होर्मुज संकट के बीच जापान ने रूस से खरीदा तेल, फरवरी 2022 के बाद पहली बार
सारांश
Key Takeaways
जापान ने शुक्रवार, 1 मई 2026 को रूस से कच्चे तेल की एक खेप खरीदी — फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब टोक्यो ने मॉस्को से तेल का आयात किया है। यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल मार्गों पर बढ़ते संकट के बीच उठाया गया है, जिससे जापान की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर दबाव आ गया है।
रूसी तेल की खेप और आपूर्ति मार्ग
रूस से खरीदा गया यह तेल 'वॉयजर' नाम के ऑयल टैंकर से लाया जा रहा है। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, यह टैंकर 3 मई को शिकोकू द्वीप के किकुमा बंदरगाह पहुँचेगा। ओमान के झंडे वाला यह टैंकर शिकोकू द्वीप स्थित ताइयो ऑयल की रिफाइनरी तक तेल पहुँचाएगा।
ताइयो ऑयल के एक प्रतिनिधि ने तास से कहा, ''खरीदा जा रहा तेल सखालिन ब्लेंड ग्रेड का है। इस मामले में हम जापान सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।''
राष्ट्रीय तेल भंडार से आपातकालीन आपूर्ति
जापान सरकार ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसने राष्ट्रीय तेल भंडार से अतिरिक्त तेल जारी करना शुरू कर दिया है। यह मात्रा देश की करीब 20 दिनों की खपत के बराबर है और इसे इबाराकी प्रांत के तेल भंडार केंद्रों से जारी किया जा रहा है।
क्योडो न्यूज एजेंसी के मुताबिक, देशभर के 10 केंद्रों से कुल 58 लाख किलोलीटर तेल चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले भी सरकार राज्य और अन्य भंडारों से करीब 50 दिनों के बराबर तेल जारी कर चुकी है।
होर्मुज से परे वैकल्पिक आपूर्ति की रणनीति
जापान की प्रधानमंत्री सना ताकाइची के अनुसार, मई महीने के लिए जापान अपनी करीब 60 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत ऐसे रास्तों से पूरी करने की उम्मीद कर रहा है, जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर नहीं गुजरते। यह आँकड़ा जापान की ऊर्जा विविधीकरण रणनीति में एक उल्लेखनीय बदलाव को दर्शाता है।
ताकाइची ने 25 अप्रैल को पश्चिम एशिया की स्थिति पर एक मंत्रिस्तरीय बैठक बुलाई थी। इसमें तय किया गया कि मध्य पूर्व और अमेरिका के अलावा जापान अब मध्य एशिया, लैटिन अमेरिका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र से भी तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
जापान की ऊर्जा निर्भरता और संकट का संदर्भ
जापान अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 90 प्रतिशत से अधिक आयात पश्चिम एशिया से करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह Nवीं बार नहीं है जब जापान को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा हो — 1973 के तेल संकट के बाद से टोक्यो ने भंडारण और विविधीकरण को प्राथमिकता दी है, लेकिन होर्मुज पर इतनी भारी निर्भरता आज भी उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों की सफलता यह तय करेगी कि जापान इस संकट को कितनी कुशलता से संभाल पाता है।