जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दो, महिला आरक्षण परिसीमन से मत जोड़ो: AICC महासचिव गुलाम अहमद मीर
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव गुलाम अहमद मीर ने 17 जुलाई को श्रीनगर में एक विशेष बातचीत में केंद्र सरकार पर कई मोर्चों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग को दोहराया और महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की नीति को जनविरोधी करार दिया।
5 अगस्त 2019 से शुरू होती है कहानी
मीर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात को समझने के लिए 5 अगस्त 2019 के उस फैसले से शुरुआत करनी होगी जब राज्य को विशेष दर्जे से वंचित कर केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया। उन्होंने कहा, 'संसद के पास कानून बनाने का अधिकार जरूर है, लेकिन जिस क्षेत्र के लिए इतने बड़े फैसले लिए जा रहे थे, वहाँ के लोगों को विश्वास में नहीं लिया गया।' कांग्रेस ने संसद के भीतर और बाहर, तथा AICC के विभिन्न अधिवेशनों में लगातार राज्य के दर्जे की बहाली की माँग उठाई है।
वादे और वास्तविकता का फर्क
वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को बैठक के लिए बुलाया था। मीर के अनुसार, उस बैठक में अधिकांश नेताओं ने पहले राज्य का दर्जा बहाल करने और फिर चुनाव कराने की माँग रखी थी। हालाँकि प्रधानमंत्री ने तब कहा था कि क्रम यह होगा — पहले परिसीमन, फिर चुनाव, और उसके बाद राज्य का दर्जा।
मीर ने आरोप लगाया कि यदि सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश नहीं होता तो विधानसभा चुनाव भी समय पर नहीं होते। चुनाव के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सरकार में आई, लेकिन उनके अनुसार केंद्र ने राज्य के दर्जे के वादे को पूरा करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
राजनीतिक एकजुटता की ज़रूरत
मीर ने बताया कि कांग्रेस शुरू से चाहती थी कि सरकार बनते ही सभी दल मिलकर दिल्ली में केंद्र पर दबाव बनाएँ। उन्होंने कहा कि यदि यह पहल शुरुआत में हुई होती तो स्थिति शायद आज अलग होती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने सत्ता में भागीदारी का अवसर होने के बावजूद सरकार में शामिल न होकर जनता की आवाज़ उठाने का रास्ता चुना।
अब नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सभी दलों को एकजुट होने का निमंत्रण दिया है। मीर ने बताया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा और उन्हें भी यह आमंत्रण मिला है। उन्होंने संकेत दिया कि जनहित में कांग्रेस इस पहल में शामिल हो सकती है और पार्टी जल्द अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करेगी।
महिला आरक्षण: परिसीमन की शर्त पर एतराज़
मीर ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की पहल कांग्रेस और विशेष रूप से सोनिया गांधी की रही है। कांग्रेस के शासनकाल में गठबंधन की मजबूरियों के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका, लेकिन पार्टी ने भाजपा सरकार पर भी लगातार यह विधेयक लाने का दबाव बनाए रखा। जब सरकार विधेयक लेकर आई तो उसमें यह शर्त जोड़ दी गई कि पहले जनगणना, फिर परिसीमन और उसके बाद ही महिला आरक्षण लागू होगा।
मीर के अनुसार, मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर आरक्षण तत्काल लागू किया जा सकता था। भविष्य में जनगणना और परिसीमन के बाद सीटें बढ़ने पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व स्वतः बढ़ जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक बार फिर महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने का प्रयास कर रही है, जिसे देश की जनता का समर्थन नहीं है। जम्मू-कश्मीर और असम के परिसीमन अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए बिना की गई इस प्रक्रिया ने विधानसभा क्षेत्रों का संतुलन बिगाड़ा है।
वंदे मातरम, पंजाब और सांप्रदायिक राजनीति पर कांग्रेस का पक्ष
संसद में प्रस्तावित वंदे मातरम विधेयक पर मीर ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस कभी भी वंदे मातरम के विरुद्ध नहीं रही। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय गीत है और कांग्रेस के अधिवेशनों में भी इसे गाया जाता रहा है। हालाँकि, ऐतिहासिक रूप से कुछ अंशों पर मुस्लिम विद्वानों की आपत्ति रही, इसलिए इसे कभी अनिवार्य नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की भावना यही है कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान हो, लेकिन उसे जबरन गाने के लिए बाध्य न किया जाए।
पंजाब कांग्रेस की आंतरिक स्थिति पर मीर ने कहा कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र जीवित है। नेतृत्व ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया है और वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न जिम्मेदारियाँ देकर सामूहिक नेतृत्व की व्यवस्था बनाई गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के शासन में कानून-व्यवस्था, नशे और प्रशासन की स्थिति बिगड़ी है और कांग्रेस ही अगला मजबूत राजनीतिक विकल्प है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनसांख्यिकीय बदलाव वाले बयान पर मीर ने कहा कि भाजपा की राजनीति हिंदू-मुस्लिम, भारत-पाकिस्तान और मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा देश को धार्मिक आधार पर बाँटने का प्रयास कर रही है, जबकि भारत की असली पहचान उसकी विविधता, अनेक भाषाओं, विभिन्न धर्मों और सामाजिक भाईचारे में निहित है। मीर ने कहा कि आने वाले समय में सांसदों को यह तय करना होगा कि वे अपने मतदाताओं से किए वादों पर कायम रहते हैं या नहीं।