13 जुलाई 2026
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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता सही दिशा में: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल, BTA जल्द होगा साइन

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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता सही दिशा में: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल, BTA जल्द होगा साइन

सारांश

भारत-अमेरिका फ्रेमवर्क ट्रेड डील अब अंतिम पड़ाव पर है — वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और मंत्री पीयूष गोयल दोनों ने भरोसा जताया कि रियायतें तय हो चुकी हैं। ऊँचे टैरिफ के बावजूद निर्यात मज़बूत है और अप्रैल-जून तिमाही में 15% वृद्धि का अनुमान है।

मुख्य बातें

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 13 जुलाई को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता सही दिशा में है और कोई बड़ी चुनौती नहीं है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार BTA बातचीत अंतिम दौर में है; अधिकांश रियायतें अंतिम रूप ले चुकी हैं।
भारत का लक्ष्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले तरजीही बाज़ार पहुँच सुनिश्चित करना है।
मई 2025 में अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा 4.1 अरब डॉलर रहा — एशिया के अन्य मैन्युफैक्चरिंग हब से कम।
अप्रैल-जून तिमाही में भारत का अमेरिका को सामान निर्यात सालाना 15 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान।

केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार, 13 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच जारी द्विपक्षीय व्यापार वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ रही है और यह समझौता दोनों देशों के हित में होगा। उन्होंने कहा, 'हमें बातचीत में कोई चुनौती नहीं दिख रही है और बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है।'

वार्ता की मौजूदा स्थिति

अग्रवाल ने बताया कि दोनों पक्ष इस समझौते को लेकर सकारात्मक हैं। उन्होंने कहा, 'भारत-अमेरिका फ्रेमवर्क ट्रेड डील सही समय पर साइन किए जाने के लिए तैयार है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत हो रहे हैं, जिसमें अमेरिका से ऊर्जा आयात भी एक अहम हिस्सा है।

वाणिज्य मंत्री का रुख

इस महीने की शुरुआत में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा था कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की बातचीत अंतिम दौर में पहुँच चुकी है। उनके अनुसार अधिकांश महत्वपूर्ण मुद्दों को सुलझा लिया गया है और दोनों पक्ष एक ऐसे समझौते पर काम कर रहे हैं जिससे नई दिल्ली को अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में तरजीही बाज़ार पहुँच मिल सके। गोयल ने कहा, 'रियायतों और अन्य पहलुओं को काफी हद तक अंतिम रूप दिया जा चुका है।'

निर्यात और व्यापार घाटे के आँकड़े

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, मई 2025 में अमेरिका का भारत के साथ सामानों के व्यापार में 4.1 अरब डॉलर का घाटा दर्ज किया गया। यह ऐसे समय में आया जब अमेरिका का कुल व्यापार घाटा निर्यात में गिरावट और आयात में बढ़ोतरी के बीच तेज़ी से बढ़ा। गौरतलब है कि भारत का यह घाटा एशिया के कई अन्य प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों की तुलना में काफी कम रहा, जो व्यापक एशियाई सप्लाई चेन में भारत की अपेक्षाकृत संतुलित स्थिति को दर्शाता है।

ऊँचे टैरिफ के बावजूद अमेरिका को भारत का निर्यात मज़बूत बना हुआ है। गोयल ने अनुमान जताया कि अप्रैल-जून तिमाही में भारत का सामान निर्यात सालाना आधार पर लगभग 15 प्रतिशत बढ़ेगा।

आगे की राह

वाशिंगटन में हाल के कानूनी और नीतिगत घटनाक्रमों के बावजूद गोयल ने भरोसा जताया कि समझौते की राह में कोई बड़ी बाधा नहीं है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक व्यापार तनाव और अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भारत की कोशिश है कि इस समझौते के ज़रिये अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर बाज़ार पहुँच सुनिश्चित की जाए और द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊँचाई पर ले जाया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'सही दिशा में' जैसे कूटनीतिक वाक्यांश समयसीमा या बाध्यकारी प्रतिबद्धता के बारे में कुछ नहीं बताते। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी टैरिफ नीति अनिश्चित बनी हुई है और वाशिंगटन में कानूनी-नीतिगत उथल-पुथल जारी है। असली कसौटी यह होगी कि भारत को मिलने वाली 'तरजीही पहुँच' वास्तव में प्रतिस्पर्धियों — खासकर वियतनाम और मेक्सिको — से बेहतर होगी या नहीं। जब तक समझौते का पाठ सार्वजनिक नहीं होता, 15% निर्यात वृद्धि का अनुमान BTA की सफलता का प्रमाण नहीं, बल्कि मौजूदा व्यापार गति का संकेत मात्र है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) क्या है?
BTA भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित एक व्यापार ढाँचा है जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच बाज़ार पहुँच, टैरिफ रियायतें और व्यापारिक संबंधों को संस्थागत रूप देना है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार इसकी बातचीत अंतिम दौर में है और अधिकांश अहम मुद्दे सुलझा लिए गए हैं।
वार्ता में अभी तक क्या प्रगति हुई है?
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 13 जुलाई को बताया कि दोनों पक्ष सकारात्मक हैं और रियायतों को काफी हद तक अंतिम रूप दिया जा चुका है। भारत की प्राथमिकता प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले तरजीही बाज़ार पहुँच सुनिश्चित करना है।
अमेरिका को भारत का निर्यात कैसा रहा है?
ऊँचे टैरिफ के बावजूद अमेरिका को भारत का निर्यात मज़बूत बना हुआ है। अनुमान है कि अप्रैल-जून 2025 तिमाही में सामान निर्यात सालाना आधार पर लगभग 15 प्रतिशत बढ़ेगा।
मई 2025 में अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा कितना रहा?
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार मई 2025 में अमेरिका का भारत के साथ सामानों के व्यापार में 4.1 अरब डॉलर का घाटा दर्ज किया गया। यह आँकड़ा एशिया के कई अन्य प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों के साथ अमेरिकी घाटे की तुलना में काफी कम है।
समझौते में ऊर्जा आयात की क्या भूमिका है?
वाणिज्य सचिव अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि अमेरिका से ऊर्जा आयात भी दोनों देशों के बीच मज़बूत होते व्यापारिक संबंधों का हिस्सा है। यह समझौते के व्यापक ढाँचे का एक अंग है जिससे द्विपक्षीय व्यापार में संतुलन लाने की कोशिश की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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