राज्यपाल कटारिया ने हिमाचल, महाराष्ट्र और गुजरात स्थापना दिवस पर राष्ट्र निर्माण में योगदान को सराहा

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राज्यपाल कटारिया ने हिमाचल, महाराष्ट्र और गुजरात स्थापना दिवस पर राष्ट्र निर्माण में योगदान को सराहा

सारांश

चंडीगढ़ के पंजाब लोक भवन में 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के तहत हिमाचल, महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस एक साथ मनाया गया। राज्यपाल कटारिया ने तीनों राज्यों की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र निर्माण में योगदान को सराहा — किन्नौरी नाटी से लेकर लावणी और डांडिया तक, विविधता में एकता का जीवंत उत्सव।

Key Takeaways

राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने 1 मई 2026 को पंजाब लोक भवन, चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के स्थापना दिवस समारोह में भाग लिया। हिमाचल प्रदेश का स्थापना दिवस 15 अप्रैल को नहीं हो पाने के कारण महाराष्ट्र और गुजरात के साथ एक साथ मनाया गया। कार्यक्रम 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' परिकल्पना के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें NZCC, पटियाला के कलाकारों ने तीनों राज्यों की लोक प्रस्तुतियाँ दीं। राज्यपाल ने मेजर सोमनाथ शर्मा , कैप्टन विक्रम बत्रा सहित हिमाचल के वीर सपूतों और संत नामदेव जी के माध्यम से महाराष्ट्र-पंजाब के आध्यात्मिक जुड़ाव का उल्लेख किया। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर राज्यपाल ने श्रमिकों को राष्ट्रीय प्रगति की आधारशिला बताते हुए बधाई दी।

पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया अपनी धर्मपत्नी अनीता कटारिया के साथ 1 मई 2026 को पंजाब लोक भवन, चंडीगढ़ में आयोजित महाराष्ट्र और गुजरात के स्थापना दिवस समारोह में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश का स्थापना दिवस भी एक साथ मनाया गया, क्योंकि 15 अप्रैल को कुछ कारणोंवश इसका आयोजन संभव नहीं हो पाया था। यह समारोह केंद्र सरकार की 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' परिकल्पना के अंतर्गत आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन और उद्देश्य

समारोह का शुभारंभ महाराष्ट्र के राज्यपाल जिश्नु देव वर्मा के वीडियो संदेश के प्रदर्शन से हुआ, जिसके पश्चात महाराष्ट्र की विरासत, विकास और उपलब्धियों पर आधारित एक वृत्तचित्र प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में अजीत बालाजी जोशी (IAS) ने महाराष्ट्र पर, धर्मेश जिवानी ने गुजरात पर तथा डॉ. ए.के. अत्री ने हिमाचल प्रदेश पर अपने विचार रखे। 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' का उद्देश्य भाषा, संस्कृति, परंपराओं और विरासत के आदान-प्रदान के माध्यम से राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा देना है।

रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

तीनों राज्यों की लोक-सांस्कृतिक विरासत को उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NZCC), पटियाला के कलाकारों ने जीवंत रूप दिया। हिमाचल प्रदेश की किन्नौरी नाटी एवं लुड्डी, महाराष्ट्र की सोंगी मुखवटे एवं लावणी तथा गुजरात के डांडिया, राठवा और तलवार रास ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम का समापन सभी कलाकारों की भव्य संयुक्त प्रस्तुति के साथ हुआ।

राज्यपाल कटारिया का संबोधन

राज्यपाल कटारिया ने तीनों राज्यों के नागरिकों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात ने राष्ट्र निर्माण, सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक समृद्धि और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर श्रमिकों और कामगारों को राष्ट्रीय प्रगति की आधारशिला बताते हुए बधाई दी।

हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में राज्यपाल ने कहा कि यह राज्य साक्षरता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, बागवानी और जलविद्युत के क्षेत्र में अग्रणी प्रगतिशील राज्य के रूप में उभरा है। उन्होंने मेजर सोमनाथ शर्मा, कैप्टन विक्रम बत्रा, राइफलमैन संजय कुमार और कैप्टन सौरभ कालिया जैसे वीर सपूतों का विशेष उल्लेख करते हुए हिमाचल प्रदेश को 'वीर भूमि' की संज्ञा दी।

