अरुणाचल प्रदेश CM पेमा खांडू बोले — पूर्वोत्तर अब विकास का इंजन, 2047 तक 40,000 MW जलविद्युत का लक्ष्य
सारांश
Key Takeaways
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 1 मई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि जो पूर्वोत्तर कभी उग्रवाद, अल्पविकास और अलगाव के लिए जाना जाता था, वह अब भारत की विकास गाथा का एक प्रमुख चालक बन चुका है। आइजैक सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी (ICPP) ग्रोथ कॉन्फ्रेंस 2026 में नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और विचारकों को संबोधित करते हुए उन्होंने पिछले एक दशक के परिवर्तन को ऐतिहासिक बताया।
अरुणाचल प्रदेश की रणनीतिक पहचान
मुख्यमंत्री खांडू ने अरुणाचल प्रदेश को देश के सबसे खूबसूरत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह राज्य पूर्वोत्तर में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा, सबसे पूर्वी और सबसे उत्तरी राज्य है। राज्य की भौगोलिक स्थिति इसे न केवल सांस्कृतिक बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और सांस्कृतिक विविधता
खांडू ने राज्य की विकास यात्रा का संक्षिप्त विवरण देते हुए बताया कि उत्तर पूर्वी सीमांत एजेंसी (NEFA) से 1972 में केंद्र शासित प्रदेश और फिर 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने तक का सफर कितना लंबा रहा है। उन्होंने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता पर भी प्रकाश डाला, जिसमें 26 प्रमुख जनजातियाँ और 100 से अधिक उप-जनजातियाँ शामिल हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हिंदी राज्य में एक महत्वपूर्ण संपर्क भाषा के रूप में विभिन्न समुदायों को एकजुट करती है।
भारत का पावरहाउस: जलविद्युत क्षमता
अरुणाचल प्रदेश की आर्थिक क्षमता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य को जलविद्युत उत्पादन के मामले में 'भारत का पावरहाउस' करार दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विकास के विभिन्न चरणों में लगभग 19,000 मेगावाट की कुल क्षमता वाली जलविद्युत परियोजनाएँ चल रही हैं। दीर्घकालिक लक्ष्य के तहत 2047 तक 40,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जो विकसित भारत की परिकल्पना में अहम भूमिका निभाएगा।
मोदी सरकार की नीतियों को श्रेय
खांडू ने पूर्वोत्तर को देश के विकास एजेंडे के केंद्र में रखने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। उनके अनुसार निरंतर नीतिगत ध्यान, बुनियादी ढाँचे के विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी ने इस क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को नया रूप दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के नियमित दौरों ने जमीनी स्तर पर समस्याओं की पहचान कर समय पर समाधान सुनिश्चित किया, जिससे विकास की गति तेज हुई।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत को वैश्विक निवेश मानचित्र पर स्थापित करने की कोशिशें तेज हो रही हैं। गौरतलब है कि अरुणाचल प्रदेश की सीमाएँ चीन और म्यांमार से लगती हैं, जो इसे भू-राजनीतिक दृष्टि से और भी संवेदनशील बनाती हैं। यदि जलविद्युत लक्ष्य समय पर पूरे होते हैं, तो अरुणाचल प्रदेश न केवल ऊर्जा सुरक्षा बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मिसाल बन सकता है।