राज ठाकरे का महाराष्ट्र सरकार पर हमला: 'महाराष्ट्र दिवस सिर्फ सरकारी रस्म बनकर रह गया'

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राज ठाकरे का महाराष्ट्र सरकार पर हमला: 'महाराष्ट्र दिवस सिर्फ सरकारी रस्म बनकर रह गया'

सारांश

राज ठाकरे ने महाराष्ट्र दिवस पर सरकार को आईना दिखाया — हुतात्मा स्मारक की उपेक्षा से लेकर दिल्ली के नेताओं को खुश रखने की कथित कोशिश तक। उनका सवाल सीधा है: क्या मराठी अस्मिता का यह सबसे बड़ा दिन अब सिर्फ एक सरकारी खानापूर्ति बनकर रह गया है?

Key Takeaways

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने 1 मई 2026 को महाराष्ट्र दिवस पर राज्य सरकार पर 'आधा-अधूरा' रवैया अपनाने का आरोप लगाया। हुतात्मा स्मारक को ठीक से न सजाए जाने पर ठाकरे ने नाराज़गी जताई और सरकारी उदासीनता को उजागर किया। ठाकरे ने सवाल उठाया कि क्या सरकार केंद्र के नेताओं को नाराज़ न करने के लिए महाराष्ट्र दिवस को बड़े स्तर पर मनाने से बच रही है। उन्होंने संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के बलिदान को याद रखने की अपील की और कहा कि मुंबई महाराष्ट्र का हिस्सा इसी संघर्ष की वजह से बना। अगले साल 1 मई को हुतात्मा स्मारक पर बड़ी संख्या में एकत्रित होने की मराठी समाज से अपील की।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने 1 मई 2026 को महाराष्ट्र दिवस समारोह को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि सरकार इस ऐतिहासिक दिन को महज एक 'आधी-अधूरी सरकारी रस्म' की तरह निभा रही है। मुंबई के हुतात्मा चौक पर संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद ठाकरे ने सोशल मीडिया के ज़रिए अपनी नाराज़गी खुलकर ज़ाहिर की।

हुतात्मा चौक पर क्या हुआ

मुख्यमंत्री द्वारा हुतात्मा चौक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद राज ठाकरे भी वहाँ पहुँचे और संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के शहीदों को नमन किया। ठाकरे ने आरोप लगाया कि हुतात्मा स्मारक को ठीक से सजाया तक नहीं गया था और पूरे आयोजन में सरकारी उदासीनता साफ़ नज़र आ रही थी। उनके अनुसार, कई वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है और हर बार इस दिन को राज्य के गौरव के उत्सव की बजाय एक औपचारिकता तक सीमित कर दिया जाता है।

सरकार पर गंभीर सवाल

राज ठाकरे ने तंज़ कसते हुए सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार केंद्र के नेताओं को नाराज़ करने से बचने के लिए महाराष्ट्र दिवस को बड़े पैमाने पर मनाने से परहेज़ कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि यह किसी अन्य समुदाय या विशेष आयोजन का कार्यक्रम होता, तो सड़कों पर कालीन बिछाए जाते और पूरे शहर को रोशनी से सजाया जाता। लेकिन मराठी अस्मिता और महाराष्ट्र से जुड़े इस दिन को उदासी के साथ मनाया जा रहा है — यह बात उन्हें गहरी चोट पहुँचाती है।

मराठी अस्मिता और इतिहास पर चिंता

ठाकरे ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मराठी लोगों को हुतात्मा स्मारक के महत्व से जानबूझकर दूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुंबई की ऊँची-ऊँची इमारतें इसलिए हैं क्योंकि यह शहर महाराष्ट्र का हिस्सा बना रहा — और इस संघर्ष को भुलाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हाथ जोड़कर निवेदन है कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के संघर्ष को मत भूलिए। मुंबई में जो ऊँची-ऊँची इमारतें दिखती हैं, वे इसलिए हैं क्योंकि यह शहर महाराष्ट्र का हिस्सा बना रहा। इस पर गर्व कीजिए।'' गौरतलब है कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में 106 शहीदों ने मराठी भाषी राज्य के लिए अपनी जान दी थी।

आम जनता की उदासीनता पर भी चिंता

ठाकरे ने केवल सरकार को ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की बढ़ती उदासीनता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हुतात्मा स्मारक राज्य के हर नागरिक के लिए तीर्थ स्थल की तरह होना चाहिए, लेकिन आज मराठी लोग अपने इतिहास से दूर होते जा रहे हैं।

अगले साल के लिए अपील

राज ठाकरे ने मुंबई और पूरे महाराष्ट्र के मराठी लोगों से अपील की कि अगले साल 1 मई को बड़ी संख्या में हुतात्मा स्मारक पर एकत्रित हों, ताकि सरकार मजबूर होकर इस दिन को उसका उचित सम्मान दे। यह देखना होगा कि महायुति सरकार इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया देती है या नहीं।

Point of View

ऐसे में यह बयान ठाकरे की मराठी भावनाओं के एकमात्र प्रवक्ता की छवि को पुनर्स्थापित करने की कोशिश भी है। लेकिन असली सवाल यह है कि जब संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के शहीदों की स्मृति को लेकर जनता खुद उदासीन हो रही है, तो क्या सरकार को दोष देना पर्याप्त है — या मराठी सांस्कृतिक नेतृत्व को भी आत्मनिरीक्षण करना होगा?
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

राज ठाकरे ने महाराष्ट्र दिवस पर सरकार की आलोचना क्यों की?
राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार महाराष्ट्र दिवस को राज्य के गौरव के उत्सव की बजाय एक सरकारी रस्म की तरह मना रही है। उन्होंने हुतात्मा स्मारक को ठीक से न सजाए जाने और पूरे आयोजन में सरकारी उदासीनता को इसका प्रमाण बताया।
हुतात्मा स्मारक का महत्व क्या है?
हुतात्मा स्मारक मुंबई में उन 106 शहीदों की याद में बनाया गया है जिन्होंने संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में मराठी भाषी राज्य के लिए अपनी जान दी थी। राज ठाकरे के अनुसार यह स्मारक राज्य के हर नागरिक के लिए तीर्थ स्थल के समान होना चाहिए।
क्या राज ठाकरे ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा?
ठाकरे ने सीधे केंद्र सरकार का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार केंद्र के नेताओं को नाराज़ करने से बचने के लिए महाराष्ट्र दिवस को बड़े पैमाने पर मनाने से परहेज़ कर रही है।
राज ठाकरे ने मराठी समाज से क्या अपील की?
उन्होंने मराठी समाज से अपील की कि अगले साल 1 मई को बड़ी संख्या में हुतात्मा स्मारक पर एकत्रित हों। साथ ही उन्होंने संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के संघर्ष को न भूलने और मुंबई के महाराष्ट्र का हिस्सा बने रहने पर गर्व करने का आह्वान किया।
महाराष्ट्र दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
महाराष्ट्र दिवस हर साल 1 मई को मनाया जाता है। यह दिन 1960 में महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की याद में मनाया जाता है, जब मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर एक अलग राज्य बनाया गया था।
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