भारत-अमेरिका BTA: जैमीसन ग्रीर और पीयूष गोयल के बीच इस सप्ताह कई दौर की वार्ता, 24 जुलाई की टैरिफ समयसीमा से पहले समझौते की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर इस सप्ताह नई दिल्ली पहुँच रहे हैं, जहाँ वे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को आगे बढ़ाने के लिए कई दौर की मंत्रिस्तरीय बैठकें करेंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 22 जून को यह जानकारी दी। यह वार्ता 24 जुलाई की उस महत्वपूर्ण टैरिफ समयसीमा से पहले हो रही है, जब अमेरिका का 10 प्रतिशत का अस्थायी अतिरिक्त टैरिफ समाप्त होने वाला है।
राजदूत का एक्स पर ऐलान
राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'नई दिल्ली में राजदूत ग्रीर का स्वागत करने के लिए उत्साहित हूँ। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई बैठकें निर्धारित हैं।' इससे एक दिन पहले, रविवार 21 जून को, गोयल ने स्वयं पत्रकारों को बताया था कि उनके अमेरिकी समकक्ष व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए दिल्ली आ रहे हैं।
टैरिफ समयसीमा और दाँव पर क्या है
अमेरिकी प्रशासन ने इस वर्ष की शुरुआत में भारत सहित अपने सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर 10 प्रतिशत का अस्थायी अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जो 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) शुल्क दरों के ऊपर था। यह 150 दिनों की अवधि 24 जुलाई को समाप्त हो रही है। समयसीमा बीतने के बाद अमेरिका नई टैरिफ व्यवस्था लागू कर सकता है, जिससे भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि दोनों पक्ष BTA के पहले चरण का ढाँचा जल्द से जल्द अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
वार्ता की पृष्ठभूमि
यह मंत्रिस्तरीय बैठक 2 जून से 4 जून के बीच नई दिल्ली में हुई मुख्य वार्ताकार स्तर की बैठकों के बाद की अगली कड़ी है। इस महीने की शुरुआत में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया था कि इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य ढाँचा समझौते को अंतिम रूप देना और व्यापक व्यापार समझौते पर वार्ता को गति देना है। गौरतलब है कि पीयूष गोयल ने भरोसा जताया था कि BTA का पहला चरण अगले महीने के मध्य तक पूरा किया जा सकता है।
आगे की राह
दोनों देश एक चरणबद्ध व्यापार व्यवस्था पर काम कर रहे हैं — पहले एक अंतरिम समझौता, जो आगे चलकर व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की नींव बनेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अंतरिम समझौता दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों को संस्थागत ढाँचा देने की दिशा में एक अहम कदम होगा। 24 जुलाई की समयसीमा से पहले किसी सहमति तक पहुँचना दोनों पक्षों की प्राथमिकता बताई जा रही है।