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चाबहार पोर्ट टर्मिनल सुरक्षित, अमेरिकी हवाई हमलों से कोई क्षति नहीं : विदेश मंत्रालय

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चाबहार पोर्ट टर्मिनल सुरक्षित, अमेरिकी हवाई हमलों से कोई क्षति नहीं : विदेश मंत्रालय

सारांश

अमेरिकी हवाई हमलों के बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि चाबहार पोर्ट टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन असली चुनौती अलग है — अमेरिकी प्रतिबंध छूट अप्रैल में खत्म हो चुकी है और भारत की मध्य एशिया तक पहुँच का यह 'सुनहरा द्वार' अधर में लटका है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 17 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि चाबहार पोर्ट टर्मिनल अमेरिकी हवाई हमलों में क्षतिग्रस्त नहीं हुआ।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत आगे की राह पर संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है।
चाबहार पर अमेरिकी प्रतिबंध छूट 29 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गई थी, जो अक्टूबर 2025 में छह महीने के लिए दी गई थी।
भारत-ईरान के बीच 10 साल का संचालन समझौता है; भारत ने 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर की क्रेडिट सुविधा देने का वादा किया है।
चाबहार से ज़ाहेदान तक 700 किलोमीटर रेलवे लाइन की योजना है, जो भारत को मध्य एशिया से जोड़ेगी।
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने मई में कहा था कि अमेरिकी प्रतिबंधों से विकास धीमा हुआ, पर भारत की भूमिका अहम बनी रहेगी।

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 17 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि ईरान स्थित चाबहार पोर्ट टर्मिनल — जिसे भारत ने विकसित किया है — हाल ही में अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों में पूरी तरह सुरक्षित है और उसे किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुँची है। नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में यह पुष्टि ऐसे समय में आई जब अमेरिकी रक्षा मंत्री की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने क्षेत्र में तनाव को लेकर अटकलों को हवा दे दी थी।

मुख्य घटनाक्रम

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार की ब्रीफिंग में कहा, 'चाबहार के बारे में अगर आप इस मामले को देख रहे हैं तो पहले अमेरिका की तरफ से एक छूट दी गई थी। वह कुछ समय पहले खत्म हो गई। उसके बाद से हम इस मुद्दे को आगे कैसे बढ़ाया जाए, इस पर संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहे हैं। जहाँ तक हमले की बात है, हमने भी ऐसी खबरें देखी हैं, लेकिन हम यह पुष्टि कर सकते हैं कि चाबहार का टर्मिनल किसी भी तरह से क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है।'

इससे पहले उसी दिन अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें लगातार हवाई हमलों के बीच एक टावर गिरता दिखाई दे रहा था। हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वह तस्वीर किस स्थान की है।

प्रतिबंध और कूटनीतिक पृष्ठभूमि

अक्टूबर 2025 में भारत को चाबहार पोर्ट पर लागू अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की छूट मिली थी, जो 29 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गई। जायसवाल ने संकेत दिया कि उस छूट के खत्म होने के बाद से भारत संबंधित पक्षों के साथ आगे की राह पर विचार-विमर्श कर रहा है।

गौरतलब है कि मई 2026 में नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने मीडिया से बात करते हुए चाबहार पोर्ट को भारत-ईरान सहयोग का प्रतीक बताया था। उन्होंने स्वीकार किया था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस बंदरगाह का विकास धीमा पड़ा है, लेकिन उम्मीद जताई थी कि भारत अपना काम जारी रखेगा।

अराघची ने कहा था, 'चाबहार पोर्ट भारत और ईरान के सहयोग की सबसे अहम पहचान में से एक है। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से इसकी रफ्तार कुछ धीमी हुई है, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया, कॉकेसस और फिर यूरोप तक पहुँचने का सुनहरा रास्ता बनेगा।'

