उत्तर प्रदेश: 18 मंडलों में 31 मई तक बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के निर्देश, 4,000 किमी तटबंध सुरक्षित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उत्तर प्रदेश: 18 मंडलों में 31 मई तक बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के निर्देश, 4,000 किमी तटबंध सुरक्षित

सारांश

मानसून से पहले उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने युद्धस्तरीय तैयारी शुरू की — 18 मंडलों में 31 मई तक बाढ़ नियंत्रण कक्ष, 4,000 किमी तटबंध सुरक्षित और 300 कटाव-रोधी परियोजनाएँ। 15 जून से 15 अक्टूबर तक 24 घंटे रियल-टाइम निगरानी होगी।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों में 31 मई 2026 तक एकीकृत बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के निर्देश जारी।
कक्ष 1 जून से संचालित होंगे और 15 जून से 15 अक्टूबर तक 24 घंटे सक्रिय रहेंगे।
अब तक लगभग 4,000 किलोमीटर लंबाई के तटबंध सुरक्षित किए जा चुके हैं।
नदी किनारों पर 300 कटाव-रोधी परियोजनाएँ चल रही हैं, जिन्हें 15 जून तक पूरा करने का लक्ष्य है।
मार्च 2026 तक 16,000 किलोमीटर से अधिक नालों की सिल्ट सफाई पूरी हो चुकी है।
ग्रामीण इलाकों में 'बाढ़ सुरक्षा समितियाँ' गठित की जा रही हैं, जिनमें जूनियर इंजीनियर, ग्राम प्रधान और लेखपाल शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने 15 मई 2026 को प्रदेश के सभी 18 मंडलों में 31 मई तक एकीकृत बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि 1 जून से इन्हें पूरी तरह संचालित किया जा सके। लखनऊ मुख्यालय से जारी इस आदेश के तहत मानसून से पहले तटबंधों की सुरक्षा, नालों की सफाई और बाढ़ सुरक्षा समितियों के गठन समेत व्यापक तैयारियाँ युद्ध स्तर पर चल रही हैं।

मुख्य घटनाक्रम

विभाग के अनुसार इस वर्ष रिकॉर्ड गति से कार्य करते हुए अब तक लगभग 4,000 किलोमीटर लंबाई के तटबंधों को सुरक्षित किया जा चुका है। नदियों-नालों के किनारे बसे गाँवों और कृषि भूमि को कटान से बचाने के लिए 300 परियोजनाओं पर काम जारी है, जिन्हें 15 जून तक पूरा करने का लक्ष्य है। संवेदनशील और अति-संवेदनशील स्थानों पर नदी किनारों पर पत्थर की पिचिंग और जियो-बैग्स का उपयोग कर सुरक्षा घेरा और मज़बूत किया जा रहा है।

ड्रेनेज और नाला सफाई की स्थिति

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए ड्रेनेज सिस्टम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग के मुताबिक मार्च 2026 तक 16,000 किलोमीटर से अधिक लंबाई में नालों की सिल्ट सफाई का कार्य पूरा हो चुका है। बारिश शुरू होने से पहले शेष संवेदनशील स्थानों पर भी सफाई का काम पूरा कर लिया जाएगा, जिससे भारी वर्षा के दौरान पानी की निर्बाध निकासी सुनिश्चित हो सके और फसलें व बस्तियाँ जलमग्न होने से बच सकें।

बाढ़ नियंत्रण कक्ष: 24 घंटे निगरानी

लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज समेत प्रदेश के सभी 18 मंडलों में स्थापित होने वाले ये एकीकृत बाढ़ नियंत्रण कक्ष 15 जून से 15 अक्टूबर तक 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। इनके माध्यम से जलस्तर की रियल-टाइम निगरानी और आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। स्थापना प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

बाढ़ सुरक्षा समितियाँ: सामुदायिक भागीदारी

सामाजिक स्तर पर भी विभाग अपनी तैयारियाँ पुख्ता कर रहा है। विभिन्न ग्रामीण इलाकों में 'बाढ़ सुरक्षा समितियाँ' गठित की जा रही हैं, जिनमें संबंधित क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर, ग्राम प्रधान, लेखपाल और अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जा रहा है। इन समितियों की जिम्मेदारी बाढ़ और आपदा की स्थिति में तत्काल सूचना पहुँचाने और राहत कार्यों में सहयोग देने की होगी।

आगे क्या

विभाग का लक्ष्य है कि मानसून की पहली दस्तक से पहले सभी तैयारियाँ पूरी हो जाएँ। 300 कटाव-रोधी परियोजनाओं की समयसीमा 15 जून तय की गई है, जबकि बाढ़ नियंत्रण कक्ष 15 अक्टूबर तक सक्रिय रहेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले वर्षों में उत्तर प्रदेश के तराई और पूर्वांचल क्षेत्रों में बाढ़ से व्यापक कृषि और संपत्ति नुकसान हुआ था।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 किमी तटबंध, 16,000 किमी नाला सफाई, 300 परियोजनाएँ — लेकिन असली परीक्षा मैदान में होगी। पिछले कई वर्षों में यूपी के तराई और पूर्वांचल जिलों में बाढ़ पूर्व-तैयारी के दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई सार्वजनिक रूप से उजागर हो चुकी है। बाढ़ सुरक्षा समितियों में स्थानीय भागीदारी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह तब तक अधूरा है जब तक इन समितियों को संसाधन, प्रशिक्षण और स्पष्ट जवाबदेही तंत्र न मिले। रियल-टाइम जलस्तर निगरानी की बात तो हर साल होती है — इस बार देखना होगा कि डेटा समय पर प्रशासन तक पहुँचता है या नहीं।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण कक्ष कब तक स्थापित होंगे और कब से चालू होंगे?
प्रदेश के सभी 18 मंडलों में 31 मई 2026 तक एकीकृत बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। ये कक्ष 1 जून से संचालित होंगे और 15 जून से 15 अक्टूबर तक 24 घंटे सक्रिय रहेंगे।
यूपी में कितने किलोमीटर तटबंध सुरक्षित किए गए हैं?
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अनुसार अब तक लगभग 4,000 किलोमीटर लंबाई के तटबंध सुरक्षित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 300 कटाव-रोधी परियोजनाएँ 15 जून तक पूरी की जाएँगी।
बाढ़ सुरक्षा समितियाँ क्या हैं और इनमें कौन शामिल होगा?
ये समितियाँ ग्रामीण स्तर पर बाढ़ और आपदा की स्थिति में तत्काल सूचना और राहत कार्य के लिए गठित की जा रही हैं। इनमें जूनियर इंजीनियर, ग्राम प्रधान, लेखपाल और अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जा रहा है।
नाला सफाई का काम कहाँ तक पहुँचा है?
मार्च 2026 तक 16,000 किलोमीटर से अधिक लंबाई में नालों की सिल्ट सफाई पूरी हो चुकी है। बारिश शुरू होने से पहले शेष संवेदनशील स्थानों पर भी सफाई का काम पूरा करने का लक्ष्य है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष किन शहरों में स्थापित होंगे?
लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज समेत उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडल मुख्यालयों में ये कक्ष स्थापित किए जाएँगे। जलस्तर की रियल-टाइम निगरानी और आपदा में त्वरित कार्रवाई इनका मुख्य उद्देश्य है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले