26 जून 2026
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CM योगी आदित्यनाथ ने भीषण गर्मी और कम वर्षा की आशंका पर दिए सख्त निर्देश, 18 जनपदों पर विशेष नज़र

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CM योगी आदित्यनाथ ने भीषण गर्मी और कम वर्षा की आशंका पर दिए सख्त निर्देश, 18 जनपदों पर विशेष नज़र

सारांश

भीषण गर्मी और सामान्य से कम वर्षा की आशंका के बीच CM योगी ने उत्तर प्रदेश के 18 सूखा प्रभावित जनपदों पर विशेष नज़र रखने, 30 मई तक डी-सिल्टिंग पूरी कराने और 19 हज़ार से अधिक आपदा मित्रों को तैयार रखने के निर्देश दिए — यह एक बहु-विभागीय आपदा-पूर्व तैयारी की व्यापक कवायद है।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने 1 मई 2026 को भीषण गर्मी और कम वर्षा की आशंका पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
पूर्व में सूखा प्रभावित 18 जनपदों में 15 जून से 30 जुलाई के बीच विशेष निगरानी और समयबद्ध आकलन के निर्देश।
30 मई तक नहरों, तालाबों एवं पोखरों की डी-सिल्टिंग पूर्ण कराने का आदेश; निकली मिट्टी कुम्हार शिल्पकारों को निःशुल्क दी जाएगी।
19 हज़ार से अधिक प्रशिक्षित आपदा मित्रों, होमगार्ड्स एवं सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों को तैयार रखने के निर्देश।
हाल के आंधी-तूफान में जनहानि पर दुःख जताते हुए भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने के एहतियाती कदम उठाने को कहा।
फार्मर रजिस्ट्री व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू करने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 मई 2026 को लखनऊ में भीषण गर्मी और इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की आशंका को देखते हुए शासन-प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेयजल आपूर्ति, सिंचाई व्यवस्था और राहत प्रबंधन में किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी।

उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में क्या हुआ

शुक्रवार को कृषि, जलशक्ति, पशुधन, समाज कल्याण एवं उद्यान विभाग के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने पूर्व में सूखा प्रभावित रहे 18 जनपदों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने 15 जून से 30 जुलाई के बीच निर्धारित मानकों के अनुसार स्थिति का समयबद्ध आकलन करने तथा आवश्यकता पड़ने पर एनडीआरएफ (NDRF) से सहायता सुनिश्चित कराने के भी निर्देश दिए। शासन से लेकर जनपद स्तर तक कंट्रोल रूम सक्रिय रखने और आवश्यक जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव एवं डीजीपी को उपलब्ध कराने को कहा गया।

जल संरक्षण और पेयजल प्रबंधन पर ज़ोर

मुख्यमंत्री ने संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर मॉनिटरिंग करने और जल संरक्षण को गति देने के लिए 30 मई तक नहरों, तालाबों एवं पोखरों की डी-सिल्टिंग पूर्ण कराने के निर्देश दिए। तालाबों से निकली मिट्टी प्रजापति समाज एवं पारंपरिक कुम्हार शिल्पकारों को निःशुल्क उपलब्ध कराने तथा जिलाधिकारियों द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि राहत कार्यों के साथ-साथ आजीविका के अवसर भी सृजित हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में कहीं भी पेयजल की कमी नहीं होनी चाहिए और पाइप्ड पेयजल योजनाओं के साथ टैंकर जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार रखी जाएं।

किसानों और पशुधन की सुरक्षा

किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योगी ने वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने, सभी नलकूपों को क्रियाशील रखने, समय से मरम्मत सुनिश्चित करने तथा सिंचाई हेतु निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल देते हुए नुकसान की स्थिति में समयबद्ध आकलन एवं क्लेम निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। वन विभाग को अभ्यारण्यों एवं पक्षी विहारों में वन्यजीवों के लिए पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों में जल, चारा एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य सुरक्षा और आपदा प्रबंधन

स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से मुख्यमंत्री ने हीट स्ट्रोक, लू एवं गर्मी जनित बीमारियों से निपटने के लिए अस्पतालों में समुचित व्यवस्थाएं सुदृढ़ रखने तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। 19 हज़ार से अधिक प्रशिक्षित आपदा मित्रों, होमगार्ड्स एवं सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों की सेवाएं आवश्यकतानुसार लेने के निर्देश दिए गए। हाल के आंधी-तूफान में हुई जनहानि पर दुःख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए।

खरीफ फसल और प्राकृतिक खेती की तैयारी

खरीफ फसल वर्ष 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने नहर प्रणालियों के प्रभावी संचालन, टेल फीडिंग के माध्यम से अंतिम छोर तक सिंचाई सुविधा सुनिश्चित करने तथा जल संसाधनों के समुचित उपयोग पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि नहरों का संचालन केवल हेड रीच तक सीमित न रहे, बल्कि टेल एंड तक समान रूप से पानी पहुंचे। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इससे लागत में कमी के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता एवं जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। खाद वितरण में पारदर्शिता हेतु फार्मर रजिस्ट्री व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश भी दिए गए।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जनपद स्तर पर पेयजल संकट और फसल बीमा क्लेम में देरी की शिकायतें आती रहती हैं। 18 सूखा प्रभावित जनपदों पर विशेष ध्यान और टेल फीडिंग अभियान की जवाबदेही तय करना सकारात्मक संकेत है, लेकिन फील्ड स्तर पर पेट्रोलिंग और नलकूप मरम्मत की समयसीमा का पालन सुनिश्चित हुआ तो ही यह निर्देश अर्थपूर्ण सिद्ध होंगे।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM योगी ने किन 18 जनपदों में विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं?
ये वे जनपद हैं जो पूर्व में सूखा प्रभावित रहे हैं। इनमें 15 जून से 30 जुलाई के बीच निर्धारित मानकों के अनुसार समयबद्ध आकलन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर NDRF से सहायता सुनिश्चित की जाएगी।
डी-सिल्टिंग की समयसीमा क्या है और इससे किसे फायदा होगा?
30 मई 2026 तक नहरों, तालाबों एवं पोखरों की डी-सिल्टिंग पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं। तालाबों से निकली मिट्टी प्रजापति समाज एवं पारंपरिक कुम्हार शिल्पकारों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनकी आजीविका को भी सहारा मिलेगा।
उत्तर प्रदेश में पेयजल संकट से निपटने की क्या तैयारी है?
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि पाइप्ड पेयजल योजनाओं के साथ-साथ टैंकर जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार रखी जाएं। वन विभाग को अभ्यारण्यों और पक्षी विहारों में वन्यजीवों के लिए भी पेयजल सुनिश्चित करने को कहा गया है।
किसानों के लिए क्या विशेष प्रावधान किए गए हैं?
किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को समय पर ऋण, फसल बीमा क्लेम का समयबद्ध निस्तारण, अनुदानित बीज वितरण और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। फार्मर रजिस्ट्री व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने को भी कहा गया है।
आंधी-तूफान में हुई जनहानि पर सरकार ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल के आंधी-तूफान में हुई जनहानि पर दुःख व्यक्त किया और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए। 19 हज़ार से अधिक प्रशिक्षित आपदा मित्रों को तैयार रखने को भी कहा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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