होर्मुज स्ट्रेट सभी देशों के लिए खुला, संघर्षरत देशों को नहीं: ईरानी विदेश मंत्री अराघची का नई दिल्ली में ऐलान

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होर्मुज स्ट्रेट सभी देशों के लिए खुला, संघर्षरत देशों को नहीं: ईरानी विदेश मंत्री अराघची का नई दिल्ली में ऐलान

सारांश

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने नई दिल्ली में साफ कर दिया — होर्मुज स्ट्रेट खुला है, बशर्ते आप ईरान के दुश्मन न हों। दुनिया के 20% तेल की नब्ज़ थामे इस जलमार्ग पर यह बयान वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों और कूटनीति दोनों के लिए अहम संकेत है।

मुख्य बातें

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 15 मई को नई दिल्ली में घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला है।
ईरान के साथ सक्रिय संघर्ष में शामिल देशों के जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं होगी।
जहाजों को सुरक्षित मार्ग के लिए ईरानी सेना से पहले संपर्क करना होगा; बारूदी सुरंगों और रुकावटों का हवाला दिया गया।
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति गुजरती है।
अराघची ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताया और 2015 के JCPOA समझौते का हवाला दिया।
ईरान ने ओमान के साथ मिलकर सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था करने की बात कही।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार, 15 मई को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट सामान्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला है — लेकिन उन देशों के जहाजों को इसमें प्रवेश की अनुमति नहीं होगी जो ईरान के साथ सक्रिय संघर्ष में हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह रणनीतिक जलमार्ग वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज़ से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।

मुख्य घोषणा: किन जहाजों को मिलेगी अनुमति

अराघची ने अपने शब्दों में कहा, 'होर्मुज स्ट्रेट के बारे में हमारी भी यही इच्छा है कि यह पूरी तरह खुला रहे। हमारी तरफ से यह खुला है और सभी जहाज यहाँ से गुजर सकते हैं, सिर्फ उन देशों के जहाजों को छोड़कर जो हमारे खिलाफ युद्ध में शामिल हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो जहाज इस मार्ग से गुजरना चाहते हैं, उन्हें ईरानी सेना से पहले संपर्क करना होगा, क्योंकि जलमार्ग में कुछ बारूदी सुरंगें और रुकावटें मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि ईरान पहले ही कई भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दे चुका है और यही नीति आगे भी जारी रहेगी। 'सभी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही हमारी नीति और हमारे हित में है,' उन्होंने दोहराया।

कूटनीतिक पृष्ठभूमि: ट्रंप-शी बैठक के बाद आया बयान

अराघची का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बीजिंग में हुई बैठक के संदर्भ में आए सवालों के जवाब में था। उस बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने की ज़रूरत पर चर्चा हुई थी। गौरतलब है कि यह ईरान की तरफ से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बाद की पहली बड़ी कूटनीतिक पहल मानी जा रही है।

अराघची बुधवार, 13 मई को तीन दिन के आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुँचे थे। यह दौरा भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का रुख

परमाणु मुद्दे पर अराघची ने दोहराया कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता और 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) पर हस्ताक्षर करके तेहरान यह पहले ही साबित कर चुका है। उन्होंने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वह इसे विश्वसनीय बनाने के लिए हमेशा तैयार रहा है। 'यह हमारी नीति नहीं है कि हम परमाणु हथियार बनाएँ,' उन्होंने स्पष्ट किया।

अमेरिकी नीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया

अराघची ने कहा कि ईरान इस समय अमेरिका की वजह से एक प्रकार की आर्थिक नाकेबंदी झेल रहा है और क्षेत्र में मौजूदा अस्थिरता के लिए अमेरिकी आक्रामक नीतियाँ ज़िम्मेदार हैं। उनके अनुसार, जैसे ही यह आक्रामकता समाप्त होगी, हालात सामान्य हो जाएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ओमान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट से सभी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की व्यवस्था करेगा।

वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को हिला दिया है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति का परिवहन करता है। ईरान द्वारा इस जलमार्ग को प्रभावी रूप से बाधित किए जाने की आशंकाओं के बाद तेल और गैस की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई है। अराघची के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग समुदाय और ऊर्जा आयातक देशों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता की दिशा और होर्मुज स्ट्रेट पर व्यावहारिक व्यवस्था की रूपरेखा तय होना इस संकट के समाधान की कुंजी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और 'संघर्षरत देशों को नहीं' जोड़कर अमेरिका पर दबाव बनाए रखा। असली सवाल यह है कि 'संघर्षरत देश' की परिभाषा कौन तय करेगा — ईरान खुद, और यही इस घोषणा की सबसे बड़ी अस्पष्टता है। भारत के लिए यह दौरा महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय जहाजों को पहले ही सुरक्षित रास्ता मिलने की बात कही गई, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर भारत के लिए राहत की खबर है। लेकिन जब तक ईरान-अमेरिका तनाव का कोई ठोस कूटनीतिक हल नहीं निकलता, होर्मुज पर अनिश्चितता वैश्विक तेल कीमतों को अस्थिर रखेगी।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का ताज़ा रुख क्या है?
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 15 मई को नई दिल्ली में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट सभी सामान्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला है। केवल उन देशों के जहाजों को प्रवेश नहीं मिलेगा जो ईरान के साथ सक्रिय संघर्ष में हैं।
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक रणनीतिक समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति गुजरती है। इस जलमार्ग में किसी भी बाधा का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर पड़ता है।
क्या भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति है?
हाँ, अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान पहले ही कई भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दे चुका है और यह नीति जारी रहेगी। जहाजों को सुरक्षित मार्ग के लिए ईरानी सेना से पहले संपर्क करना होगा क्योंकि जलमार्ग में बारूदी सुरंगें और रुकावटें मौजूद हैं।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अराघची ने क्या कहा?
अराघची ने दोहराया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और तेहरान परमाणु हथियार नहीं चाहता। उन्होंने 2015 के JCPOA परमाणु समझौते का हवाला देते हुए कहा कि ईरान ने यह पहले ही साबित कर दिया है।
अराघची का नई दिल्ली दौरा कूटनीतिक रूप से क्यों अहम है?
यह दौरा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बाद ईरान की पहली बड़ी कूटनीतिक पहल मानी जा रही है। अराघची 13 मई को तीन दिन के आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुँचे थे, और यह यात्रा भारत-ईरान संबंधों तथा क्षेत्रीय स्थिरता के नज़रिए से महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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