भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता: 23-24 जून को नई दिल्ली में यूएसटीआर प्रतिनिधिमंडल के साथ उच्चस्तरीय वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) का एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल 23 और 24 जून को नई दिल्ली पहुँचेगा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 15 जून को मासिक व्यापार आंकड़ों की ब्रीफिंग के दौरान यह जानकारी दी। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य समझौते के पहले चरण को पूरा करना और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर प्रगति सुनिश्चित करना है।
वार्ता का एजेंडा और प्रमुख बैठकें
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, यूएसटीआर प्रतिनिधिमंडल अपनी यात्रा के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा भारत के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेगा। अग्रवाल ने कहा, "हमारी उम्मीद है कि यह चर्चा समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के साथ-साथ उस व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर भी केंद्रित होगी, जिस पर दोनों देशों के बीच पहले से बातचीत चल रही है।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि वार्ता का दायरा केवल अंतरिम समझौते तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक व्यापार संबंधों की रूपरेखा तैयार करने पर भी ज़ोर दिया जाएगा।
पिछली वार्ताओं की पृष्ठभूमि
यह दौरा जून की शुरुआत में हुई बैठकों की अगली कड़ी है। 2 से 4 जून के बीच नई दिल्ली में यूएसटीआर प्रतिनिधिमंडल और भारतीय अधिकारियों के बीच व्यापक विचार-विमर्श हुआ था। उन बैठकों में वस्तुओं के व्यापार, गैर-शुल्कीय बाधाओं, सीमा शुल्क, व्यापार सुगमता, आर्थिक सुरक्षा सहयोग तथा अन्य पारस्परिक हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
गौरतलब है कि फरवरी 2025 में दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया था, जिसमें पारस्परिक और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी व्यापार के आधार पर एक अंतरिम समझौते का खाका प्रस्तुत किया गया था। उसी रूपरेखा में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई थी।
राजदूत का '99 प्रतिशत तैयार' बयान
जून की शुरुआत में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता लगभग 99 प्रतिशत तैयार हो चुका है और केवल कुछ मुद्दों का समाधान बाकी है। उन्होंने इसे दोनों देशों के लिए 'विन-विन' समझौता करार दिया था और कहा था कि दोनों पक्षों के अधिकारी इसे जल्द पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
समझौते का महत्व और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और अमेरिकी टैरिफ नीतियों के बीच भारत अपने निर्यात बाज़ारों को सुरक्षित करने की कोशिश में है। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आकार उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। 23-24 जून की वार्ता से समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में नई गति आने की उम्मीद है, जो दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को एक नई दिशा दे सकती है।