चाबहार की सियासत: कांग्रेस का आरोप, सरकार निरंतरता की सच्चाई को करती है नकार

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चाबहार की सियासत: कांग्रेस का आरोप, सरकार निरंतरता की सच्चाई को करती है नकार

सारांश

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने चाबहार बंदरगाह पर भारत सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह अब राजनीतिक परिदृश्य में नहीं है। इससे भारत की मध्य एशिया कूटनीति को बड़ा झटका लगा है। इस मुद्दे पर जानें और क्या कहती है कांग्रेस।

Key Takeaways

  • चाबहार का महत्व भारत की मध्य एशिया कूटनीति के लिए है।
  • कांग्रेस ने सरकार पर निरंतरता की सच्चाई को नकारने का आरोप लगाया।
  • ग्वादर और चाबहार के बीच की प्रतिस्पर्धा महत्वपूर्ण है।
  • कोई भी निवेश योजना वर्तमान में दिखाई नहीं दे रही है।
  • भारत के लिए यह एक रणनीतिक झटका है।

नई दिल्ली, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों के बीच, कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने ईरान के चाबहार बंदरगाह पर भारत सरकार की रणनीति को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाबहार अब राजनीतिक परिदृश्य में नजर नहीं आ रहा है। यह भारत की मध्य एशिया कूटनीति के लिए एक और गंभीर झटका है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "शासन में निरंतरता एक महत्वपूर्ण सच्चाई है, जिसे वर्तमान सरकार कभी स्वीकार नहीं करती।"

उन्होंने आगे उल्लेख किया, "1990 के दशक के अंत से, भारत ने भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग की रणनीति के अंतर्गत चाबहार बंदरगाह में निवेश की संभावनाओं की खोज शुरू कर दी थी। अंततः तेहरान में आयोजित 16वें गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद, मनमोहन सिंह ने इन योजनाओं को नई दिशा दी और मई 2013 में केंद्रीय कैबिनेट ने चाबहार में प्रारंभिक तौर पर 115 मिलियन डॉलर के निवेश को मंजूरी दी। यह महत्वपूर्ण है कि यह निर्णय उस समय लिया गया था, जब भारत अक्टूबर 2008 में हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को लागू करने के लिए बड़े कदम उठा रहा था।"

जयराम रमेश ने लिखा, "अक्टूबर 2014 में भाजपा सरकार ने, जैसा कि वह अक्सर करती है, मनमोहन सिंह की चाबहार पहल को नए तरीके से पेश किया और इसे प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का हिस्सा बताया। 2026-27 के बजट में चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया। क्या इसका अर्थ यह है कि भारत इस परियोजना से बाहर हो गया है या फिलहाल इसके निवेश संबंधी दायित्व पूरे हो चुके हैं?"

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा, "किसी भी स्थिति में, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह, जिसे चीन ने विकसित किया है, से लगभग 170 किलोमीटर पश्चिम स्थित चाबहार अब परिदृश्य में नहीं दिखाई दे रहा है। यह भारत की मध्य एशिया कूटनीति के लिए एक और महत्वपूर्ण झटका है, क्योंकि इससे पहले भारत ने ताजिकिस्तान के दुशांबे के पास स्थित अपने वायुसेना अड्डे को बंद कर दिया था।"

Point of View

NationPress
18/03/2026

Frequently Asked Questions

चाबहार बंदरगाह का महत्व क्या है?
चाबहार बंदरगाह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थान है, जो मध्य एशिया के साथ व्यापार और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने में सहायक है।
कांग्रेस ने चाबहार पर क्या कहा?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि चाबहार का महत्व अब कम हो गया है और यह भारत की कूटनीति के लिए एक झटका है।
क्या चाबहार में निवेश के लिए कोई योजना है?
हालांकि पहले चाबहार के लिए निवेश की योजनाएँ थीं, लेकिन हाल के बजट में इसके लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है।
पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह क्या है?
ग्वादर बंदरगाह पाकिस्तान में स्थित है, जिसे चीन द्वारा विकसित किया गया है और यह चाबहार के निकट है।
भारत की मध्य एशिया में स्थिति क्या है?
भारत की मध्य एशिया में स्थिति अब चुनौतीपूर्ण हो गई है, विशेषकर चाबहार और ग्वादर के संदर्भ में।
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