दमिश्क में शिया धर्मगुरु फरहान मंसूर पर ग्रेनेड हमला, सैय्यदा जैनब दरगाह के पास गंभीर रूप से घायल
सारांश
Key Takeaways
दमिश्क के पवित्र सैय्यदा जैनब इलाके में शुक्रवार, 1 मई को शिया धर्मगुरु फरहान मंसूर पर ग्रेनेड से हमला किया गया, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स (SOHR) के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने मंसूर की कार में ग्रेनेड फेंका, जब वे सैय्यदा जैनब दरगाह से निकलकर सफीर अल-जहरा होटल के पास पहुँचे थे। सीरियाई अधिकारियों ने फिलहाल केवल इतना स्वीकार किया है कि इलाके में एक धमाका हुआ था।
हमले का विवरण
ब्रिटेन स्थित वॉर मॉनिटर SOHR ने बताया कि फरहान मंसूर शिया धार्मिक अथॉरिटी के सदस्य हैं और शुक्रवार को उपदेश देने की जिम्मेदारी उनकी थी। हमले के समय वे दरगाह से बाहर निकल रहे थे। कथित तौर पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने उनकी कार को निशाना बनाया, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गए।
सरकारी समाचार एजेंसी सना के हवाले से सीरियाई सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की कि धमाका हैंड ग्रेनेड से हुआ था। हालाँकि अधिकारियों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि हमले का मुख्य निशाना कौन था और कुल कितने लोग घायल हुए।
सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने सैय्यदा जैनब इलाके को घेर लिया और आम नागरिकों को दूर रखने के लिए अपनी मौजूदगी बढ़ा दी। एक विशेषज्ञ फोरेंसिक टीम मौके की जाँच में जुटी है। मंसूर की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक और स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
सैय्यदा जैनब — हमलों का इतिहास
सैय्यदा जैनब इस्लाम के सबसे सम्मानित शिया तीर्थस्थलों में से एक है। सीरिया के 14 वर्षों से अधिक लंबे गृह युद्ध के दौरान इस इलाके पर कई बार हमले हो चुके हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सीरिया धीरे-धीरे संघर्ष के दौर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है।
गौरतलब है कि जनवरी 2025 में सीरिया की अंतरिम सरकार ने बताया था कि सैय्यदा जैनब में एक बड़े बम धमाके की साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया था। सना के मुताबिक, जनरल इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट के एक सूत्र ने बताया था कि इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़े एक समूह ने इस दरगाह पर हमले की योजना बनाई थी, जिसे सुरक्षा बलों ने हमले से पहले ही विफल कर दिया था।
इज़रायली हमलों का संदर्भ
इसके अतिरिक्त, 2024 में सैय्यदा जैनब इलाके पर इज़रायल की ओर से मिसाइल हमले भी हुए थे। SOHR के अनुसार, जून 2024 में इज़रायली मिसाइलों ने उस स्थान को निशाना बनाया जहाँ जिहाद अल-बिना फाउंडेशन के सर्विस सेंटर में वाहन खड़े थे। यह संगठन हिज़्बुल्लाह और ईरानी मिलिशिया से जुड़ा माना जाता है।
यह Nवीं ऐसी घटना है जो दर्शाती है कि सीरिया में शांति बहाली की प्रक्रिया अभी भी कितनी अनिश्चित और खतरनाक बनी हुई है। आने वाले दिनों में जाँच के नतीजे और मंसूर की स्वास्थ्य स्थिति पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।