अराघची का बड़ा कूटनीतिक दौरा: पाकिस्तान, ओमान और रूस में होगी अहम चर्चा
सारांश
Key Takeaways
- ईरान के विदेश मंत्री अराघची कूटनीतिक दल के साथ पाकिस्तान, ओमान और रूस के दौरे पर रवाना हुए।
- पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच संपर्क माध्यम की भूमिका निभाएगा, लेकिन अराघची किसी अमेरिकी अधिकारी से नहीं मिलेंगे।
- 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में खामेनेई सहित कई वरिष्ठ ईरानी कमांडर मारे गए थे।
- 8 अप्रैल के युद्धविराम के बाद अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू की।
- 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई ईरान-अमेरिका वार्ता विफल रही और नई वार्ता में ईरान ने भाग लेने से इनकार किया।
- ओमान की राजधानी मस्कट में युद्ध से जुड़े मुद्दों पर और मॉस्को में द्विपक्षीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी।
तेहरान/इस्लामाबाद, 25 अप्रैल: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची एक उच्चस्तरीय कूटनीतिक दल के साथ पाकिस्तान, ओमान और रूस के दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव को कम करने की ईरानी सोच और रणनीति को अपने साझेदार देशों तक पहुंचाना है। अर्ध-सरकारी ईरानी समाचार एजेंसी 'तस्नीम' ने इस यात्रा की पुष्टि की है।
यात्रा का उद्देश्य और एजेंडा
अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मेरी इन यात्राओं का उद्देश्य द्विपक्षीय मामलों पर हमारे साझेदारों के साथ घनिष्ठ समन्वय स्थापित करना और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर परामर्श करना है। हमारे पड़ोसी हमारी प्राथमिकता हैं।" यह बयान ईरान की 'पड़ोसी-प्रथम' कूटनीति को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।
इस्लामाबाद में अराघची का दौरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान को एक संपर्क माध्यम के रूप में देखा जा रहा है जो ईरान की बात को अमेरिकी पक्ष तक पहुंचा सकता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंच चुका है।
अमेरिका से सीधी बातचीत नहीं
समाचार एजेंसी सिन्हुआ और ईरान के सरकारी टीवी आईआरआईबी के अनुसार, अराघची इस पूरी यात्रा के दौरान किसी भी अमेरिकी अधिकारी से प्रत्यक्ष बातचीत नहीं करेंगे। तस्नीम ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ईरान की अमेरिका के साथ सीधी वार्ता की कोई योजना नहीं है।
ओमान की राजधानी मस्कट में क्षेत्रीय मुद्दों और युद्ध से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी, जबकि मॉस्को में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर बातचीत होगी। ओमान पारंपरिक रूप से ईरान और पश्चिमी देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर संयुक्त हमला किया था। इस हमले में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और आम नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम हुआ। इसके बाद 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता हुई, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। इसके बाद अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी, जिससे ईरानी बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई।
नई वार्ता से इनकार और आगे की राह
इस सप्ताह पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच एक और दौर की बातचीत की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अमेरिका की जारी नौसैनिक नाकाबंदी और सख्त होती मांगों के कारण ईरान ने इस वार्ता में भाग लेने से इनकार कर दिया। यह स्थिति दर्शाती है कि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई अभी गहरी है।
विश्लेषकों का मानना है कि अराघची की यह यात्रा ईरान की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह सीधी बजाय बहुपक्षीय कूटनीति के जरिए दबाव कम करने की कोशिश कर रहा है। रूस और ओमान दोनों ऐतिहासिक रूप से ईरान के करीबी रहे हैं और ये देश मध्यस्थता में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
आने वाले दिनों में मस्कट और मॉस्को में होने वाली बैठकों के नतीजे यह तय करेंगे कि ईरान-अमेरिका तनाव में कोई कूटनीतिक सफलता मिल सकती है या नहीं।