बेल्लारी में अवैध पेड़ कटाई: सड़क चौड़ीकरण की आड़ में रात को काटे 25 पेड़, ठेकेदार समेत 8 गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- 25 पेड़ — 21 तापसी, 2 नीम और 2 पीपल — बेल्लारी में गुरुवार रात अवैध रूप से काटे गए।
- ठेकेदार समेत 8 आरोपियों पर कौल बाजार पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।
- वन विभाग ने 23 मार्च को 139 पेड़ बचाने का निर्देश दिया था, जिसे ठेकेदार ने नजरअंदाज किया।
- आरोपियों ने वन अधिकारी का मोबाइल छीनकर जमीन पर फेंका, सबूत नष्ट करने का आरोप भी लगा।
- घटनास्थल से लगभग पांच टन लकड़ी जब्त की गई।
- कर्नाटक वन अधिनियम 1963 और कर्नाटक वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 के तहत अलग से भी मामला दर्ज।
बेल्लारी (कर्नाटक), 25 अप्रैल। कर्नाटक के बेल्लारी शहर में सड़क चौड़ीकरण परियोजना की आड़ में गुरुवार की देर रात बिना किसी वैध अनुमति के 25 पेड़ अवैध रूप से काट दिए गए। उप वन अधिकारी सुनीलकुमार आर. चौहान की अगुवाई में वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और ठेकेदार समेत 8 लोगों के खिलाफ कौल बाजार पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई। इस घटना ने कर्नाटक में पर्यावरण संरक्षण कानूनों की अनदेखी को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
मध्यरात्रि में पकड़ी गई अवैध कटाई
यह घटना गुरुवार रात करीब 10:30 बजे तब सामने आई जब वन विभाग को सूचना मिली कि विद्यानगर सर्कल और कोलागल रोड के बीच पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। सूचना मिलते ही उप वन अधिकारी सुनीलकुमार आर. चौहान और उनकी टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची।
अधिकारियों ने मौके पर मजदूरों को भारी मशीनों की सहायता से सड़क किनारे के पेड़ काटते हुए पाया। जब अनुमति पत्र मांगा गया तो मौजूद लोगों ने कार्य को अत्यावश्यक बताते हुए बिना अनुमति के ही काम जारी रखा।
अधिकारी का मोबाइल छीनकर जमीन पर पटका
वन अधिकारियों ने जब कटाई रोकने का प्रयास किया तो टिल्लू और रवि नामक दो व्यक्तियों ने घटना रिकॉर्ड कर रहे अधिकारी का मोबाइल फोन छीनकर जमीन पर फेंक दिया, जिससे वह क्षतिग्रस्त हो गया। यह कृत्य सरकारी कर्तव्य में बाधा और सबूत नष्ट करने की श्रेणी में आता है।
बाद में स्थानीय पुलिस की सहायता से कटाई का काम रुकवाया गया। घटनास्थल से लगभग पांच टन लकड़ी जब्त की गई।
25 पेड़ काटे गए — तापसी, नीम और पीपल
निरीक्षण में सामने आया कि कुल 25 पेड़ काटे गए थे — जिनमें 21 तापसी, 2 नीम और 2 पीपल के पेड़ शामिल थे। पीपल और नीम जैसे पेड़ पर्यावरण और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
कौल बाजार पुलिस स्टेशन में टिल्लू चौधरी, रत्नबाबू, रवि मोका समेत 8 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वन विभाग ने अलग से कर्नाटक वन अधिनियम 1963 और कर्नाटक वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 के तहत भी मामला दर्ज किया है।
वन विभाग के निर्देश की खुली अनदेखी
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस परियोजना के लिए 233 पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी। किंतु वन विभाग ने 23 मार्च को पर्यावरणीय चिंताओं के मद्देनजर 139 पेड़ बचाने हेतु फुटपाथ के डिजाइन में बदलाव करने का स्पष्ट निर्देश दिया था।
ठेकेदार ने इस आधिकारिक निर्देश की सरासर अनदेखी करते हुए रात के अंधेरे में पेड़ काट डाले। उप वन संरक्षक डॉ. बसवराज केएन ने कहा कि नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
व्यापक संदर्भ — विकास बनाम पर्यावरण का पुराना टकराव
यह घटना उस व्यापक पैटर्न का हिस्सा है जिसमें देशभर में सड़क, हाईवे और शहरी विस्तार परियोजनाओं के नाम पर हरे-भरे पेड़ों की बलि दी जाती है। कर्नाटक में पिछले कुछ वर्षों में शहरी विकास परियोजनाओं के दौरान वृक्ष कटाई के कई मामले सामने आ चुके हैं।
गौरतलब है कि रात के अंधेरे में कटाई करना इस बात का संकेत है कि आरोपियों को अपने कृत्य की अवैधता का पूरा ज्ञान था। यह भी विचारणीय है कि PWD और ठेकेदार के बीच समन्वय की कमी थी या यह जानबूझकर की गई अनदेखी — यह जांच का विषय है।
आने वाले दिनों में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच में यह स्पष्ट होगा कि क्या इस कटाई के पीछे किसी बड़े अधिकारी या राजनीतिक संरक्षण का हाथ था। साथ ही, 139 बचाए जाने वाले पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब वन विभाग की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।