अजरबैजान की मिल्ली मजलिस का बड़ा फैसला: यूरोपीय संसद के साथ सभी सहयोग तत्काल प्रभाव से खत्म
सारांश
Key Takeaways
अजरबैजान की संसद मिल्ली मजलिस ने 1 मई 2026 को यूरोपीय संसद के साथ सभी प्रकार का संसदीय सहयोग समाप्त करने के पक्ष में मतदान किया। यह निर्णय 30 अप्रैल को यूरोपीय संसद द्वारा पारित उस प्रस्ताव के प्रत्यक्ष जवाब में लिया गया, जिसे बाकू ने पक्षपातपूर्ण और बेबुनियाद बताया है। अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने इस कदम को संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए ज़रूरी बताया।
मिल्ली मजलिस का प्रस्ताव और उसके निहितार्थ
संसद ने एक औपचारिक प्रस्ताव पारित करते हुए घोषणा की कि ईयू-अजरबैजान संसदीय सहयोग समिति में अजरबैजान की भागीदारी तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाएगी। इसके साथ ही संसद ने क्षेत्रीय मंच 'यूरनेस्ट पार्लियामेंट्री असेंबली' से बाहर निकलने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी — यह एक ऐसा मंच है जिसमें यूरोपीय संसद और कुछ अन्य देशों की संसदें शामिल हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, हर स्तर पर सहयोग बंद करने का निर्देश दिया गया है।
स्पीकर गफारोवा की कड़ी प्रतिक्रिया
संसद की स्पीकर साहिबा गफारोवा ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संसद की अजरबैजान विरोधी गतिविधियों के जवाब में और भी कड़े कदम उठाए जाएँगे। गफारोवा ने इस निर्णय को महज प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि संस्थागत प्रतिक्रिया बताया। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय संघ और अजरबैजान के बीच कराबाख क्षेत्र को लेकर तनाव पहले से ही बना हुआ है।
ईयू राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब किया
अजरबैजान में यूरोपीय संघ की राजदूत मारियाना कुजुंडजिक को 1 मई को अजरबैजान के विदेश मंत्रालय में तलब किया गया। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, बैठक में 30 अप्रैल को यूरोपीय संसद द्वारा पारित प्रस्ताव में अजरबैजान के खिलाफ कही गई बातों की कड़ी निंदा की गई और औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह प्रस्ताव