10 जुलाई 2026
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विदेश सचिव विक्रम मिस्री को ईरानी उप विदेश मंत्री रवांची का फोन, क्षेत्रीय हालात और चाबहार पर चर्चा

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विदेश सचिव विक्रम मिस्री को ईरानी उप विदेश मंत्री रवांची का फोन, क्षेत्रीय हालात और चाबहार पर चर्चा

सारांश

ईरान के उप विदेश मंत्री रवांची का विदेश सचिव मिस्री को फोन — यह महज़ शिष्टाचार नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत-ईरान के सक्रिय कूटनीतिक संवाद का संकेत है। चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी प्रतिबंधों का साया और होर्मुज स्ट्रेट की अनिश्चितता — दोनों देशों के साझा हितों की परीक्षा अभी जारी है।

मुख्य बातें

विदेश सचिव विक्रम मिस्री को 25 मई 2026 को ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रवांची ने फोन किया।
बातचीत में क्षेत्रीय घटनाक्रम और द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की गई।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने माना कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण चाबहार पोर्ट का विकास धीमा हुआ है।
अराघची ने चाबहार को भारत के लिए मध्य एशिया, कॉकेशस और यूरोप तक पहुँचने का 'सुनहरा दरवाज़ा' बताया।
अराघची ने अपनी नई दिल्ली यात्रा में PM मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की थी।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री को सोमवार, 25 मई 2026 को ईरान के राजनीतिक मामलों के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रवांची ने फोन किया। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी क्षेत्रीय घटनाक्रम और भारत-ईरान द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की गई।

क्या हुई बातचीत में

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी। उन्होंने लिखा, 'विदेश सचिव विक्रम मिस्री को ईरान के राजनीतिक मामलों के उप विदेश मंत्री, माजिद तख्त रवांची का कॉल आया। बातचीत में इलाके में हाल के विकास और द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा पर फोकस किया गया।' यह संपर्क ऐसे समय में हुआ जब होर्मुज स्ट्रेट और व्यापक पश्चिम एशिया में तनाव का स्तर बढ़ा हुआ है।

चाबहार पोर्ट: सहयोग का प्रतीक, लेकिन धीमी रफ्तार

इस महीने की शुरुआत में नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण चाबहार पोर्ट का विकास कुछ धीमा पड़ गया है। उन्होंने कहा, 'चाबहार पोर्ट ईरान और भारत के बीच सहयोग के लक्ष्यों में से एक है, और हमें बहुत खुशी है कि भारतीयों ने उस पोर्ट के डेवलपमेंट में अहम भूमिका निभाई।'

अराघची ने उम्मीद जताई कि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह पर अपना काम जारी रखेगा। उनके शब्दों में, 'मुझे यकीन है कि यह पोर्ट भारत के लिए इस ट्रांजिट रूट से सेंट्रल एशिया, कॉकेशस और फिर यूरोप तक पहुँचने और यूरोपियन, सेंट्रल एशियन और दूसरे लोगों के लिए हिंद महासागर तक पहुँचने के लिए एक सुनहरे दरवाज़े जैसा होगा।'

साझा हित और फारस की खाड़ी

अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान भारत के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है। उन्होंने रेखांकित किया कि फारस की खाड़ी को लेकर दोनों देशों की चिंताएँ और हित काफी हद तक एक जैसे हैं। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए इस क्षेत्र में स्थिरता पर निर्भर है।

अराघची की नई दिल्ली यात्रा का संदर्भ

अपनी नई दिल्ली यात्रा के दौरान अराघची ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। इन बैठकों में होर्मुज स्ट्रेट की मौजूदा स्थिति और पश्चिम एशिया के व्यापक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ था। रवांची का ताज़ा फोन कॉल उसी कूटनीतिक संवाद की अगली कड़ी माना जा रहा है।

आगे क्या

भारत-ईरान के बीच यह कूटनीतिक संपर्क ऐसे समय में बढ़ रहा है जब क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। चाबहार पोर्ट के भविष्य और अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव पर दोनों देशों की नज़र बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संवाद-श्रृंखला से द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय महत्वपूर्ण है — पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है और चाबहार पर अमेरिकी दबाव बढ़ रहा है। भारत एक नाज़ुक संतुलन साध रहा है: ईरान के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाए रखना और अमेरिका के साथ संबंध भी नहीं बिगाड़ना। चाबहार पोर्ट इस द्विधा का सबसे स्पष्ट प्रतीक है — जहाँ भारत ने निवेश किया है, लेकिन प्रतिबंधों के डर से पूरी क्षमता से आगे नहीं बढ़ पाया। मुख्यधारा की कवरेज इस भू-राजनीतिक पेचीदगी को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश सचिव विक्रम मिस्री और ईरानी उप विदेश मंत्री के बीच क्या बात हुई?
25 मई 2026 को ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रवांची ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री को फोन किया। बातचीत में पश्चिम एशिया के क्षेत्रीय घटनाक्रम और भारत-ईरान द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की गई।
चाबहार पोर्ट का विकास क्यों धीमा हुआ है?
ईरानी विदेश मंत्री अराघची के अनुसार, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण चाबहार पोर्ट का विकास धीमा पड़ा है। हालाँकि उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह पर अपना काम जारी रखेगा।
चाबहार पोर्ट भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
चाबहार पोर्ट भारत को मध्य एशिया, कॉकेशस और यूरोप तक पहुँचने का वैकल्पिक ट्रांजिट रूट देता है, जो पाकिस्तान को बायपास करता है। अराघची ने इसे भारत के लिए 'सुनहरे दरवाज़े' की संज्ञा दी है।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची की नई दिल्ली यात्रा में क्या हुआ था?
अराघची ने नई दिल्ली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। बैठकों में होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और पश्चिम एशिया के व्यापक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा हुई।
भारत और ईरान के बीच फारस की खाड़ी को लेकर क्या साझा हित हैं?
अराघची के अनुसार, फारस की खाड़ी में दोनों देशों की चिंताएँ और हित काफी हद तक एक जैसे हैं। भारत ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए इस क्षेत्र की स्थिरता पर निर्भर है।
राष्ट्र प्रेस
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