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होर्मुज संकट के बीच भारत सुरक्षित: अगस्त तक कच्चा तेल और LPG स्टॉक सुनिश्चित, विशेषज्ञों ने दी राहत की खबर

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होर्मुज संकट के बीच भारत सुरक्षित: अगस्त तक कच्चा तेल और LPG स्टॉक सुनिश्चित, विशेषज्ञों ने दी राहत की खबर

सारांश

होर्मुज बंद और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बावजूद भारत इस बार तैयार है — अगस्त तक का कच्चा तेल और एलपीजी स्टॉक सुरक्षित है। ब्रेंट क्रूड 5% उछलकर 80 डॉलर पर पहुँचा, लेकिन गैर-ओपेक उत्पादन वृद्धि से आपूर्ति की चिंता अपेक्षाकृत कम है।

मुख्य बातें

ईरान ने 11 जुलाई को होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से बंद करने का ऐलान किया; रविवार को जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठप रही।
भारत ने अगस्त तक का कच्चा तेल और एलपीजी आयात पहले ही सुरक्षित कर लिया है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की एलएनजी और 45 दिनों की एलपीजी का भंडार है।
ब्रेंट क्रूड करीब 5% उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल और WTI 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचा।
विशेषज्ञों के अनुसार तनाव जारी रहा तो कीमतें 80-85 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, लेकिन गैर-ओपेक उत्पादन वृद्धि से राहत है।
सितंबर-अक्टूबर में रिफाइनरी उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका; एलएनजी में कुछ चुनौतियाँ संभव लेकिन प्रबंधनीय।

नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका के बीच नए सिरे से छिड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बावजूद, भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पहले की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति में है। विशेषज्ञों ने 13 जुलाई को यह आकलन सामने रखा। देश ने अगस्त तक के कच्चे तेल और एलपीजी आयात को पहले ही सुरक्षित कर लिया है, जो इस संकट में भारत की तैयारी का सबसे बड़ा प्रमाण है।

होर्मुज बंद: क्या हुआ और क्यों

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने 11 जुलाई को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने का ऐलान किया। इसके तुरंत बाद रविवार को इस जलमार्ग से जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। होर्मुज दुनिया का सबसे व्यस्त तेल-पारगमन मार्ग है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव पहले से ही चरम पर था।

भारत की तैयारी और मौजूदा स्टॉक

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 2 जुलाई को स्पष्ट किया था कि भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की एलएनजी और 45 दिनों की एलपीजी का भंडार मौजूद है। एक रिफाइनरी अधिकारी ने बताया कि होर्मुज के बंद होने से सितंबर-अक्टूबर की उत्पादन लागत बढ़ सकती है, लेकिन अगस्त तक के आयात सुरक्षित होने के कारण तत्काल संकट की स्थिति नहीं है। एलएनजी आपूर्ति में कुछ चुनौतियाँ संभव हैं, परंतु वे प्रबंधनीय बताई गई हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाज़ार पर तुरंत दिखा। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुँच गया, जबकि WTI क्रूड भी 5 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचा। विशेषज्ञों के अनुसार यदि तनाव और बढ़ा, तो ब्रेंट क्रूड 80-85 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।

गैर-ओपेक उत्पादन से मिली राहत

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार आपूर्ति को लेकर चिंताएँ अपेक्षाकृत कम हैं, क्योंकि गैर-ओपेक देशों ने अपना उत्पादन पहले ही बढ़ा लिया है। गौरतलब है कि होर्मुज के पहले के बंद होने के बाद भारत ने औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर लगाई गई पाबंदियों में भी ढील दी थी, जो यह दर्शाता है कि सरकार के पास संकट-प्रबंधन का अनुभव मौजूद है।

आगे क्या होगा

विश्लेषकों के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य अगले कुछ हफ्तों में नहीं खुला, तो सितंबर से भारतीय रिफाइनरियों की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। हालाँकि, अगस्त तक का आयात सुरक्षित होने और रणनीतिक भंडार के चलते भारत के पास कूटनीतिक हल खोजने का पर्याप्त समय है। शांति वार्ता की किसी भी प्रगति पर भारतीय ऊर्जा बाज़ार की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन '60 दिनों का भंडार' एक स्थिर आँकड़ा नहीं है — यह तेज़ी से घट सकता है यदि होर्मुज बंद लंबा खिंचा। असली परीक्षा यह है कि सितंबर-अक्टूबर की रिफाइनरी लागत वृद्धि को सरकार उपभोक्ताओं पर डालती है या खुद वहन करती है — जो चुनावी राजनीति और राजकोषीय अनुशासन दोनों को प्रभावित करेगा। गैर-ओपेक उत्पादन वृद्धि की राहत वास्तविक है, लेकिन भारत की ऊर्जा आयात निर्भरता की संरचनात्मक कमज़ोरी इस संकट में एक बार फिर उजागर हुई है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत पर क्या असर पड़ेगा?
होर्मुज बंद होने से भारत की कच्चे तेल और एलएनजी आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन अगस्त तक का आयात पहले ही सुरक्षित है। रिफाइनरी अधिकारियों के अनुसार सितंबर-अक्टूबर में उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है।
भारत के पास अभी कितने दिनों का तेल भंडार है?
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 2 जुलाई को बताया था कि भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की एलएनजी और 45 दिनों की एलपीजी का रणनीतिक भंडार उपलब्ध है।
ईरान-अमेरिका तनाव से कच्चे तेल की कीमतें कितनी बढ़ीं?
मध्य पूर्व तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया। विशेषज्ञों के अनुसार यदि तनाव जारी रहा तो कीमतें 80-85 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं।
क्या इस बार आपूर्ति संकट पिछली बार से अलग है?
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार स्थिति बेहतर है क्योंकि गैर-ओपेक देशों ने उत्पादन बढ़ाया है और भारत ने अगस्त तक का आयात पहले ही सुरक्षित कर लिया है। पिछले होर्मुज बंद के बाद भारत ने औद्योगिक उपभोक्ताओं पर गैस-आपूर्ति पाबंदियाँ लगाई थीं, जिन्हें बाद में हटाया गया था।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य कब बंद किया?
ईरान ने 11 जुलाई को अमेरिकी हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से बंद करने की घोषणा की। इसके बाद रविवार को इस मार्ग से जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठप हो गई।
राष्ट्र प्रेस
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