रणनीतिक महत्व

भारत और ईरान ने चाबहार पोर्ट के संचालन को लेकर 10 साल का समझौता किया है। इस समझौते के तहत भारत ने ओमान की खाड़ी में स्थित इस रणनीतिक बंदरगाह के बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर की क्रेडिट सुविधा देने का वादा किया है।

इसके अलावा दोनों देशों की योजना चाबहार पोर्ट को ईरान के रेल नेटवर्क से जोड़ने की है, जिसके लिए चाबहार से ज़ाहेदान तक करीब 700 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बनाई जानी है। यह परियोजना भारत को पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए मध्य एशिया तक सीधी पहुँच देती है।

अराघची ने यह भी कहा, 'भारत की फारस की खाड़ी के उत्तर और दक्षिण दोनों तरफ के लगभग सभी देशों से अच्छी दोस्ती है। इसलिए हम इस क्षेत्र में भारत की किसी भी सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का स्वागत करते हैं।'

आगे की राह

अमेरिकी छूट की समाप्ति और ईरान पर जारी हवाई हमलों के बीच चाबहार परियोजना का भविष्य कूटनीतिक संतुलन की परीक्षा बन गया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत संबंधित पक्षों से बातचीत जारी रखे हुए है, हालाँकि किसी नई छूट या वैकल्पिक व्यवस्था की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली संकट यह है कि अप्रैल में अमेरिकी छूट खत्म होने के बाद चाबहार परियोजना कानूनी अनिश्चितता में है और भारत सार्वजनिक रूप से कोई ठोस विकल्प नहीं बता पाया है। यह वही परियोजना है जिसे भारत ने पाकिस्तान को बाईपास कर मध्य एशिया तक पहुँचने की 'रणनीतिक धुरी' बताया था — और अब वह धुरी वाशिंगटन के फैसलों पर निर्भर है। ईरान पर जारी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बीच भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की परीक्षा हो रही है; मुख्यधारा की कवरेज बंदरगाह की भौतिक सुरक्षा पर टिकी है, जबकि असली सवाल यह है कि बिना नई छूट के भारत इस निवेश को कैसे आगे बढ़ाएगा।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चाबहार पोर्ट टर्मिनल को अमेरिकी हमलों में नुकसान हुआ या नहीं?
नहीं। भारत के विदेश मंत्रालय ने 17 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि चाबहार पोर्ट टर्मिनल अमेरिकी हवाई हमलों में किसी भी तरह से क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह पुष्टि नई दिल्ली में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान की।
चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी प्रतिबंध छूट कब और क्यों खत्म हुई?
अक्टूबर 2025 में भारत को चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की छूट मिली थी, जो 29 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गई। इसके बाद से भारत संबंधित पक्षों के साथ आगे की रणनीति पर बातचीत कर रहा है।
चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
चाबहार पोर्ट भारत को पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए ईरान के रास्ते मध्य एशिया, कॉकेसस और यूरोप तक सीधी पहुँच देता है। भारत ने इसके विकास के लिए 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर की क्रेडिट सुविधा और 10 साल के संचालन समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
चाबहार से ज़ाहेदान रेलवे परियोजना क्या है?
भारत और ईरान की योजना चाबहार पोर्ट को ईरान के रेल नेटवर्क से जोड़ने की है, जिसके तहत चाबहार से ज़ाहेदान तक लगभग 700 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बनाई जानी है। यह रेल संपर्क भारत की मध्य एशिया तक पहुँच को और मजबूत करेगा।
ईरान के विदेश मंत्री ने चाबहार को लेकर क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने मई 2026 में नई दिल्ली में ब्रिक्स बैठक के बाद कहा था कि चाबहार पोर्ट भारत-ईरान सहयोग की सबसे अहम पहचान है। उन्होंने माना कि अमेरिकी प्रतिबंधों से विकास धीमा हुआ है, लेकिन उम्मीद जताई कि यह बंदरगाह मध्य एशिया तक पहुँचने का 'सुनहरा प्रवेश द्वार' बनेगा।
राष्ट्र प्रेस
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