होर्मुज संकट के बीच भारत सुरक्षित: अगस्त तक कच्चा तेल और LPG स्टॉक सुनिश्चित, विशेषज्ञों ने दी राहत की खबर
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका के बीच नए सिरे से छिड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बावजूद, भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पहले की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति में है। विशेषज्ञों ने 13 जुलाई को यह आकलन सामने रखा। देश ने अगस्त तक के कच्चे तेल और एलपीजी आयात को पहले ही सुरक्षित कर लिया है, जो इस संकट में भारत की तैयारी का सबसे बड़ा प्रमाण है।
होर्मुज बंद: क्या हुआ और क्यों
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने 11 जुलाई को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने का ऐलान किया। इसके तुरंत बाद रविवार को इस जलमार्ग से जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। होर्मुज दुनिया का सबसे व्यस्त तेल-पारगमन मार्ग है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव पहले से ही चरम पर था।
भारत की तैयारी और मौजूदा स्टॉक
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 2 जुलाई को स्पष्ट किया था कि भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की एलएनजी और 45 दिनों की एलपीजी का भंडार मौजूद है। एक रिफाइनरी अधिकारी ने बताया कि होर्मुज के बंद होने से सितंबर-अक्टूबर की उत्पादन लागत बढ़ सकती है, लेकिन अगस्त तक के आयात सुरक्षित होने के कारण तत्काल संकट की स्थिति नहीं है। एलएनजी आपूर्ति में कुछ चुनौतियाँ संभव हैं, परंतु वे प्रबंधनीय बताई गई हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाज़ार पर तुरंत दिखा। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुँच गया, जबकि WTI क्रूड भी 5 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचा। विशेषज्ञों के अनुसार यदि तनाव और बढ़ा, तो ब्रेंट क्रूड 80-85 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।
गैर-ओपेक उत्पादन से मिली राहत
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार आपूर्ति को लेकर चिंताएँ अपेक्षाकृत कम हैं, क्योंकि गैर-ओपेक देशों ने अपना उत्पादन पहले ही बढ़ा लिया है। गौरतलब है कि होर्मुज के पहले के बंद होने के बाद भारत ने औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर लगाई गई पाबंदियों में भी ढील दी थी, जो यह दर्शाता है कि सरकार के पास संकट-प्रबंधन का अनुभव मौजूद है।
आगे क्या होगा
विश्लेषकों के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य अगले कुछ हफ्तों में नहीं खुला, तो सितंबर से भारतीय रिफाइनरियों की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। हालाँकि, अगस्त तक का आयात सुरक्षित होने और रणनीतिक भंडार के चलते भारत के पास कूटनीतिक हल खोजने का पर्याप्त समय है। शांति वार्ता की किसी भी प्रगति पर भारतीय ऊर्जा बाज़ार की नज़र बनी रहेगी।