जयशंकर-अराघची मुलाकात: ब्रिक्स 2026 में पश्चिम एशिया तनाव और होर्मुज पर अहम चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 15 मई 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन ईरान के विदेश मंत्री डॉ. सैयद अब्बास अराघची के साथ विस्तृत बातचीत की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव, उसके व्यापक प्रभाव और दोनों देशों के द्विपक्षीय हितों पर विचार-विमर्श किया।
मुलाकात में क्या हुई चर्चा
जयशंकर ने बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'आज सुबह दिल्ली में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से डिटेल में बातचीत हुई। पश्चिम एशिया के हालात और उसके असर पर बात हुई। आपसी फायदे के द्विपक्षीय मामलों पर भी विचार शेयर किए। ब्रिक्स भारत 2026 में उनके शामिल होने के लिए शुक्रिया।' यह बैठक ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अपने उच्च स्तर पर बना हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रुख
सम्मेलन के पहले दिन गुरुवार को अराघची ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मौजूदा बाधाओं के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहराया। ईरान इस्लामिक रिपब्लिक के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा जानकारी के अनुसार, अराघची ने मीडिया से कहा, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज उन सभी कमर्शियल जहाजों के लिए खुला है जो ईरानी नौसेना के साथ सहयोग करते हैं। मौजूदा रुकावटें अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण पैदा हुई हैं।' गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है, और इस पर किसी भी तरह की बाधा का असर भारत सहित तमाम देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।
प्रधानमंत्री मोदी से भी मिले अराघची
अराघची ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। भारत में ईरान के दूतावास के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट के अनुसार, अराघची बुधवार रात भारत पहुँचे और दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल हुए। ब्रिक्स के अन्य प्रतिनिधियों के साथ भी क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
भारत-ईरान संबंधों का संदर्भ
यह बैठक भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, व्यापार और चाबहार बंदरगाह जैसे रणनीतिक मुद्दों की पृष्ठभूमि में हुई है। भारत पश्चिम एशिया में किसी एक पक्ष का समर्थन किए बिना कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की नीति पर चलता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाले हुए है और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ बनने की कोशिश कर रहा है।
आगे क्या
ब्रिक्स सम्मेलन में हुई इन द्विपक्षीय बैठकों के नतीजे आने वाले हफ्तों में भारत-ईरान कूटनीतिक संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पश्चिम एशिया में स्थिरता और होर्मुज जलमार्ग की सुरक्षा भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए सीधे मायने रखती है।