भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता 1 जून से नई दिल्ली में, अंतरिम BTA के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने पर फोकस
सारांश
मुख्य बातें
भारत और अमेरिका के मुख्य वार्ताकार 1 जून 2025 से नई दिल्ली में चार दिवसीय बैठक शुरू करेंगे, जिसका प्राथमिक लक्ष्य प्रस्तावित अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के विवरण और कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देना है। इस वर्ष की शुरुआत में दोनों देशों के बीच जिस व्यापक ढाँचे पर सहमति बनी थी, यह बैठक उसी को आगे बढ़ाने की कड़ी है।
वार्ता का नेतृत्व और एजेंडा
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच करेंगे, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन के हाथों में होगा। बातचीत में बाज़ार पहुँच, गैर-टैरिफ बाधाएँ, सीमा शुल्क एवं व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर विमर्श होने की उम्मीद है।
वार्ता की पृष्ठभूमि
इन वार्ताओं की नींव 7 फरवरी को जारी उस संयुक्त बयान से पड़ी थी, जिसमें BTA के पहले चरण की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने और रूस से तेल खरीद से जुड़ी कुछ भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को हटाने पर सहमति जताई थी।
बदले हुए टैरिफ परिदृश्य का असर
यह ऐसे समय में आया है जब व्यापारिक माहौल में बड़े बदलाव हो चुके हैं। 20 फरवरी को अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पारस्परिक शुल्क व्यवस्था के विरुद्ध फैसला सुनाया, जिसे 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियाँ अधिनियम (IEEPA) के तहत लागू किया गया था। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों की अवधि के लिए सभी देशों के आयात पर एकसमान 10 प्रतिशत शुल्क लागू कर दिया। इन्हीं परिवर्तनों के चलते फरवरी में होने वाली मुख्य वार्ताकारों की बैठक स्थगित करनी पड़ी थी।
अप्रैल दौर के बाद अब नई दिल्ली की बारी
वार्ता अप्रैल में तब फिर पटरी पर आई, जब जैन के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 20 से 23 अप्रैल तक वाशिंगटन का दौरा किया। अब नई दिल्ली में होने वाली बैठक का उद्देश्य उन्हीं वार्ताओं को आगे बढ़ाना और यह आकलन करना है कि संशोधित टैरिफ ढाँचा प्रस्तावित समझौते को किस हद तक प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों की राय
अधिकारियों और व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि अब जब सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर समान 10 प्रतिशत टैरिफ लागू है, तो प्रस्तावित समझौते में संशोधन की आवश्यकता पड़ सकती है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच होने वाली चर्चाएँ यह तय करने में निर्णायक होंगी कि अंतरिम BTA की अंतिम रूपरेखा क्या होगी।