भगवंत मान पर नशे में विधानसभा पहुंचने के आरोप, स्वाति मालीवाल ने बर्खास्तगी और अल्कोहल टेस्ट की मांग की
सारांश
Key Takeaways
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर शुक्रवार, 1 मई को पंजाब विधानसभा सत्र में नशे की हालत में शामिल होने के आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल से लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और शिरोमणि अकाली दल तक — कई दलों के नेताओं ने मुख्यमंत्री के आचरण पर कड़े सवाल उठाए हैं।
स्वाति मालीवाल के आरोप और मांग
राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि भगवंत मान नशे की हालत में पंजाब विधानसभा पहुंचे और वहाँ भाषण दिया। मालीवाल ने यह भी दावा किया कि जब वे धार्मिक स्थलों — जैसे गुरुद्वारा या मंदिर — जाते हैं, तब भी वे नशे की स्थिति में होते हैं। उन्होंने कहा कि जब भगवंत मान लोकसभा सदस्य थे, तब भी उनके साथियों के बीच उनके शराब सेवन को लेकर चर्चा होती थी।
मालीवाल ने स्पष्ट किया कि भगवंत मान की ड्रिंकिंग प्रॉब्लम व्यक्तिगत नहीं है। उन्होंने कहा कि मान देश के एक अत्यंत संवेदनशील सीमावर्ती राज्य — पंजाब — के मुख्यमंत्री हैं, जिसकी सीमाएँ पाकिस्तान से मिलती हैं। उनके अनुसार, महत्वपूर्ण फाइलें भी कथित तौर पर नशे की हालत में हस्ताक्षरित की जाती हैं। मालीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि इसका सीधा फायदा अरविंद केजरीवाल उठाते हैं, जो पंजाब को कथित तौर पर रिमोट कंट्रोल से चला रहे हैं।
मालीवाल ने माँग की कि भगवंत मान का तुरंत अल्कोहल टेस्ट कराया जाए और उन पर कार्रवाई करते हुए उन्हें बर्खास्त किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने इस टेस्ट की माँग को रद्द कर दिया है।
BJP का रुख: पुराने आरोपों का संदर्भ
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब भगवंत मान इस तरह के आरोपों में घिरे हैं। उन्होंने 2015, 2019 और 2022 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि सार्वजनिक मंचों पर उनके नशे में होने की बातें पहले भी सामने आती रही हैं। आरपी सिंह ने यह भी कहा कि 2019 में भगवंत मान ने सार्वजनिक रूप से अपनी माँ की कसम खाकर शराब न पीने का वादा किया था।
कांग्रेस और अकाली दल की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने भी इसी तरह के आरोप दोहराए और कहा कि यह बात किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सांसद रहते हुए भी भगवंत मान शराब के नशे में संसद पहुँचते थे।
शिरोमणि अकाली दल के उपाध्यक्ष परंबंस सिंह रोमाना ने कहा कि यह केवल आरोप भर नहीं है — ऐसे वीडियो सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर सामने आए हैं जिनमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री की हालत स्पष्ट दिखती है। रोमाना ने यह भी बताया कि कुछ विधायकों ने स्पीकर से सभी सदस्यों का एल्कोमीटर टेस्ट कराने की माँग की है।
आम आदमी पार्टी और भगवंत मान का पक्ष
गौरतलब है कि इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक आम आदमी पार्टी (AAP) या मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक खंडन उपलब्ध नहीं था। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में AAP सरकार पहले से ही कई मोर्चों पर विपक्ष के निशाने पर है। आगे यह देखना होगा कि AAP इन आरोपों का जवाब किस रणनीति से देती है और क्या कोई आधिकारिक जाँच की माँग स्वीकार की जाती है।