भारत-अमेरिका BTA वार्ता: धारा 301 टैरिफ पर भी होगी चर्चा, 99% बातचीत पूरी — गोयल
सारांश
मुख्य बातें
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत लगाए गए टैरिफ और इससे जुड़ी चल रही जाँच को भी वार्ता के दायरे में लाया जा सकता है। 1 जून 2026 को सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों देशों के बीच लगभग 99 प्रतिशत वार्ताएँ पूरी हो चुकी हैं।
वार्ता का मौजूदा स्वरूप
सूत्रों के मुताबिक, 2 से 4 जून 2026 तक दोनों पक्षों के बीच बातचीत निर्धारित है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच करेंगे, जबकि भारत की टीम की बागडोर वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन के हाथ में होगी। शेष मुद्दों पर स्पष्टता आने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर और मंत्री गोयल के बीच उच्चस्तरीय बैठक भी हो सकती है।
BTA का दायरा और उद्देश्य
व्यापक BTA ढाँचे में बाज़ार पहुँच, गैर-टैरिफ बाधाएँ, सीमा शुल्क सुविधा, निवेश प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा सहयोग शामिल हैं। अभी वार्ता तकनीकी विवरणों को सुलझाने और कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने पर केंद्रित है। समझौते के बाद भारतीय निर्यात को अमेरिकी बाज़ार में प्रतिस्पर्धियों की तुलना में प्राथमिकता के आधार पर पहुँच मिलने की उम्मीद है।
धारा 301 क्या है और भारत पर क्या असर
अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत एक व्यापक जाँच चल रही है जिसमें भारत और चीन सहित 60 अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं। इस जाँच का उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि क्या जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता से जुड़ी इन देशों की नीतियाँ एवं प्रथाएँ अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं, और क्या वे अमेरिकी व्यापार पर अनावश्यक बोझ डालती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश व्यापार सामान्यीकरण की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
आगे क्या होगा
मंत्री गोयल ने स्पष्ट किया, 'हम बहुत जल्द अमेरिका के साथ पहले BTA पर हस्ताक्षर की घोषणा करेंगे और दूसरे चरण पर अपनी बातचीत जारी रखेंगे।' अधिकारियों के संकेतों के अनुसार, 2-4 जून की वार्ता के तुरंत बाद समझौते के पहले चरण की औपचारिक घोषणा हो सकती है। गौरतलब है कि यह समझौता भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी, जिसका प्रभाव दोनों देशों के निर्यातकों और निवेशकों पर सीधे पड़ेगा।