विदेश सचिव विक्रम मिस्री को ईरानी उप विदेश मंत्री रवांची का फोन, क्षेत्रीय हालात और चाबहार पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश सचिव विक्रम मिस्री को सोमवार, 25 मई 2026 को ईरान के राजनीतिक मामलों के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रवांची ने फोन किया। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी क्षेत्रीय घटनाक्रम और भारत-ईरान द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की गई।
क्या हुई बातचीत में
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी। उन्होंने लिखा, 'विदेश सचिव विक्रम मिस्री को ईरान के राजनीतिक मामलों के उप विदेश मंत्री, माजिद तख्त रवांची का कॉल आया। बातचीत में इलाके में हाल के विकास और द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा पर फोकस किया गया।' यह संपर्क ऐसे समय में हुआ जब होर्मुज स्ट्रेट और व्यापक पश्चिम एशिया में तनाव का स्तर बढ़ा हुआ है।
चाबहार पोर्ट: सहयोग का प्रतीक, लेकिन धीमी रफ्तार
इस महीने की शुरुआत में नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण चाबहार पोर्ट का विकास कुछ धीमा पड़ गया है। उन्होंने कहा, 'चाबहार पोर्ट ईरान और भारत के बीच सहयोग के लक्ष्यों में से एक है, और हमें बहुत खुशी है कि भारतीयों ने उस पोर्ट के डेवलपमेंट में अहम भूमिका निभाई।'
अराघची ने उम्मीद जताई कि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह पर अपना काम जारी रखेगा। उनके शब्दों में, 'मुझे यकीन है कि यह पोर्ट भारत के लिए इस ट्रांजिट रूट से सेंट्रल एशिया, कॉकेशस और फिर यूरोप तक पहुँचने और यूरोपियन, सेंट्रल एशियन और दूसरे लोगों के लिए हिंद महासागर तक पहुँचने के लिए एक सुनहरे दरवाज़े जैसा होगा।'
साझा हित और फारस की खाड़ी
अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान भारत के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है। उन्होंने रेखांकित किया कि फारस की खाड़ी को लेकर दोनों देशों की चिंताएँ और हित काफी हद तक एक जैसे हैं। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए इस क्षेत्र में स्थिरता पर निर्भर है।
अराघची की नई दिल्ली यात्रा का संदर्भ
अपनी नई दिल्ली यात्रा के दौरान अराघची ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। इन बैठकों में होर्मुज स्ट्रेट की मौजूदा स्थिति और पश्चिम एशिया के व्यापक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ था। रवांची का ताज़ा फोन कॉल उसी कूटनीतिक संवाद की अगली कड़ी माना जा रहा है।
आगे क्या
भारत-ईरान के बीच यह कूटनीतिक संपर्क ऐसे समय में बढ़ रहा है जब क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। चाबहार पोर्ट के भविष्य और अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव पर दोनों देशों की नज़र बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संवाद-श्रृंखला से द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिल सकती है।