निर्मला सीतारमण की USTR जेमिसन ग्रीर से बैठक, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर तेज़ी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 23 जून को नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर के नेतृत्व वाले उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और गहरा करने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक ऐसे महत्वपूर्ण समय में हुई जब भारत और अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के पहले चरण को अगले महीने की निर्णायक टैरिफ समयसीमा से पहले अंतिम रूप देने की कोशिश में हैं।
बैठक में क्या हुआ
वित्त मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी देते हुए बताया कि वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने USTR जेमिसन ग्रीर के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के साथ 'विकास के नए अवसरों और गहरे व्यापारिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।' इसके अलावा, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी ग्रीर के साथ कई दौर की अलग बैठकें कीं।
अमेरिकी राजदूत की प्रतिक्रिया
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर ग्रीर का स्वागत करते हुए लिखा कि दोनों देश 'एक मजबूत द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे दोनों देशों के लिए नए आर्थिक अवसर खुलेंगे और अमेरिका-भारत आर्थिक साझेदारी और भी मजबूत होगी।' वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी गोर की इस पोस्ट को उद्धृत करते हुए प्रतिनिधिमंडल का वाणिज्य विभाग में स्वागत किया।
टैरिफ समयसीमा की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ग्रीर की यह यात्रा ऐसे नाज़ुक दौर में हुई जब अमेरिका की ओर से भारतीय वस्तुओं पर लागू टैरिफ व्यवस्था की समीक्षा की अगले महीने समयसीमा है। दोनों देश इस समयसीमा से पहले व्यापार समझौते के पहले चरण का ढाँचा तय करना चाहते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव के बीच भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को नई रणनीतिक दिशा देने की कोशिश की जा रही है।
आगे की राह
इन बैठकों के नतीजे आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होंगे, जब दोनों पक्ष व्यापार समझौते के पहले चरण के तकनीकी विवरणों को अंतिम रूप देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौते की रूपरेखा समय पर तय हो जाती है, तो यह भारतीय निर्यातकों के लिए टैरिफ राहत और अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाज़ार में बेहतर पहुँच का रास्ता खोल सकती है।