मराठी भाषा विवाद: कृपाशंकर सिंह ने स्वीकारा 'चैलेंज', बोले— 2027 में 1 मई को उत्तर भारतीय चालक गाएंगे महाराष्ट्र गीत
सारांश
Key Takeaways
मुंबई में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को लेकर छिड़ी बहस के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। वरिष्ठ नेता कृपाशंकर सिंह ने 1 मई 2026 को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा दिया गया यह "चैलेंज" उन्हें स्वीकार है — और 1 मई 2027 को उत्तर भारतीय टैक्सी व रिक्शा चालक महाराष्ट्र गीत गाएंगे। यह विवाद अब भाषा, पहचान और स्थानीय संस्कृति के सम्मान जैसे व्यापक सवालों को केंद्र में ला चुका है।
कृपाशंकर सिंह का रुख
कृपाशंकर सिंह ने मराठी भाषा को "बेहद प्यारी" बताते हुए कहा कि इसका सम्मान हमेशा किया गया है और आगे भी किया जाता रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति जहाँ रहता है, उसे वहाँ की भाषा सीखनी चाहिए — अन्यथा यह उसके लिए स्वयं नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने यह भी माना कि मराठी न जानना उनके लिए भी एक कमी है।
सिंह ने हिंदी, मराठी और भारतीय संस्कृति को "सगी बहनें" करार देते हुए कहा कि इन तीनों को एक-दूसरे का पूरक माना जाना चाहिए, प्रतिद्वंद्वी नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की अस्मिता की रक्षा के लिए उत्तर भारतीय समाज हमेशा आगे रहेगा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मराठी महाराष्ट्र की मूल भाषा है और हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह जहाँ रहता है, वहाँ की स्थानीय भाषा से परिचित हो। उन्होंने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने से बचने की सलाह दी।
सपकाल ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में लोग मराठी बोलते हैं और सम्मान के तौर पर सभी को इसे सीखने और बोलने का प्रयास करना चाहिए। गौरतलब है कि उन्होंने मुद्दे के सामाजिक पहलू को राजनीतिक विवाद से अलग रखने पर ज़ोर दिया।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह बहस महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव के बाद उठी है। यह ऐसे समय में आई है जब राज्य में भाषाई पहचान को लेकर सामाजिक संवेदनशीलता पहले से ही बढ़ी हुई है। मुंबई जैसे महानगर में जहाँ उत्तर भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में परिवहन क्षेत्र में कार्यरत हैं, यह प्रस्ताव व्यावहारिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से चर्चा का केंद्र बन गया है।
आगे क्या होगा
कृपाशंकर सिंह की घोषणा के अनुसार, 1 मई 2027 — यानी अगले महाराष्ट्र दिवस पर — उत्तर भारतीय टैक्सी और रिक्शा चालक सार्वजनिक रूप से महाराष्ट्र गीत गाएंगे। यह कदम एक प्रतीकात्मक संदेश देने की कोशिश है कि प्रवासी समुदाय स्थानीय संस्कृति और भाषा का सम्मान करता है। अब देखना यह होगा कि इस घोषणा को ज़मीनी स्तर पर किस रूप में अमल में लाया जाता है।