कांग्रेस में मतभेद: शशि थरूर और मनीष तिवारी ने केंद्र की पश्चिम एशिया नीति का किया समर्थन

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कांग्रेस में मतभेद: शशि थरूर और मनीष तिवारी ने केंद्र की पश्चिम एशिया नीति का किया समर्थन

सारांश

कांग्रेस पार्टी में बढ़ते मतभेदों के बीच, शशि थरूर और मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार की पश्चिम एशिया नीति का समर्थन किया। दोनों नेताओं का मानना है कि इस जटिल स्थिति में भारत ने अपने हितों के प्रति संतुलित रुख अपनाया है।

मुख्य बातें

शशि थरूर और मनीष तिवारी ने केंद्र की नीति का समर्थन किया।
कांग्रेस में उभरते मतभेद स्पष्ट हैं।
भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' नीति को महत्वपूर्ण बताया गया।
सरकार की चुप्पी पर विपक्ष ने सवाल उठाए।
ईरान के खिलाफ युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गलत माना गया।

नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार की आलोचना जारी रखी है, लेकिन इस बीच पार्टी के दो सांसदों, शशि थरूर और मनीष तिवारी, ने भारत की विदेश नीति का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने कहा कि इस जटिल स्थिति में भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित और समझदारी भरा रुख अपनाया है।

शशि थरूर ने अपने लेख में भारत की 'चुप्पी' को सही ठहराते हुए कहा कि यह नैतिक कमजोरी नहीं, बल्कि जिम्मेदार कूटनीति का हिस्सा है। उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत हमेशा सिद्धांत और व्यवहारिकता के बीच संतुलन बनाकर चलता आया है।

उन्होंने लिखा, "गुटनिरपेक्षता का मतलब नैतिक रुख से दूर रहना नहीं था, बल्कि यह समझना था कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए बड़े वैश्विक टकरावों से दूरी बनाए रखना आवश्यक है।"

उन्होंने कहा कि आज भारत 'मल्टी-अलाइनमेंट' की नीति का पालन कर रहा है, जिसका अर्थ है कि वह विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सही नहीं है, लेकिन भारत की चुप्पी इसका समर्थन नहीं करती, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति है।

उन्होंने कहा, "सरकार का यह देखना कि किसी बयान का देश की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक स्थिति पर क्या असर पड़ेगा, नैतिक समर्पण नहीं है, बल्कि जिम्मेदार शासन है।"

वहीं, मनीष तिवारी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में कई संघर्ष चल रहे हैं और ऐसे में किसी एक पक्ष का समर्थन करना आसान नहीं है।

उन्होंने कहा, "यह भारत की लड़ाई नहीं है। हम इस क्षेत्र में हमेशा सीमित भूमिका में रहे हैं, इसलिए दूरी बनाना ही समझदारी है।" उन्होंने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का उल्लेख करते हुए कहा कि अपने हितों की रक्षा करना और संतुलन बनाए रखना ही सही नीति है।

इधर, केंद्र सरकार की कथित चुप्पी और ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या पर देर से प्रतिक्रिया देने को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना करते हुए एक खुला पत्र लिखा था।

हालांकि, कांग्रेस के ही दो वरिष्ठ नेताओं द्वारा सरकार के रुख का समर्थन किए जाने से पार्टी के भीतर मतभेद स्पष्ट रूप से देखे जा रहे हैं। इससे विपक्ष के आरोपों की धार भी कुछ कमजोर होती दिख रही है।

ज्ञात हो कि इससे पहले भी शशि थरूर और मनीष तिवारी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद केंद्र सरकार की कूटनीतिक पहल का समर्थन किया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल पार्टी की एकता को प्रभावित कर सकता है, बल्कि देश की विदेश नीति पर भी इसके गहरे प्रभाव हो सकते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे विभिन्न नेता अपनी राय रखते हैं और राजनीतिक रणनीतियों को आकार देते हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या शशि थरूर और मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार का समर्थन किया?
हाँ, दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार की पश्चिम एशिया नीति का समर्थन किया है।
कांग्रेस पार्टी में मतभेद क्यों उभर रहे हैं?
कांग्रेस पार्टी के भीतर मतभेद ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव पर प्रतिक्रिया के संबंध में उभर रहे हैं।
शशि थरूर ने भारत की चुप्पी को कैसे देखा?
उन्होंने इसे जिम्मेदार कूटनीति का हिस्सा बताया और नैतिक कमजोरी नहीं माना।
मनीष तिवारी का क्या कहना है?
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में कई संघर्ष चल रहे हैं, इसलिए किसी एक पक्ष का समर्थन करना आसान नहीं है।
क्या सोनिया गांधी ने सरकार की आलोचना की है?
हाँ, उन्होंने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए एक खुला पत्र लिखा था।
राष्ट्र प्रेस
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