महिला आरक्षण विधेयक पर डॉली शर्मा का स्पष्ट बयान: नाटक क्यों?
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक पर डॉली शर्मा का स्पष्ट बयान
- सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
- आरक्षण लागू करने में देरी का कारण
- महिलाओं के अधिकारों के प्रति कांग्रेस का समर्थन
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस नेता डॉली शर्मा ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक एक वास्तविक मुद्दा नहीं है। विपक्ष ने 2023 में इसे एकजुट होकर पास किया था। परिसीमन के माध्यम से उत्तर और दक्षिण को जिस तरह से विभाजित किया जा रहा है और सीटों के आंकड़े बढ़ाए जा रहे हैं, यह असली विवाद है।
डॉली शर्मा ने आगे कहा कि सरकार को 543 सीटों में से महिलाओं के लिए तुरंत सीटें आरक्षित करनी चाहिए, लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है? यह दर्शाता है कि सरकार की नीयत में खोट है।
उन्होंने कहा कि सत्ता पर काबिज होने की उनकी मंशा हमेशा से रही है, चाहे वह एसआईआर के नाम पर हो या किसी अन्य चीज के नाम पर। अब महिलाओं के नाम पर क्या खेल किया जा रहा है? संसद में सरकार द्वारा एक नाटक चलाया जा रहा है। जब महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का कानून पहले से ही बना हुआ है, तो इस तरह का नाटक क्यों हो रहा है?
डॉली शर्मा ने यह भी कहा कि अगर आपको 2011 के आधार पर आरक्षण लागू करना था, तो आपने 2023 में ऐसा क्यों नहीं किया? 2023 में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने कहा था कि इसे बिना किसी शर्त के तुरंत लागू किया जाए। अगर उसी समय यह लागू हो जाता, तो 543 सीटों में से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए होतीं। कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के अधिकारों का समर्थन किया है। हमने देश को पहली महिला प्रधानमंत्री दी है और आज पंचायती राज में 15 लाख से ज्यादा महिलाएं हैं। महिला आरक्षण से हमें कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
भाजपा पर आरोप लगाते हुए डॉली शर्मा ने कहा कि वे उत्तर और दक्षिण में विभाजन करना चाहते हैं। केरल में कितनी सीटें बढ़ेंगी और उत्तर प्रदेश में कितनी? दक्षिण के अन्य राज्यों और उत्तर के पांच राज्यों के लिए सीटों की संख्या क्या होगी? सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए।