जयपुर सीरियल ब्लास्ट 2008: राजस्थान हाईकोर्ट ने दो दोषियों की जमानत याचिका खारिज की, उम्रकैद बरकरार
सारांश
Key Takeaways
राजस्थान हाईकोर्ट ने शुक्रवार, 1 मई 2026 को 2008 जयपुर सीरियल ब्लास्ट मामले के दो दोषियों — मोहम्मद सरवर आजमी और शहबाज अहमद — की जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने उनकी उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इस फैसले के साथ दोनों दोषियों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है।
मामले की पृष्ठभूमि
13 मई 2008 को जयपुर में एक के बाद एक आठ बम धमाके हुए थे, जिनमें 71 लोगों की मौत हुई थी और 185 लोग घायल हुए थे। इसी दौरान चांदपोल बाजार स्थित एक गेस्ट हाउस के पास एक नौवाँ बम मिला था, जिसे फटने से कुछ मिनट पहले निष्क्रिय कर दिया गया था। यह 'जिंदा बम' मामले के नाम से जाना जाता है।
इस 'जिंदा बम' मामले में 4 अप्रैल 2025 को विशेष अदालत ने मोहम्मद सरवर आजमी, शहबाज अहमद, सैफुर रहमान और मोहम्मद सैफ को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। गौरतलब है कि इससे पहले आठ धमाकों के मुख्य मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को फाँसी की सजा सुनाई थी, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने उन फाँसी की सजाओं को रद्द करते हुए आरोपियों को बरी कर दिया था।
बचाव पक्ष की दलीलें
दोनों दोषियों की ओर से बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि वे लंबे समय से जेल में हैं और हाईकोर्ट में अपील की सुनवाई पूरी होने में काफी समय लग सकता है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि 'जिंदा बम' मामले में वही सबूत पेश किए गए हैं जिनके आधार पर पहले ब्लास्ट मामलों में आरोपियों को बरी किया जा चुका है। उनका तर्क था कि जब समान तथ्यों पर पहले बरी किया जा चुका है, तो इस मामले में दोषसिद्धि पर सवाल उठता है।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह मामला आतंकवाद का है, जिसका मकसद लोगों में डर फैलाना था। चौधरी ने यह भी कहा कि आरोपियों ने कथित तौर पर ईमेल के ज़रिए धमाकों की जिम्मेदारी भी ली थी। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष ने इस मामले में पहले के मामलों से अलग अतिरिक्त सबूत भी पेश किए हैं।
अदालत का फैसला और आगे की राह
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और जमानत याचिका खारिज कर दी। यह ऐसे समय में आया है जब इस मामले की अपील अभी भी हाईकोर्ट में लंबित है। दोनों दोषियों की अपील की सुनवाई आगे जारी रहेगी, लेकिन तब तक उन्हें जेल में ही रहना होगा।