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महिला आरक्षण पर भाजपा का बदलता रुख: अकाली सांसद ने लोकसभा में उठाई आवाज

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महिला आरक्षण पर भाजपा का बदलता रुख: अकाली सांसद ने लोकसभा में उठाई आवाज

सारांश

शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने लोकसभा में भाजपा के महिला आरक्षण के नियमों में बार-बार बदलाव की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया को छिपाकर किया जा रहा है। क्या सरकार महिला आरक्षण को लेकर गंभीर है?

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक पर भाजपा का रुख बदल रहा है।
हरसिमरत कौर बादल ने लोकसभा में अपनी बात रखी।
सरकार को लिखित आश्वासन देना चाहिए।
पंजाब के किसान आम आदमी पार्टी और केंद्र की नीतियों से परेशान हैं।
महिलाओं के अधिकारों के लिए एक पारदर्शी कानून की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शिरोमणि अकाली दल की सांसद और बठिंडा की नेता हरसिमरत कौर बादल ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि भाजपा बार-बार महिला आरक्षण के नियमों में बदलाव कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि परिसीमन की प्रक्रिया को महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर छिपाकर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एसएडी ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन असंवैधानिक परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन नहीं कर सकता।

हरसिमरत बादल ने कहा, "संविधान स्पष्ट करता है कि परिसीमन केवल जनगणना के बाद किया जा सकता है। परिसीमन इस तरह होना चाहिए कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।"

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा समानुपातिक प्रतिनिधित्व को लेकर दिए गए मौखिक आश्वासन पर हरसिमरत बादल ने कहा, "सरकार को लिखित आश्वासन देना चाहिए। हम सभी जानते हैं कि 1986 में पंजाब को चंडीगढ़ सौंपने, ‘बंदी सिंह’ को रिहा करने और हाल में पंजाब वेयरहाउसिंग अधिकारी गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या की सीबीआई जांच के मौखिक आश्वासनों का क्या हुआ?"

हरसिमरत बादल ने बताया कि केंद्र सरकार ने सितंबर 2023 में सत्र बुलाया था, लेकिन 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू नहीं किया। यह कार्य जनगणना और परिसीमन के बाद भी किया जा सकता था। अब बिना जनगणना के संशोधित विधेयक लाया गया।

उन्होंने कहा कि देश देख रहा है कि कैसे बहुमत के बल पर इस विधेयक को संसद में आगे बढ़ाया गया। पिछले तीन वर्षों में सरकार जनगणना करा सकती थी, लेकिन नहीं कराई। उन्होंने सरकार से कहा कि विधेयक में अपने उद्देश्य स्पष्ट रूप से बताएं, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि लोकसभा सीटें किस आधार पर बढ़ाई जा रही हैं।

सांसद ने कहा कि महिलाओं को केवल चुनाव से पहले याद किया जाता है और ‘नारी शक्ति’ के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने के लिए एक पारदर्शी कानून बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2014 और 2019 के भाजपा चुनाव घोषणापत्र का हिस्सा था, लेकिन 2024 के चुनाव से ठीक पहले तक इसे लागू नहीं किया गया, जिसका उद्देश्य केवल महिला मतदाताओं को आकर्षित करना था।

मीडिया से बातचीत में हरसिमरत बादल ने कहा कि पंजाब के किसान केंद्र और राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार की गलत नीतियों के कारण परेशान हैं। केंद्र ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आप सरकार ने सभी फसलों पर एमएसपी देने का वादा किया था, लेकिन वह पिछले 15 दिनों से मंडियों में आ रही गेहूं की खरीद भी ठीक से नहीं कर पा रही है।

सांसद ने कहा कि आप सरकार ने पिछले साल बाढ़ से फसल को हुए भारी नुकसान और तीन हफ्ते पहले बारिश व ओलावृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा देने का भी वादा किया था, लेकिन दोनों ही मामलों में वह असफल रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हो सके।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है।
भाजपा महिला आरक्षण पर क्या कहती है?
भाजपा का कहना है कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन विधेयक के कार्यान्वयन में परिवर्तन कर रहे हैं।
हरसिमरत कौर बादल का क्या कहना है?
हरसिमरत कौर बादल का कहना है कि भाजपा परिसीमन की प्रक्रिया को महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर छिपा रही है।
केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण पर क्या कदम उठाए हैं?
केंद्र सरकार ने अभी तक महिला आरक्षण को लागू नहीं किया है, जबकि यह 2014 और 2019 के चुनाव घोषणापत्र का हिस्सा था।
पंजाब के किसानों की स्थिति क्या है?
पंजाब के किसान केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से परेशान हैं और उनकी आय दोगुनी करने का वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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