महाराष्ट्र और पंजाब का आध्यात्मिक जुड़ाव

महाराष्ट्र की समृद्ध सभ्यता, संत परंपरा, समाज सुधारकों और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने मुंबई, यूनेस्को धरोहर स्थलों, किलों तथा लावणी और तमाशा जैसी परंपराओं का उल्लेख किया। उन्होंने संत नामदेव जी के माध्यम से महाराष्ट्र और पंजाब के पवित्र संबंध को रेखांकित किया — उनकी वाणी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में संकलित है। उन्होंने यह भी कहा कि नांदेड़ स्थित तख्त श्री हजूर साहिब से गुरु गोबिंद सिंह जी का संबंध दोनों राज्यों के स्थायी आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक है। गुजरात के गौरवशाली इतिहास, उद्यमशीलता तथा स्वतंत्रता आंदोलन, उद्योग और नवाचार में योगदान की भी राज्यपाल ने सराहना की।

आगे की दिशा

'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के अंतर्गत इस प्रकार के सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम देश भर में विविधता में एकता की भावना को सुदृढ़ करते हैं। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि सांस्कृतिक संवाद राष्ट्रीय एकजुटता की नींव को और मज़बूत कर सकता है।

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये आयोजन केवल मंच-प्रदर्शन तक सीमित हैं या इनके पीछे राज्यों के बीच ठोस सांस्कृतिक व शैक्षणिक आदान-प्रदान की दीर्घकालिक योजना भी है। हिमाचल का स्थापना दिवस अपनी निर्धारित तिथि पर न मना पाना एक प्रशासनिक चूक की ओर इशारा करता है जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। फिर भी, राज्यपाल कटारिया का संत नामदेव और गुरु गोबिंद सिंह जी के माध्यम से महाराष्ट्र-पंजाब के आध्यात्मिक सेतु को उजागर करना इस कार्यक्रम को रस्मी से परे एक सार्थक संवाद का रूप देता है।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

चंडीगढ़ में हिमाचल, महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस एक साथ क्यों मनाया गया?
हिमाचल प्रदेश का स्थापना दिवस 15 अप्रैल को कुछ कारणोंवश आयोजित नहीं हो पाया था, इसलिए इसे 1 मई को महाराष्ट्र और गुजरात के स्थापना दिवस के साथ एक साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' परिकल्पना के अंतर्गत पंजाब लोक भवन, चंडीगढ़ में आयोजित हुआ।
'एक भारत श्रेष्ठ भारत' कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है?
'एक भारत श्रेष्ठ भारत' का उद्देश्य भाषा, संस्कृति, परंपराओं और विरासत के आदान-प्रदान के माध्यम से राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा देना है। यह केंद्र सरकार की एक पहल है जिसके तहत विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहित किया जाता है।
समारोह में कौन-कौन सी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हुईं?
NZCC पटियाला के कलाकारों ने हिमाचल प्रदेश की किन्नौरी नाटी व लुड्डी, महाराष्ट्र की सोंगी मुखवटे व लावणी तथा गुजरात के डांडिया, राठवा और तलवार रास प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन सभी कलाकारों की भव्य संयुक्त प्रस्तुति के साथ हुआ।
राज्यपाल कटारिया ने हिमाचल प्रदेश के किन वीर सपूतों का उल्लेख किया?
राज्यपाल कटारिया ने मेजर सोमनाथ शर्मा, कैप्टन विक्रम बत्रा, राइफलमैन संजय कुमार और कैप्टन सौरभ कालिया का उल्लेख करते हुए हिमाचल प्रदेश को 'वीर भूमि' कहा। उन्होंने राज्य की साक्षरता, स्वास्थ्य, पर्यटन और जलविद्युत में उपलब्धियों की भी सराहना की।
महाराष्ट्र और पंजाब के बीच आध्यात्मिक संबंध क्या है जिसका उल्लेख राज्यपाल ने किया?
राज्यपाल कटारिया ने संत नामदेव जी के माध्यम से महाराष्ट्र और पंजाब के पवित्र संबंध को रेखांकित किया, जिनकी वाणी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में संकलित है। उन्होंने नांदेड़ स्थित तख्त श्री हजूर साहिब से गुरु गोबिंद सिंह जी के संबंध को भी दोनों राज्यों के स्थायी आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक बताया।
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