मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे मिसिंग लिंक टनल को गिनीज विश्व रिकॉर्ड, ₹6,695 करोड़ की परियोजना में 182 मीटर ऊंचा केबल पुल

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मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे मिसिंग लिंक टनल को गिनीज विश्व रिकॉर्ड, ₹6,695 करोड़ की परियोजना में 182 मीटर ऊंचा केबल पुल

सारांश

मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे का मिसिंग लिंक टनल प्रोजेक्ट अब गिनीज विश्व रिकॉर्ड में है — ₹6,695 करोड़ की यह परियोजना जीरो फैटिलिटी कॉरिडोर, 182 मीटर ऊंचे केबल पुल और 8.87 किमी लंबी सुरंग के साथ भारतीय बुनियादी ढाँचे में नया अध्याय लिखती है।

Key Takeaways

मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे मिसिंग लिंक टनल प्रोजेक्ट को गिनीज विश्व रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। परियोजना की कुल लागत ₹6,695 करोड़ से अधिक ; मार्ग खोपोली निकास से लोनावला तक। यात्रा समय में लगभग 30 मिनट की कमी और रोज़ाना ₹9 करोड़ ईंधन बचत का अनुमान। टाइगर घाटी में देश का सबसे ऊंचा केबल आधारित पुल — ऊंचाई लगभग 182 मीटर । प्रमुख सुरंग 8.87 किलोमीटर लंबी; जीरो फैटिलिटी कॉरिडोर के रूप में विकसित। नए मार्ग से पुराने रास्ते की तुलना में दूरी में लगभग 6 किलोमीटर की कमी।

मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे का मिसिंग लिंक टनल प्रोजेक्ट अब गिनीज विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है, जो इसे भारत की सबसे आधुनिक और सुरक्षित सड़क परियोजनाओं में विशिष्ट स्थान दिलाता है। 1 मई को यह जानकारी सामने आई। खोपोली निकास से लोनावला तक फैले इस मार्ग की कुल लागत ₹6,695 करोड़ से अधिक है और इसे जीरो फैटिलिटी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ

इस परियोजना में वाहनों को अधिकतम 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सुरक्षित रूप से चलाने की सुविधा दी गई है। मार्ग में एक 8.87 किलोमीटर लंबी प्रमुख सुरंग और एक 1.68 किलोमीटर की अन्य सुरंग शामिल है। हर कुछ सौ मीटर पर आपातकालीन निकास बनाए गए हैं ताकि किसी भी स्थिति में सुरक्षित बाहर निकला जा सके।

गौरतलब है कि टाइगर घाटी क्षेत्र में देश का सबसे ऊंचा केबल आधारित पुल भी इसी परियोजना के तहत बनाया गया है, जिसकी ऊंचाई लगभग 182 मीटर है। इसके अलावा खालापुर–खोपोली खंड को आठ लेन तक विस्तारित किया गया है।

यात्रियों को होने वाले फायदे

इस नए मार्ग के चालू होने से यात्रा का समय लगभग 30 मिनट तक कम होने का अनुमान है। साथ ही, रोज़ाना लगभग ₹9 करोड़ मूल्य के ईंधन की बचत होने का भी अनुमान लगाया गया है। पुराने घाट वाले रास्ते की तुलना में नए मार्ग से दूरी में लगभग 6 किलोमीटर की कमी आई है — पहले यह रास्ता लगभग 19 किलोमीटर का था।

सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्था

परियोजना में आधुनिक वायु गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था स्थापित की गई है, जिसमें मदद बुलाने की व्यवस्था और सार्वजनिक घोषणा प्रणाली शामिल हैं। सुरंगों में आग से सुरक्षा के लिए उन्नत प्रणाली और हवा के प्रवाह को नियंत्रित करने की विशेष व्यवस्था भी की गई है। यातायात की निगरानी के लिए स्मार्ट ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है, जो पूरे मार्ग पर लगातार नज़र रखता है।

क्यों है यह ऐतिहासिक

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने बुनियादी ढाँचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में तेज़ी से काम कर रहा है। जीरो फैटिलिटी कॉरिडोर की अवधारणा भारतीय सड़क परियोजनाओं में अपेक्षाकृत नई है और यह परियोजना इस मानक पर खरी उतरने का दावा करती है। गिनीज विश्व रिकॉर्ड में दर्ज होना इस परियोजना की तकनीकी उत्कृष्टता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देता है। आने वाले समय में यह मार्ग मुंबई और पुणे के बीच आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों को और तेज़ करने में सहायक भूमिका निभाएगा।

Point of View

लेकिन असली कसौटी परिचालन के बाद की सुरक्षा रिपोर्ट होगी। भारत में 'जीरो फैटिलिटी कॉरिडोर' की अवधारणा नई है और इसे लागू करने का दावा तभी सार्थक होगा जब दुर्घटना के आँकड़े वास्तव में शून्य के करीब रहें। ₹6,695 करोड़ की यह लागत प्रति किलोमीटर के हिसाब से भारी है, और करदाताओं के लिए यह जानना ज़रूरी है कि ईंधन बचत और समय की बचत के अनुमान किस पद्धति पर आधारित हैं। रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज होना शुरुआत है — परियोजना की विरासत इस बात से तय होगी कि यह मार्ग अगले दशक में कितना सुरक्षित और सुचारू रहता है।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे मिसिंग लिंक टनल प्रोजेक्ट क्या है?
यह खोपोली निकास से लोनावला तक फैली एक सड़क परियोजना है जिसमें 8.87 किलोमीटर और 1.68 किलोमीटर की दो प्रमुख सुरंगें और देश का सबसे ऊंचा 182 मीटर का केबल पुल शामिल है। इसकी कुल लागत ₹6,695 करोड़ से अधिक है और इसे जीरो फैटिलिटी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है।
इस परियोजना को गिनीज विश्व रिकॉर्ड क्यों मिला?
परियोजना की तकनीकी विशेषताओं — जिनमें सुरंग की लंबाई, सुरक्षा प्रणाली और जीरो फैटिलिटी कॉरिडोर की अवधारणा शामिल हैं — के आधार पर इसे गिनीज विश्व रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। यह भारत की सड़क परियोजनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाता है।
इस परियोजना से यात्रियों को क्या फायदा होगा?
इस मार्ग से मुंबई और पुणे के बीच यात्रा का समय लगभग 30 मिनट कम होगा और दूरी में लगभग 6 किलोमीटर की कमी आएगी। रोज़ाना लगभग ₹9 करोड़ मूल्य के ईंधन की बचत होने का अनुमान भी है।
टाइगर घाटी केबल पुल क्या है और यह क्यों खास है?
टाइगर घाटी में बना यह केबल आधारित पुल लगभग 182 मीटर ऊंचा है और इसे देश का सबसे ऊंचा केबल पुल बताया जा रहा है। यह मिसिंग लिंक परियोजना का हिस्सा है और इंजीनियरिंग की दृष्टि से एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।
जीरो फैटिलिटी कॉरिडोर का क्या अर्थ है?
जीरो फैटिलिटी कॉरिडोर यानी शून्य घातकता गलियारा — ऐसा मार्ग जिसे इस प्रकार डिज़ाइन किया गया हो कि दुर्घटनाओं में मृत्यु की संभावना न्यूनतम हो। इसमें आपातकालीन निकास, उन्नत अग्नि सुरक्षा, वायु गुणवत्ता नियंत्रण और स्मार्ट ट्रैफिक निगरानी जैसी व्यवस्थाएँ शामिल हैं।
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