जयशंकर-अराघची वार्ता: ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाजों की सुरक्षा का दिया भरोसा

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जयशंकर-अराघची वार्ता: ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाजों की सुरक्षा का दिया भरोसा

सारांश

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने नई दिल्ली में जयशंकर से मुलाकात के बाद होर्मुज स्ट्रेट को भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित रखने का भरोसा दिया — और चाबहार बंदरगाह को भारत की मध्य एशिया तक पहुँच का 'सुनहरा द्वार' बताया। यह वार्ता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा और व्यापार सुरक्षा के लिए अहम है।

मुख्य बातें

15 मई को नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस.
जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई।
अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट को सामान्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला रखने और भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने का आश्वासन दिया।
ईरान ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ संघर्ष में शामिल देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं होगी।
चाबहार बंदरगाह को भारत-ईरान सहयोग का प्रतीक बताया गया; अमेरिकी प्रतिबंधों से परियोजना की गति धीमी होने की बात स्वीकार की गई।
अराघची ने चाबहार को भारत के लिए मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप तक पहुँच का 'सुनहरा द्वार' बताया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच 15 मई को नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता को अराघची ने 'सार्थक' करार दिया। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और चाबहार बंदरगाह के भविष्य पर विस्तृत चर्चा हुई। अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान सभी मित्र राष्ट्रों के लिए एक भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार बना रहेगा।

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का स्पष्ट रुख

अराघची ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'ईरान होर्मुज में सुरक्षा के रक्षक के तौर पर अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी हमेशा निभाएगा। ईरान सभी मित्र राष्ट्रों का एक भरोसेमंद साझेदार है, जो अपने व्यापार की सुरक्षा के लिए उस पर भरोसा कर सकते हैं।' गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से विश्व के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिससे यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।

अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट सामान्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला रहेगा। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि जो देश ईरान के साथ सक्रिय संघर्ष में हैं, उनके जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

भारतीय जहाजों के लिए विशेष सहायता का आश्वासन

ईरानी विदेश मंत्री ने बताया कि इस क्षेत्र में कुछ बारूदी सुरंगें और रुकावटें मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जो जहाज वहाँ से गुजरना चाहते हैं, उन्हें ईरानी सेना से संपर्क करना होगा, जो उन्हें सुरक्षित रास्ता दिखाएगी। अराघची के अनुसार, ईरान पहले भी कई भारतीय जहाजों को इसी तरह सुरक्षित मार्ग प्रदान कर चुका है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव का माहौल बना हुआ है।

भारत-ईरान संबंध और फारस की खाड़ी

अराघची ने जोर देकर कहा कि तेहरान भारत के साथ अपने संबंधों को अत्यधिक महत्व देता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों की फारस की खाड़ी से जुड़े मुद्दों पर समान चिंताएँ और हित हैं। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों की निरंतरता को लेकर सतर्क है।

चाबहार बंदरगाह: 'सुनहरे द्वार' की उम्मीद

अराघची ने चाबहार बंदरगाह को भारत-ईरान सहयोग का प्रतीक बताया और इसके विकास में भारत की भूमिका की सराहना की। उन्होंने माना कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस परियोजना की गति कुछ धीमी पड़ी है। हालाँकि, अराघची ने विश्वास जताया कि चाबहार भविष्य में भारत के लिए मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप तक पहुँच का 'सुनहरा द्वार' साबित होगा। साथ ही यह बंदरगाह यूरोप और मध्य एशिया के लिए हिंद महासागर तक पहुँचने का मार्ग भी बनेगा।

आगे क्या

इस उच्चस्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की उम्मीद है। चाबहार बंदरगाह से जुड़े प्रतिबंधों का मुद्दा आने वाले समय में भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं में बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों भारत को ईरान के करीब रखने की रणनीति के हिस्से हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के साये में चाबहार की वास्तविक क्षमता कब साकार होगी — यह वादा वर्षों से दोहराया जा रहा है। होर्मुज पर ईरान की शर्त — कि संघर्षरत देशों के जहाजों को रोका जाएगा — एक सूक्ष्म चेतावनी भी है, जो भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति को परखती है। भारत के लिए ईरान से संतुलन बनाए रखना और पश्चिमी साझेदारों को नाराज न करना — यही असली कूटनीतिक कसौटी है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और अराघची की वार्ता में क्या हुआ?
15 मई को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और चाबहार बंदरगाह के विकास पर चर्चा हुई। अराघची ने वार्ता को 'सार्थक' बताया और भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का क्या रुख है?
ईरान ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट सामान्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला रहेगा और भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया जाएगा। हालाँकि, जो देश ईरान के साथ संघर्ष में हैं, उनके जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं होगी।
चाबहार बंदरगाह परियोजना की मौजूदा स्थिति क्या है?
अराघची ने माना कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण चाबहार परियोजना की गति धीमी पड़ी है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह बंदरगाह भविष्य में भारत के लिए मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप तक पहुँच का 'सुनहरा द्वार' बनेगा।
होर्मुज स्ट्रेट भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज स्ट्रेट से भारत का एक बड़ा हिस्सा तेल आयात होता है और यह प्रमुख व्यापारिक मार्ग भी है। इस जलमार्ग में किसी भी तरह की रुकावट भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात-निर्यात को सीधे प्रभावित कर सकती है।
ईरान के जहाजों के लिए क्या निर्देश दिए गए हैं?
अराघची ने कहा कि होर्मुज क्षेत्र में कुछ बारूदी सुरंगें और रुकावटें हैं, इसलिए वहाँ से गुजरने वाले जहाजों को ईरानी सेना से संपर्क करना होगा। ईरान उन्हें सुरक्षित रास्ता दिखाएगा, जैसा कि वह पहले भी कई भारतीय जहाजों के लिए कर चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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