश जानकारों को आशंका थी कि भारत को गंभीर ईंधन संकट का सामना करना पड़ेगा। उनके अनुसार, "जब टकराव शुरू हुआ और होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया, तो ज़्यादातर जानकारों को लगा था कि 85 प्रतिशत आयातित कच्चे तेल पर निर्भर भारत की आपूर्ति थप हो जाएगी और देश में पेट्रोल की कमी हो जाएगी।"
सुराना ने आगे कहा, "एलपीजी भी नहीं मिल पाती। भारी कमी हो जाती और बड़े पैमाने पर कामकाज बंद हो जाता।"
भारत का अनुभव: जहाँ दुनिया राशनिंग करती रही, यहाँ पंप खुले रहे
सुराना ने बताया कि जहाँ दुनिया के कई देशों को ऑड-ईवन फ्यूल राशनिंग, अनिवार्य 'घर से काम' और शाम 5 बजे पेट्रोल पंप बंद करने जैसे आपातकालीन उपाय लागू करने पड़े, वहीं भारत के नागरिकों को ऐसे किसी भी कदम का सामना नहीं करना पड़ा। यह तुलना भारत की ऊर्जा तैयारी को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में रेखांकित करती है।
उन्होंने इस सफलता का श्रेय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के मिले-जुले प्रयासों को दिया।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और विविधीकरण की भूमिका
इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वर्तिका शुक्ला ने कहा कि हॉर्मुज स्ट्रेट से उत्पन्न चुनौतियों ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र की असली ताकत को सामने रखा। उनके अनुसार, आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों का खुदरा कीमतों पर प्रभाव न्यूनतम रहा, जिसके पीछे सरकार द्वारा समय पर आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण और ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर में पर्याप्त निवेश प्रमुख कारण थे।
सुराना के अनुसार, 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात सुनिश्चित करने की रणनीति ने हॉर्मुज में आई रुकावट के प्रभाव को कम करने और भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभाई।
घरेलू रसोई गैस आपूर्ति बाधित नहीं हुई
सुराना ने बताया कि संकट के दौरान भी देश घरेलू कुकिंग गैस (एलपीजी) की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के बनाए रखने में सफल रहा। इसके लिए आपूर्ति और मांग दोनों पक्षों पर एक साथ उपाय अपनाए गए, जिनमें घरेलू खपत को प्राथमिकता देना शामिल था।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट भारत की ऊर्जा नीति के लिए एक परीक्षण भी था और एक सबक भी। 40 से अधिक देशों से आपूर्ति का विविधीकरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश की यह रणनीति आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा की आधारशिला बनती दिख रही है।